युवाओं पर मंडरा रहा है “कुत्ता गोली” का खतरा

मनमाड/मुंबईः नशे के बाज़ार में इन दिनों एक नए ड्रग ने एंट्री की है जिसका नाम है “कुत्ता गोली” या “डॉग टेबलेट”. दरअसल इस दवाई का असली नाम है “अल्प्राजोलम” जिसे मानसिक विकार या नींद न आने की शिकायत करनेवाले मरीज़ों को मामूली मात्रा में दी जाती है. लेकिन इनदिनों इस दवा का इस्तेमाल नशे के लिए बढ़ता जा रहा है. इसकी जानकारी मिलते ही फ़ूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट ने अलग अलग शहरों की पुलिस को आगाह कर दिया है. इसी के तहत नाशिक पुलिस ने डॉग टेबलेट – कुत्ता गोली के खिलाफ मुहीम तेज़ करते हुए पिछले 6 महीनों में सिर्फ मालेगांव इलाके से तक़रीबन 10 लोगों को गिरफ्तार किया है और तक़रीबन 6 हज़ार टेबलेट बरामद की है.

इस गोली के सेवन के बाद इंसान का शरीर सुन हो जाता है, और उसके बाद उसे किसी दर्द का एहसास नहीं होता. इस टेबलेट के केमिकल सीधे ब्रेन सेल पर असर करते हैं और इंसान को नींद आने लगती है लेकिन गोली के सेवन के बाद वो सो नहीं पाया तो वह व्यक्ति अपना आपा खोकर गुस्से में किसी भी वारदात को अंजाम दे सकता है. जानकारों के मुताबिक डॉक्टरों की निगरानी के बगैर इस गोली का सेवन करना बेहद खतरनाक है और इससे इंसान का लॉन्ग टर्म में मानसिक संतुलन भी बिगड़ सकता है. सेवन ज्यादा होने से ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है.

सूत्रों के मुताबिक एंटी नारकोटिक्स सेल और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरों को इस बात की जानकारी मिली है कि डॉग टेबलेट/ कुत्ता गोली सिर्फ मालेगांव ही नहीं बल्कि मुंबई, ठाणे, पालघर, नाशिक समेत दिल्ली, बैंगलोर, अहमदाबाद, कोलकाता, इंदौर, चंडीगढ़ जैसे शहरों में इस टेबलेट की मांग बढ़ती जा रही है और नशे के सौदागर मुनाफा कमाने के लिए अवैधरुप से इस गोली को हासिल कर युवाओं तक पहुंचा रहे हैं.

सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियों ने उन कोडवर्ड को भी डिकोड कर लिया है जिनका इस्तेमाल नशेड़ी पुलिस को चकमा देने के लिए कर रहे थे. नशे के सौदागर अपनी भाषा में इस टेबलेट को कुत्ता गोली या डॉग टेबलेट कहते हैं. ये टेबलेट अलग अलग पावर कैपेसिटी में आती है इसलिए उसे कुत्तों की प्रजातियों पर अलग अलग नाम भी दिए गए हैं मसलन डोबरमैन, बुलडॉग, जर्मनशेपर्ड, इत्यादि. ऐसे ही क्वांटिटी के लिए अलग कोडवर्ड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.

सस्ती कीमत होने के चलते छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में इस गोली की मांग काफी ज्यादा थी हालांकि जैसे जैसे इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है अब इसकी कीमत भी बढ़ती जा रही है. सूत्रों के मुताबिक कभी 2 रुपये प्रति गोली के हिसाब से 20 रुपये की एक स्ट्रिप अब 150 से 250 रुपये की बिकती है. “अल्प्राजोलम” शेड्युल वन कैटेगरी की दवाई है जिसे कोई भी मेडिकल विक्रेता बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेच सकता ऐसे में एजेंसियों ने मेडिकल विक्रेताओं को भी सचेत कर दिया है.

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