सरकारी उदासीनता के कारण छात्रों का भविष्य अधर में

उत्तराखण्ड में दो सरकारी होटल मैंनेजमेट कालेज हैं एक देहरादून में तो, दूसरा अल्मोड़ा में है. जिन बच्चों को देहरादून में प्रवेश नहीं मिल पाता है वह अल्मोड़ा आकर अपनी एचएम की पढ़ाई करते हैं. विभाग की उदासीनता के कारण बच्चों का भविष्य अधर में लटकता जा रहा है. प्रधानाचार्य की नियुक्ति कई वर्षों से नही हुई. उत्तराखण्ड सहित कई प्रदेशों को बच्चें अल्मोड़ा आते हैं और आधी-अधूरी पढ़ाई करके लौटते हैं. कई दशकों कॉलेज में प्रधानाचार्य नहीं है, तो 10 लैक्चर में से सिर्फ 3 लैक्चरार के भरोसे छात्रों का भविष्य है. इस संस्थान में प्रतिवर्ष छात्रों की संख्या भी कम होती जा रही है.

कई वर्षों से अल्मोड़ा के मुख्य विकास अधिकारी के पास ही प्रधानाचार्य का चार्ज है. सीडीओ कॉलेज प्रधानाचार्य और लैक्चररों की नियुक्ति की बात कहा कि पहाड़ों में प्रधानाचार्य और लैक्चरर नहीं आ रहे हैं. जिसके कारण कॉलेज में नियुक्ति नहीं हो पा रही है.

अल्मोड़ा में स्थित जगत सिंह बिष्ट होटल मैनेजमेंट संस्थान की खस्ता हालात पर अल्मोड़ा होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश बिष्ट ने दुख जताया. उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार जल्द से जल्द कॉलेज में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के साथ लैक्चर्स की भी नियुक्ति करे.

सरकारी होटल मैंनेजमेंट की हालात है उससे लगता है कि विभाग पहाड़ के सरकारी संस्थानों के लिए कितना जागरुक है. साथ ही कई वर्षों से शिक्षकों और प्रधानाचार्य की नियुक्ति न होना भी कई सवाल खड़े करता है.

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