मिशनरी ऑफ़ चैरिटी ने दिया अवैध तरीके से गोद दिए बच्चे

एक महीने पहले ही रांची के एक मिशनरी चैरिटी द्वारा चलाए जाने वाले चाइल्डकेयर होम में हुई जांच से पता चला है कि यहां से बच्चों को अवैध तरीके से गोद दिया जाता था। हालांकि बाल अधिकार संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीपीसीआर) की जांच से खुलासा हुआ है कि ट्रस्ट साल 2013 से ही अवैध तरीके से बच्चों को गोद देने का काम कर रहा था।

एनसीपीसीआर के एक सदस्य के अनुसार, ‘दो सदस्यीय टीम ने निर्मल हृदय जोकि अविवाहित माओं का घर था और जिसका संचालन मिशनरी ऑफ चैरिटी करती है, वहां पिछले कुछ सालों से अवैध तरीके से बच्चों को गोद देने की गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था।’ इस मामले की 2014 में जांच करने की कोशिश नाकाम रही थीं। उस समय बाल कल्याण समिति के एक सदस्य ने यहां जांच करने की नाकाम कोशिश की थी।

पुलिस इस मामले में निर्मल हृदय द्वारा बेचे गए चार बच्चों का पता लगा चुकी है। 5 जून को राज्य बाल कल्याण समिति द्वारा दायर की गई एफआईआर के आधार पर 58 दूसरे मामलों की जांच चल रही है। आयोग ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है और उन्हें ट्रस्ट द्वारा पिछले पांच सालों में गोद दिए गए बच्चों के बारे में विस्तृत जांच करने को कहा है। एनसीपीसीआर केंद्रीय महिला एंव बाल विकास मंत्रालय को भी अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

मंत्रालय ने पहले ही मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा सभी राज्यों में चलाए जा रहे चाइल्ड केयर संस्थानों की जांच करने के आदेश दे दिए हैं। एनसीपीसीआर की टीम द्वारा की गई जांच के आधार पर राज्य बाल कल्याण समिति को अक्टूबर 2013 से ट्रस्ट द्वारा अवैध तरीके से गोद दिए बच्चों के बारे में शिकायतें मिली थीं लेकिन जिला बाल कल्याण समिति जब निरीक्षण के लिए 2014 में ट्रस्ट पहुंची तो उसे भारी विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। उस समय बाल कल्याण समिति के मुखिया रहे ओम प्रकाश सिंह को अप्रैल 2014 में जिला प्राधिकारियों ने निलंबित कर दिया था।

रांची बाल कल्याण समिति की प्रमुख रूपा वर्मा को इसी साल जून में नियुक्त किया है, उनके अनुसार कोई भी बाल कल्याण समिति को दो साल से ज्यादा नेतृत्व नहीं कर सकता है। वर्मा द्वारा 5 जुलाई को एफआईआर दर्ज करवाने के बाद एक महिला कर्मचारी की गिरफ्तारी हो पाई थी। महिला ने कथित तौर पर नाबालिग द्वारा जन्म दिए गए बच्चे को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में रहने वाले जोड़े को बेच दिया था। जिसे 14 मई को वापस ले लिया गया था। इसके बाद जोड़े ने बाल कल्याण आयोग से संपर्क किया और इस मामले का खुलासा हुआ।

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