बीपीओ सेक्टर में रोजगार की व्यापक सम्भावनाये

कभी युवाओं के बीच पार्ट टाइम करियर विकल्प के रूप में मशहूर रहा बीपीओ सेक्टर अब अपनी तस्वीर बदल चुका है। युवा इसे फुलटाइम करियर के साथ खुद के व्यक्तित्व निखारने के मौके के तौर पर देख रहे हैं। यही वजह है कि भारत सरकार बीपीओ सेक्टर में रोजगार की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए इसके विस्तार में लगी है। सरकार ने अपने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत आईबीपीएस (इंडिया बीपीओ प्रमोशन स्कीम) और एनईबीपीएस (नॉर्थ ईस्ट बीपीओ प्रमोशन स्कीम) को लागू किया था। इसका मकसद दूर-दराज के इलाकों में युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना है।

खास बात यह है कि बीपीओ सेक्टर किसी भी विषय के ग्रेजुएट छात्र को अपने यहां करियर-निर्माण के बेहतर मौके देता है। यहां की कार्य-संस्कृति अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होने से युवाओं को अपने पेशेवर जीवन में कई तरह के मौके मिलते हैं। बीपीओ सेवाओं के विस्तार से यहां रोजगार के मौकों में भी इजाफा हुआ है।.

दूसरी कंपनियों का होगा काम
इस सेक्टर में नौकरियां दी ही इसलिए जाती हैं कि आप दूसरी कंपनियों का काम कर सकें। बीपीओ यानी बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग का मतलब ही है दूसरी कंपनी के लिए अपनी सेवाएं देना। ये कंपनियां कन्टेंट राइटिंग से जुड़ी हो सकती हैं, या फिर मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन से। इस कंपनी के पास सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग का काम भी हो सकता है या फिर एचआर और फाइनेंशियल सर्विसेज का। यहां तकनीकी या गैर-तकनीकी पेशेवर, देशी-विदेशी ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से कंपनी को अपनी सेवाएं देते हैं।

बीपीओ सेवाओं में 50% की बढ़त
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश, कुशल और सस्ते कामगारों की वजह से अपना ज्यादातर काम भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और एशिया के दूसरे देशों से करवाते हैं। दुनिया के कुल बीपीओ बाजार का करीब 56 प्रतिशत भारत में है। निश्चित रूप से भारत में बीपीओ सेक्टर बढ़ रहा है। इससे मिलने वाले राजस्व में 54 प्रतिशत की बढ़त भी दर्ज की गई है। बीते वर्षभारतीय बीपीओ सेवाओं में 50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।

करियर काउंसलर आशीष आदर्श कहते हैं कि बीपीओ का क्षेत्र कॉलेज से तुरंत निकले छात्रों के लिए मुफीद है, क्योंकि यहां आकर उनके व्यक्तित्व में काफी निखार आ जाता है। वे जहां एक ओर विभिन्न लोगों से संवाद कला सीखते हैं, वहीं दूसरी ओर पेशेवर रूप से परिपक्व होते जाते हैं। फिर भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की एक सीमा है, जिसके बाद युवाओं को प्रबंधन स्तर की अनेक नौकरियों में आने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।

बीपीओ बनाम केपीओ
आमतौर पर जहां बीपीओ (बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग) सेक्टर में डाटा एंट्री, प्रॉसेसिंग, टेक्निकल सपोर्ट जैसे काम किए जाते हैं, वहीं केपीओ (नॉलेज प्रॉसेस आउटसोर्सिंग) में ढेर सारे विकल्प हैं, जैसे रिसर्च एंड डेवलपमेंट, बिजनेस एंड मार्केट रिसर्च, नेटवर्क मैनेजमेंट, मेडिकल सर्विसेज आदि। केपीओ में जाने के लिए जहां खास पढ़ाई की जरूरत होती है, वहीं बीपीओ में बुनियादी पढ़ाई से भी काम चल जाता है।

नौकरी के लिए परखें ये बातें
द्विभाषियों के लिए बेहतर मौके : भारत में बीपीओ सेवा क्षेत्र की सैकड़ों कंपनियां विभिन्न विदेशी भाषाओं में विदेशों को अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसलिए इस सेक्टर में रोजगार के लिए ग्रेजुएशन डिग्री के साथ अंग्रेजी भाषा पर बेहतर पकड़ होना जरूरी है। कुछ क्षेत्रों के बीपीओ के लिए अलग तरह की योग्यता की मांग रहती है। जैसे, मेडिकल या तकनीक से जुड़े क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौकरी पाने में विशेष फायदा मिलता है। चूंकि विदेशी कंपनियों की व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित काम करना होता है, इसलिए कई भाषाओं का ज्ञान रखना बेहतर होता है। .

अंग्रेजी की समझ है जरूरी: विशेषज्ञ मानते हैं कि ज्यादातर बीपीओ में नौकरी के आवेदन के समय कुछ विशेष चर्चा नहीं होती है। आमतौर पर उम्मीदवार की सिर्फ अंग्रेजी भाषा पर पकड़ को ही परखा जाता है।

अनुभवी हैं तो: अगर फ्रेशर बीपीओ या फिर केपीओ में नौकरी करना चाहते हैं तो उन्हें प्रॉसेस एक्जिक्यूटिव के तौर पर नौकरी ढूंढ़नी चाहिए। अगर उम्मीदवार को आईटी के क्षेत्र का अच्छा अनुभव है तो वे बीपीओ या फिर केपीओ क्षेत्र में रिसर्च एंड एनालिटिक्स, लीगल सर्विसेज, ऑपरेशन मैनेजमेंट, कन्टेंट मैनेजमेंट, डाटा एनालिटिक्स जैसे विभागों में नौकरी ढूंढ़ सकते हैं।

वेतन भी करता है प्रेरित
बीपीओ इंडस्ट्री निरंतर ऊंचाई पर बनी रही है, इसलिए इस क्षेत्र में वेतन भी अच्छा मिलता है। भारत में बीपीओ सेक्टर में नौकरी की शुरुआत में 15000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। इसमें अनुभव के साथ इजाफा होता है।

विदेशी धरती पर मौके 

बीपीओ में काम करते हुए विदेश जाकर काम करने का मौका भी मिलता है। वजह ये है कि ज्यादातर बीपीओ कंपनियों के विदेशों में दफ्तर भी होते हैं। जहां समय-समय पर कंपनी अपने कुछ कर्मचारियों को भेजती है। इस तरह विदेशों में काम के मौके भी बनते हैं।

इस क्षेत्र की चुनौतियां

कार्य और निजी जिंदगी के बीच तालमेल बनाना मुश्किल होता है। ऐसा अकसर जल्दी सुबह या देर रात तक नौकरी में रहने की जरूरत की वजह से होता है। बीपीओ सेक्टर में कार्य-अनुभव का कोई विशेष फायदा किसी दूसरे पेशे में नहीं मिलता। ऐसा माना जा रहा है कि ऑटोमेशन के चलते यहां अधिक सक्षम लोगों की मांग बढ़ेगी।

कुछ बड़े बीपीओ नियोक्ता में जेनपेक्ट, टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, डब्लू एनएस ग्लोबल, एचजीएस जैसी कंपनियां आती हैं। ये इंटरव्यू के समय कुछ खास चीजों को परखती हैं, जिनमें शामिल हैं-

जनरल रिटेन टेस्ट: इसमें आपकी इंग्लिश पर पकड़ और थोड़ा बहुत गणित के बारे में जानने की कोशिश होती है।

एचआर स्क्रीनिंग: इसमें कंपनी के एचआर अधिकारी उम्मीदवार को ग्रुप डिस्कशन के जरिये परखते हैं।

वॉइस एंड एक्सेंट राउंड: इस राउंड में आपकी आवाज को टेस्ट किया जाता है। सुधार या फिर विशेषताओं पर चर्चा की जाती है।

वेतन: इस राउंड में आपकी प्रतिभा को देखते हुए वेतन कितना मिल सकता है, इस पर बात होती है।

ध्यान रहे कि इंटरव्यू के शुरुआती राउंड में ‘टेल अस अबाउट योरसेल्फ’ यानी अपने बारे में कुछ बताएं? जैसे सवाल पूछे ही जाते हैं। जवाब 4 से 5 लाइन से ज्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए, जिसे बताने में एक मिनट से ज्यादा का समय नहीं लगना चाहिए।

कुछ सवाल जो पूछे ही जाएंगे

‘ अपने बारे में बताएं?.

‘ बीपीओ क्या है और ये कैसे काम करता है?

– ‘नाइट शिफ्ट’ में काम करने में कोई दिक्कत तो नहीं है?

– ऑफ शोर आउटसोर्सिंग क्या होती है?

– इन बाउंड और आउट बाउंड कॉल सेंटर्स में क्या अंतर होता है?

– आपको क्यों लगता है कि बीपीओ आपके लिए सही करियर विकल्प है?

– फोन पर ग्राहकों को बात समझाना आपके लिए कठिन तो नहीं होगा?

– अगले पांच साल में आप खुद को कहां देखते हैं?

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