उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अस्पतालों पर ठोंका जुर्माना

उत्तराखंड में बायोमेडिकल कचरा के निस्तारण में नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों, संस्थानों पर अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई करनी शुरू कर दी है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अभी तक देहरादून समेत प्रदेश भर में ऐसे 21 अस्पतालों पर कार्रवाई की है. इन सभी अस्पतालों से पचास-पचास हजार रुपये जुर्माना के तौर पर वसूला गया है.

बता दें कि अस्पतालों से पैदा होने वाला बायोमेडिकल कचरा जल, थल और वायु को प्रदूषित करता है. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार यह मौत का सामान भी है. इस कचरे से इनफेक्शन, एचआईवी, महामारी, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां होने का भी डर बना रहता है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2016 में बायोमेडिकल वेस्ट मैनजमेंट के लिए संशोधित नियमावली बनाई. लेकिन अधिकतर राज्यों ने इसका सख्ती के साथ पालन नहीं किया. लेकिन जब एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया तब सभी राज्य हरकत में आये. इसीका नतीजा है कि उत्तराखंड में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जहां 2016 से लेकर 2017 तक मात्र एक अस्पताल के खिलाफ जुर्माना लगाया था, वहीं 2018 में अब तक 20 अस्पतालों पर 50-50 हजार का जुर्माना लगाया जा चुका है.

मुख्य पर्यावरण अधिकारी एसएस पाल ने कहा कि इससे पूर्व भी इस मामले को लेकर 600 अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया था. उन्होंने कहा कि NGT के निर्देशानुसार जो अस्पताल बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का निस्तारण सही तरीके से नहीं कर रहे हैं उनपर 50 हजार रुपयों का जुर्माना लगाया जाना है.

प्राइवेट अस्पतालों पर कार्रवाई के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब प्रदेश में संचालित 700 सरकारी अस्पतालों पर भी शिकंजा कसने जा रहा है. इन अस्पतालों ने जल संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण एक्ट के तहत भी विभाग से अभी तक प्रमाण पत्र नहीं लिया है. इसके लिए बोर्ड द्वारा महानिदेशक स्वास्थ्य को नोटिस भेजा गया है.

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