OPINION

नेता आखिर कब तक जनमुद्दों की अनदेखी करेंगे?

कुछ वर्ष पहले दीवारों पर कई राजनीतिक स्लोगन के बोल दिखाई पड़ते थे जिन्हें पढ़कर उस दौर के लोग जोश से लबरेज़ हो जाते थे। जैसे,  “जो मज़दूरों और किसानों के हक की बात करेगा, वहीं सत्ता पर राज करेगा”, “शिक्षा पर सभी का समान अधिकार हो”, “बेरोज़गारी मुक्त भारत का सपना सच कर दिखना है” वगैरह-वगैरह। खासतौर पर आज़ादी ...

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एनकाउंटर केस: पुलिसिया रौबदारी के खात्मे की शुरुवात

खून का बदला मुआवज़े से, ये क्या बात हुई। मैं अपने गुस्से में, अपने रौब में जाकर किसी को भी गोली मार दूं और फिर बाद में सहानुभूति और प्रायश्चित के नाम पर पैसे दे दूं, तो क्या उसको अच्छा लगेगा जिसने किसी अपने को खोया है? मुझे नहीं लगता जो अपने को प्यार करता होगा, उससे लगाव रखता होगा ...

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उग्र भीड़ व गुंडागर्दी क्या संविधान की अवहेलना नहीं करती?

भारत के संविधान की प्रस्तावना कहती है कि- “हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिर्पेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता ...

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गाय के गोबर से बने हैंडमेड पेपर से मुनाफा अर्जित

खादी एवं ग्रामोद्योग उद्योग मिशन की एक यूनिट कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (KNHPI) द्वारा इस पेपर का निर्माण किया गया है। इस हैंडमेड पेपर को गाय के गोबर और चिथड़े कागज को मिलाकर बनाया गया है। जानवरों के गोबर को आमतौर पर ज्यादा उपयोगी नहीं माना जाता। हालांकि इसे खेतों में खाद के तौर पर जरूर इस्तेमाल किया जाता ...

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बंधुआ मज़दूर, जिन्हें कभी छुट्टी ही नहीं मिलती

आज जब मैं ट्रेन से घर जा रहा था तब शौचालय के पास एक व्यक्ति बैठा था जिसकी आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। उसने मुझसे मोबाइल फोन मांगा कि भाई साहब एक फोन करना है। मैंने मोबाइल निकालकर उसके बताये नंबर पर फोन लगाकर उसे दे दिया पर वो फोन में किसी और भाषा में बात कर ...

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अनूप जलोटा और जसलीन से समाज असहज क्यों हो जाता है?

(राजीव चौधरी ) प्यार को देखने का सबका अपना अलग-अलग नज़रिया होता है, धर्म का अपना अलग नज़रिया है, तो समाज का अलग। खुद के प्रेम में महानता दिखाई देती है तो दूसरे के प्रेम में वासना। इस विषय में प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास की एक कविता की मशहूर पंक्ति भी है, “अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत ...

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SC का सारा फैसला वोटबैंक की राजनीति पर आकर सिमट जाता है!

(आशीष झा ) संसद में एससी-एसटी अधिनियम बिल को उसके पूर्व रूप में लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने संविधान संसोधन विधेयक पेश कर दिया है। विपक्षी पार्टियां भी इस विधेयक पर एकमत है, तो उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही यह अपने 1989 वाले पूर्वरूप में आ जाएगी। जिसके अंतर्गत फिर से किसी व्यक्ति पर एससी-एसटी ...

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दोराहे पर खड़ी कश्मीर के यतीमख़ानों की ज़िन्दगी

ये कहानी है कश्मीर के कुछ यतीमख़ानों की जहां ज़िन्दगी के दोराहे पर खड़ी एक पीढ़ी अब जवान हो रही है. इस छत के नीचे रहने वाले हर किरदार की अपनी कहानी है लेकिन असली कश्मकश है उनमें, जिनके अब्बू कभी आतंकवाद के रास्ते पर चले थे और सेना की कार्रवाई में दुनिया छोड़ गए. .इन यतीमख़ानों में हमारी मुलाकात ...

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चुनाव आते ही जातिगत राजनीति हावी

इस साल दिसंबर में होने वाले हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले जातिगत राजनीति सिर चढ़ कर बोलने लगी है. बात हो रही है मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सवर्णों के उस आंदोलन की जिसके विरोध के चलते कई मंत्रियों, सांसदों की घेरेबंदी हो रही है और उन्हें आंदोलनकारियों से बचाने के लिए पीछे के ...

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छोटे से गांव से निकल कर “लल्लनटॉप” बनाने का दिलचस्प सफर

उत्तर-प्रदेश के छोटे से गांव से निकल कर लल्लनटॉप पत्रकार बनने का दिलचस्प सफर जब पत्रकार की बात आती है तो एक झोला लिए हुए कुर्ता पहने आदमी की तस्वीर यकायक मष्तिष्क में उभर कर आ जाती है लेकिन आधुनिकता के दौर में पत्रकारों के काम काज में भी बहुत परिवर्तन आ गया है । सोशल मीडिया के दौर में भ्रामक और अफवाह ...

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