अब शिक्षा का व्यापार करेगी त्रिवेंद्र सरकार!

फीस बढ़ोत्तरी का अधिकार संस्थानों को देने से पहले सीएम त्रिवेंद्र के जहन में एक बार भी ये सवाल नहीं उठा कि प्रदेश के गरीब तबके के लोग इस बेतहासा वृद्धि को कैसे वहन करेंगे। 2017 के चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर बीजेपी पर आंख मूंदकर विश्वास कर रही जनता के लिए ये किसी बज्रपात से कम नहीं था।

कॉलेज का एकाएक 4-5 लाख की फीस को बढ़ाकर 20 लाख कर देना वो भी सरकार की शह पर ये जनता के लिए बर्दाश्त से बाहर था। इसे भरोसे पर कुठाराघात जान छात्र और उनके अभिभावक सरकार से जवाब मांगने के लिए सड़कों पर उतर आये, लेकिन ये दिन देखने के लिए तो जनता ने बीजेपी को वोट देकर भारी बहुमत से नहीं जिताया था।

राजस्व का था सारा खेल
राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार अपनी जनता का ही हित भूल गई। सरकार का विशेषज्ञ दल (थिंक टैंक) को ये तक समझ नहीं आया कि निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के लोग किस तरह अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करेंगे। क्या सरकार और उनके विशेषज्ञ दल  ने केवल उच्च और उच्चतम वर्ग तक ही डॉक्टरी की पढ़ाई सीमित करने का मन बना लिया था? फीस बढ़ोत्तरी की खुली छूट तो इसी ओर इशारा कर रही है।

सरकार इस बात से भी अनजान नहीं है कि निजी स्कूल फीस में मनमानी वृद्धि कर अभिभावकों को किस कदर परेशान कर रही है। इसके बावजूद मेडिकल की पढ़ाई में भी फीस के लिए फ्री हैंड देना किसी बेवकूफी से कम नहीं है।

निवेशकों के हितैषी त्रिवेंद्र
सरकार के मुखिया ने निवेशकों के बारे में सोचते हुए बेहिचक सार्वजनिक तौर पर बयान दे दिया कि इन्वेस्टर के करोड़ों रुपयों का ख्याल रखना होगा और इन्हें प्रदेश में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है। इस बयान के बाद से प्रदेश की जनता का गुस्सा फूटा और लगातार धरना प्रदर्शन शुरू हुआ, क्योंकि 4-5 लाख की फीस भरने वालों के लिए 20 लाख जुटा पाना रेगिस्तान में पानी खोज निकालने से भी कठिन था।

लोकतांत्रिक तरीका से लड़ी गई लड़ाई
फिर क्या लोकतंत्र देश में लोकतांत्रिक तरीका अपनाया गया। सरकार और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन, पुतला दहन, जुलूस सारे जतन किये गए, लेकिन सीएम त्रिवेंद्र रावत इन धरनों को भी गंभीरता से लेने के मूड में नहीं थे। उन्होंने कह डाला कि विरोध करना तो इस प्रदेश की प्रथा बन गई है।

बता दें कि मंगलवार यानि 27 मार्च को जैसे ही छात्रों को एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज का फीस वृद्धि से जुड़ा नोटिस मिला, उसी दिन से युवाओं ने संस्थान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कॉलेज के प्रमुख गेट को ब्लॉक कर तीन से चार दिनों तक धरने पर बैठे लोगों से हार मान प्रशासन ने नोटिस जारी किया कि वो अपने पूर्व के फीस वृद्धि के फैसले को वापस लेती है। इस मसले पर कोर्ट का फैसला ही सर्वोपरि होगा।

त्रिवेंद्र का यू-टर्न
कॉलेज को बैकफुट पर आते देख त्रिवेंद्र रावत ने भी अपने पुराने निवेश हितैषी बयान पर लीपापोती शुरू कर दी। फिर कहने लगे कि सरकार के दखल के बाद कॉलेज ने अपना फैसला वापस ले लिया है। यहां भी सरकार को वाह-वाही लूटनी थी।

गौर हो कि एसजीआरआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के बैच 2016 की फीस निर्धारण का मामला उच्च न्यायालय नैनीताल में विचाराधीन है।

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