281 फीसदी बढ़ी उपराज्यपालों की सैलरी

नई दिल्ली: केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात लेफ्टिनेंट गवर्नर्स की सैलरी में करीब 281 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर्स की सैलरी में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के इस फैसले से ले. गवर्नर्स के वेतन और भत्ते अब भारत सरकार के सचिव स्तर के समान हो जाएगा। यह 1 जनवरी 2016 से प्रभावी होगा।

कैबिनेट ने केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात ले. गवर्नर की सैलरी 80 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2,25,000 प्रतिमाह कर दिया है। इसके अलावा महंगाई भत्ता, अनुमोदन भत्ता 4 हजार रुपये प्रतिमाह और स्थानीय भत्ते भी मिलेंगे। यह भारत सरकार में सचिव स्तर पर तैनात अधिकारियों को मिलने वाले भत्ते के समान होगा। यह उन शर्तों के अधीन होगा कि ले. गवर्नर को मिलने वाली कुल राशि (अनुमोदन भत्ता और स्थानीय भत्ते को छोड़कर) राज्य के राज्यपाल को मिलनेवाले वेतन से ज्यादा न हो। ले. गवर्नर्स को बढ़े हुए वेतन का लाभ 1 जनवरी 2016 से मिलेगा।

केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात ले. गवर्नर के वेतन-भत्ते भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारियों के समान होते हैं। ले. गवर्नर्स की सैलरी पिछली दफा कैबिनेट की मंजूरी के बाद 1 जनवरी 2006 से संशोधित हुई थी। इस वेतनमान के तहत ले. गवर्नर की सैलरी 26 हजार रुपये (फिक्स्ड)  से बढ़ाकर 80 हजार रुपये (फिक्स्ड) प्रतिमाह किया गया था। इसके अलावा महंगाई भत्ता, अनुमोदन भत्ता 4 हजार रुपये प्रतिमाह और स्थानीय भत्ता भी उन्हें मिलता था। आपको बता दें कि भारत सरकार में सचिव स्तर के अधिकारियों का वेतन 1 जनवरी 2016 से संशोधित किया गया था। इस संशोधन के तहत उनका वेतन 80 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2,25,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था।

 

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