OPINION

भारतीय छात्रों में अमेरिका जाने की होड़

अप्रवासियों के प्रति अप्रिय माहौल के बीच ट्रंप प्रशासन ने वीसा कानूनों को सख्त बनाने की कोशिश की है. फिर भी भारत अपनी युवा प्रतिभाओं को अमेरिका के विश्वविद्यालयों का रुख करने से रोक पाने में असफल हो रहा है. जानकार बताते हैं कि निचले रैंक के भारतीय विश्वविद्यालयों, स्तरहीन पाठ्यक्रम और देश में नौकरी की सीमित संभावनाएं छात्रों के ...

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मध्यस्थता के पुराने असफल खिलाड़ी हैं श्री श्री रविशंकर

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दिल्ली में यमुना के कछार में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव कर यमुना की तराई को अपूरणीय क्षति पहुंचा चुके आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर अब अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता कर रहे हैं. उपरोक्त बातें नेशनल ग्रीन ट्राइब्युनल ने समय-समय पर अपनी सुनवाई के दौरान श्री श्री और उनके संगठन आर्ट ऑफ लिविंग के बारे में कही हैं. राम ...

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बेड़ियों में जकड़ा बचपन..?

यूएन की रिपोर्ट कहती है कि 2016 में रोज़ाना 15,000 हज़ार बच्चे अपना 5वां जन्मदिन भी नहीं मना सके. यानी 5 साल से कम उम्र के 7000 बच्चों की रोजाना मौत होना दर्ज की गई. इनमें से 46 फीसदी यानी करीब 7,000 बच्चों की आंखें अपने जन्म के 28 दिनों के भीतर ही बंद हो गईं. हालांकि 2016 के दौरान बाल ...

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हिमाचल और गुजरात में किस करवट बैठेगा चुनावी ऊंट?

हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव इस मायने में विशेष हैं कि उत्तर एवं पश्चिम भारत के इन दो राज्यों के ये चुनाव नरेन्द्र मोदी के दो बड़े निर्णयों से प्राप्त परिणामों के बाद हो रहे हैं. विमुद्रीकरण के लगभग तीन माह बाद फरवरी में 5 राज्यों में जो चुनाव हुए थे, उनमें उत्तरप्रदेश में जहां बीजेपी ने समाजवादियों ...

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विकास सिर्फ औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचने तक सीमित

आज भारत विकसित देशों के विकास संबंधी मानकों को अपना तो रहा है, पर यह विकास सिर्फ औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचने तक सीमित रह गया है। सबसे ज्यादा मार खेती-किसानी पर पड़ी है, जहां तकनीक के महंगे होने की वजह से किसान कई समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं। इसका असर आम जनमानस पर भी पड़ने लगा है। सरकार ...

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दिल्ली की आबोहवा में प्रदूषण से आपातकाल जैसे हालात

(मोहन भुलानी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ) दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में आजकल जहरीले धुएं के आतंक ने सबको चिंतित कर दिया है। दिल्ली की आबोहवा में प्रदूषण इस कदर बढ़ चुका है कि यहां आपातकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं। ऐसे में, स्कूलों को बंद करना लाजिमी था। मगर सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसा चलता ...

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नोटबंदी का एक साल -रह गए वो 10 सवाल

नोटबंदी का एक साल हो गए। पिछले साल आज के ही दिन प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले से पूरे देश में अफरा-तफरी सा माहौल हो गया। सरकार ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया और जनता के हितकारी बताया गया। ऐसा कहा गया कि इस फैसले से कालेधन पर लगाम लगेगी और देश भ्रष्टाचारमुक्त होगा। इस फैसले को एक साह हो ...

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भारतीय राजनीति में टोना-टोटका और जादू-मंतर

राजनीति में ज्योतिष, पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र को लेकर लालू प्रसाद यादव के ताजा प्रकरण पर कुछ कहने-बताने से पहले आइए, एक ज्योतिषी के अभिमत से परिचित हो लेते हैं। वह बताता है- ‘चुनाव जीतने के तीन बल हैं। अपनी कुन्डली को खोल कर देखिये कि यह तीनों बल आपके किस किस भाव में अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं, और यह तीनो ...

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FIR के तुरंत बाद कितनी सही हैं गिरफ्तारी ?

राष्ट्रीय पुलिस आयोग का कहना भी है कि देश में 60 फीसदी गिरफ्तारियां अनावश्यक होती हैं जिन पर जेलों का 43.2 प्रतिशत खर्चा होता है। न्यायालय, पुलिस और लोक अभियोजक आपराधिक न्याय प्रक्रिया के आधार स्तम्भ माने जाते हैं। पुलिस अपराधिक मामले में तथ्यान्वेषण तथा साक्ष्य एकत्र करती है और लोक अभियोजक उसे प्रस्तुत कर अभियुक्त को दण्डित करवाने में ...

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न्याय देवता के दरबार में क्यों लंबित हैं 3 करोड़ मुकदमें !

राष्ट्रीय अदालत प्रबन्धन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक बीते तीन दशकों में मुकदमों की संख्या दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है। अगर यही स्थिति बनी रही तो अगले तीस वर्षों में देश के विभिन्न अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या करीब पंद्रह करोड़ तक पहुंच जाएगी। इस मामले में विधि एवं न्याय मन्त्रालय के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के ...

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