इंसानियत का दुश्मन है बीजेपी यूथ विंग का नेता मनीष चंदेला

आपको याद है, अभी कुछ दिनों पहले दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके की एक झुग्गी में आग लगी थी. पूरी झुग्गी खाक हो गई. ये झुग्गी रोहिंग्या शरणार्थियों का शिविर थी. मनीष चंदेला नाम के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उसने इस कैंप को जलाया. मनीष चंदेला खुद को BJYM से जुड़ा बताता है. ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरात (AIMMM) नाम के एक मुस्लिम संगठन ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्या पटनायक से इसकी शिकायत की है. विवाद बढ़ने के बाद मनीष चंदेला ने अपना फेसबुक और ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया है. मगर उसने जो लिखा, उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर खूब घूम रहा है.

AIMMM ने पुलिस कमिश्नर को भेजी गई चिट्ठी में लिखा है-

आपके संज्ञान में एक बात लानी है. भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM), जो कि बीजेपी का यूथ विंग है, उसके एक नेता मनीष चंदेला ने अपने ट्विटर हैंडल पर खुलेआम ये कबूल किया है- हां, हमने रोहिंग्या आतंकियों के घर जलाए.

दिल्ली पुलिस को भेजी चिट्ठी में चंदेला के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

AIMMM ने अपनी इस चिट्ठी के साथ चंदेला के इस कथित ट्वीट का स्क्रीनशॉट भी दिल्ली पुलिस को भेजा है. चंदेला ने सबसे पहले 15 अप्रैल को दोपहर बाद करीब 2.16 मिनट पर ये ट्वीट किया. इस ट्वीट पर नीचे किसी शख्स ने लिखा- डिलीट कर ये वाला. कहा जा रहा है कि चंदेला ने अगले दिन, यानी 16 अप्रैल को दोबारा ये ट्वीट किया. हमने कमिश्नर ऑफिस से इस शिकायत का स्टेटस जानने की कोशिश की. कमिश्नर ऑफिस में कई एक्सटेंशन पर हमारा कॉल बढ़ाया जाता रहा. जैसे ही हम सवाल बताते, हमारी कॉल एक नए एक्सटेंशन पर फॉरवर्ड कर दी जाती. बहुत देर तक कोशिश करने के बाद भी हमें हमारे सवाल का जवाब नहीं मिला. ऐसा लगा कि पुलिस जवाब देना ही नहीं चाहती. ये भी सच है कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस शिकायत का कोई संज्ञान तक नहीं लिया है.

प्रशांत भूषण ने भी शिकायत की है
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी मनीष चंदेला के खिलाफ शिकायत की है. उन्होंने एक ट्वीट करके अपनी शिकायत वाला पर्चा शेयर किया. साथ में ये भी लिखा कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक चंदेला के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की है. न ही पार्टी ने चंदेला के खिलाफ कोई कार्रवाई की है.

सब कुछ जल गया, पहचान पत्र भी नहीं बचा
14 और 15 अप्रैल के दरम्यान की रात को रोहिंग्या कैंप में एकाएक आग लग गई. पूरा कैंप इस आग की चपेट में आ गया. यहां 200 से ज्यादा रोहिंग्या रहते थे. उनका सब कुछ आग में स्वाहा हो गया. उन्हें इतना वक्त भी नहीं मिला कि वो पहचान पत्र जैसी जरूरी चीजें भी निकाल सकें. संयुक्त राष्ट्र ने इन लोगों को जो स्पेशल वीजा जारी किया था, वो सब आग में जल गया. इन सब कागजातों के बिना उन्हें यहां रहने में दिक्कत तो आएगी. सरकार की तरफ से इनके लिए क्या इंतजाम किया जाता है, ये आगे की बात है.

म्यांमार से जान बचाकर भाग आए रोहिंग्या रिफ्यूजियों का कैंप था
ये रोहिंग्या म्यांमार (बर्मा) के राखाइन प्रांत से जान बचाकर भाग आए थे. 2017 में लाखों रोहिंग्या को म्यांमार से भागना पड़ा. वहां की बहुसंख्यक बौद्ध आबादी उनका नरसंहार कर रही थी. म्यांमार की फौज भी उन्हें चुन-चुनकर मार रही थी. पड़ोसी बांग्लादेश की सीमा के रास्ते लाखों रोहिंग्या भाग गए. उनमें से कुछ हिंदुस्तान भी आ गए. इन्हीं में से कुछ कालिंदी कॉलोनी वाले रिफ्यूजी कॉलोनी में रह रहे थे.

सरकार ने कहा था: रोहिंग्या शरणार्थी नहीं, अवैध घुसपैठिए हैं
2017 में भी रोहिंग्या शरणार्थियों पर विवाद हो चुका है. तब भारत सरकार ने कहा था कि म्यांमार से हिंदुस्तान आए रोहिंग्या मुसलमानों को वापस चले जाना चाहिए. कारण ये दिया गया कि 40 हजार के करीब रोहिंग्या भारत के संसाधनों पर बोझ बनेंगे. ये सुरक्षा के लिए खतरा भी हो सकते हैं. सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी थी. कि उसके लिए रोहिंग्या रेफ्यूजी नहीं, अवैध घुसपैठिए हैं.

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