सीएम योगी के खत से बीजेपी आलाकमान की बढ़ी मुश्किलें

जूता कांड के आरोपी सांसद शरद त्रिपाठी पर अब तक बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होने से बीजेपी विधायक राकेश बघेल के क़रीबियों में नाराज़गी है. जिसके बाद यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने पार्टी आलाकामान को ख़त लिखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष को खत लिखकर शरद त्रिपाठी को इस बार सांसद उम्मीदवारी के लिए टिकट नहीं देने की अपील की है. बताया जा रहा है कि सीएम योगी इस कार्रवाई के ज़रिए अन्य कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन स्थापित करने का संदेश देना चाहते हैं.

शरद त्रिपाठी बोले मैं संतकबीर नगर से हूं और यहीं से चुनाव लड़ूंगा 

सांसद शरद त्रिपाठी से जब पत्रकारों ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी आलाकमान को ख़त लिखकर उन्हें टिकट देने से मना किया है तो उन्होंने कहा, ‘मैं संतकबीरनगर से सांसद हूं और यहीं से चुनाव लड़ूंगा. मैने यहां काम किया है यहां पर सेवा की है, मैं कहीं और क्यूं जाऊंगा? फसल मैने लगाई है तो दूसरे किसी को क्यों काटने दूं? दूसरे जगह से चुनाव लड़ने पर मेरी अभी किसी से कोई बात नहीं हुई है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘योगी के खत पर या सुनी-सुनाई बात पर मैं क्या कहूं? जब तक कुछ आधिकारिक न हो तब तक मैं कुछ नही बोल सकता.’

सांसद विधायक के झगड़े मामले में अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

जूता कांड के आरोपी सांसद और पीड़ित विधायक पर अब तक बीजेपी ने कोई कार्रवाई नहीं की है. यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने इस मामले में आरोपी सांसद शरद त्रिपाठी और पीड़ित विधायक राकेश बघेल को लखनऊ बुला कर अलग-अलग बात की है. हालांकि इ, मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

सीएम योगी आदित्यनाथ के क़रीबी हैं राकेश बाघेल

संतकबीरनगर के सासंद शरद त्रिपाठी ने जिस विधायक राकेश बघेल को जूतों से पीटा था वो विधायक सीएम योगी के बेहद क़रीबी लोगो में से एक हैं. सीएम के सजातीय होने के साथ-साथ राकेश बघेल सीएम योगी के अपने संगठन हिंदु युवा वाहिनी के पदाधिकारी भी रहे हैं.

राकेश बघेल को सीएम योगी के कोटे से ही दो बार बीजेपी विधायक उम्मीदवारी के लिए टिकट मिला और वो विधायक बने.

टिकट नहीं देने पर यूपी में ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय का बनेगा माहौल

लोकसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश से लेकर दिल्ली तक बीजेपी नेता इस मामले में किसी भी कठोर कार्रवाई या बोलने से बच रही है. बीजेपी को डर है कि चुनावी मौसम में अगर सांसद पर कार्रवाई हुई तो ब्राह्मण और विधायक पर कार्रवाई हुई तो क्षत्रिय वोटर नाराज हो सकते हैं, लिहाज़ा मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए.ॉ

यूपी में ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ग बीजेपी के लिए क्यों है ख़ास

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के दौर से लेकर 2014 तक बीजेपी अगड़ी जातियों की पार्टी माना जाती थी. ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य बिरादरी ही बीजेपी के कैडर वोटर माने जाते थे लेकिन पीएम मोदी और अमित शाह ने इस सोच को तोड़ते हुए अगड़ी बिरादरी के साथ पिछड़ी बिरादरी के वोटरों को भी भाजपा के साथ बड़ी तादाद में जोड़ा.

वहीं योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाने के बाद ब्राह्मण वर्ग के बीच संतुलन बनाने के लिए बीजेपी ने गोरखपुर से ही ताल्लुक रखने वाले शिव प्रताप शुक्ला को राज्य सभा सांसद और केन्द्रीय मंत्री बनाया. साथ ही उत्तर प्रदेश में केशव मौर्या द्वारा संगठन की ज़िम्मेदारी छोड़ने के बाद महेन्द्र नाथ पाण्डेय को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई.

बता दें कि शिव प्रताप शुक्ला योगी के विरोधी रहे हैं और उनको बीजेपी ने इतना सब कुछ तब दिया जब ये माना जा रहा था कि अब उनका राजनीतिक जीवन बिलकुल ख़त्म हो चुका है.

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