Big scam in skill development centers of Uttarakhand

उत्तराखंड के कौशल विकास केंद्रों में बड़ा घोटाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट कौशल विकास पर उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार का घुन लग चुका है। खुद राज्य के कौशल विकास मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को इसमें बड़े घोटाले की बू आ रही है। प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार की जो शिकायतें आ रही हैं वे उनके कार्यकाल से पहले की हैं। उनसे पहले एक साल तक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों में कौशल विकास की कमान थी तो जाहिर है कि घोटाले को लेकर उठते सवालों का जवाब भी उन्हें ही देना पड़ेगा। बहरहाल घोटाले की शिकायतों की जांच में कौशल विकास के नए मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत जो तत्परता दिखा रहे हैं उससे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं
प्रदेश में नौकरशाहों के बेलगाम होने की खबरें कई बार सामने आती रही हैं। विकास कार्यों में लापरवाही और मनमर्जी के आदी हो चुके ये नौकरशाह अब विभागीय मंत्रियों को जरा भी तबज्जो नहीं देते। विभागीय कामकाज में मंत्रियों को बाईपास करते हैं। हाल ही में कौशल विकास मंत्री हरक सिंह रावत को उनके विभाग के सचिव ने कौशल विकास मिशन कार्यक्रम में जिस तरह से बाईपास किया उससे नाराज मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को कड़ा पत्र लिखा है। मंत्री के इस पत्र से ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट कौशल विकास मिशन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राज्य में इस मिशन को एक साजिश के तहत पलीता लगाया जा रहा है। इसमें जमकर भ्रष्टाचार और करोड़ों के बजट को ठिकाने लगाने का काम शुरू हो चुका है। वह भी तब जबकि राज्य में एक वर्ष तक कौशल विकास योजना की कमान खुद मुख्यमंत्री के हाथों में थी। ऐसे में मुख्यमंत्री भी सवालों के घेरे में हैं।
केंद्र सरकार कौशल विकास योजना से काफी उत्साहित है। स्वयं प्रधानमंत्री इसका देश-विदेश में प्रचार करते हैं, लेकिन उत्तराखण्ड में मोदी के हुए ड्रीम प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार और गोलमाल की आशंका खुद विभागीय मंत्री ने जताई है।स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। कौशल विकास कार्यक्रम के संचालन के लिए राज्य में एक प्रशासनिक ढांचा बनाया गया है। राज्य के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश कौशल विकास विभाग का इस कार्यक्रम के प्रमुख सचिव तो सूचना महानिदेशक पंकज कुमार पाण्डे को इस प्रोजेक्ट का निदेशक बनाया गया।
अब राज्य में स्किल डेवलपमेंट मिशन की बात करें तो महाराष्ट्र, पंजाब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में प्रदेश के कौशल विकास कार्यों को लेकर जमकर प्रचार-प्रसार किया। करोड़ों के विज्ञापनों के जरिए बाहरी प्रदेशों की कंपनियां को उत्तराखण्ड में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सरकार जहां एक ओर दूसरे राज्यों की कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए करोड़ों रुपए के विज्ञापन जारी करने चर्चा में रही, वहीं इन कंपनियों के हित में अपने राज्य की कंपनियों को हतोत्साहित करने वाली उसकी शर्तें भी खूब चर्चा में रही।
कौशल विकास केंद्रों के संचालन के लिए कंपनियों के चयन में जो शर्तें रखी गई उनमें पांच बिंदु निर्धारित किए गए। इन बिंदुओं के अनुसार कंपनियों के आकलन के लिए कुल 40 अंक रखे गए। सबसे पहला बिंदु वार्षिक टर्नओवर का था, जिसमें प्रति 20 लाख पर 1 नंबर दिए जाने की व्यवस्था की गई। इसके तहत बाहरी राज्यों की कंपनियां जिनका करोड़ों में टर्न ओवर था उन्हें आसानी से 20 में से 20 नंबर दे दिए गए, जबकि उत्तराखण्ड की कंपनियों को इस बिंदु के कारण बुरी तरह मात खानी पड़ी। इसमें राज्य की अधिकतर कंपनियों को एक या दो नंबर ही मिल पाए। दूसरा बिंदु कौशल विकास कार्य अनुभव का था। जिसके लिए 5 अंक रखे गए। तीसरा बिंदु प्रदेश में कार्य करने पर पांच अंक मिलने और चौथा बिंदु स्वयं का केंद्र होने से संबंधित था। इसके अनुसार मिशन के संचालन के लिए कंपनियों के पास स्वयं के ऐसे केंद्र होने चाहिए जहां वे कार्यक्रम संचालित कर सकें। कंपनियों के ये केंद्र सुविधाओं से संपन्न जैसे कि भूमि आहाता, सीटों के अनुपात में भवन, जलपान, शैचालय और पार्किंग की सुविधाओं से युक्त होने चाहिए। जिसके लिए कुल नंबर पांच रखे गए। पांचवा और अंतिम बिंदु सेवा योजन यानी प्लेसमेंट की सुविधा का रखा गया। जिसमें कौशल विकास के कामों के बाद अभ्यर्थी को नौकरी दिए जाने का विषय था इसके लिए भी पांच नंबर रखे गए।
अगर कोई आरोप लगा रहा है तो मैं वाहियात आरोपों पर कोई जवाब नहीं देना चाहता। अगर आपके पास कोई प्रमाण है तो मेरे पास आइये, मैं देखूंगा। तब कोई जबाब दूंगा। मुझे नहीं पता कि आपके पास कौन सी लिस्ट है।
पंकज कुमार पांडे, सचिव एवं निदेशक कौशल विकास योजना उत्तराखण्ड
स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में जबरदस्त भ्रष्टाचार हो रहा है। बाहरी प्रदेशों की बड़ी कंपनियों को काम दिया जा रहा है। आज उत्तराखण्ड की कंपनियां बाहरी कंपनियां के काम को सबलेट में कर रही हैं। स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के बजट से विदेश यात्राएं की जा रही हैं। अपने परिवार को भी विदेशों में घुमाया जा रहा है।
एमएम जोशी, अध्यक्ष उत्तराखण्ड स्किल डेवलपमेंट एसोसिएशन
उत्तराखण्ड की कंपनियों के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में जानबूझ कर शर्तें लगाई गई हैं, जबकि बाहरी कंपनियों को हर शर्त से मुक्त रखा गया है। इससे साफ है कि इस मामले में कोई न कोई बड़ा खेल रचा गया है।
सुदेश शर्मा, कोषाध्यक्ष उत्तराखण्ड स्किल डेवलपमेंट एसोसिएशन

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