राज्य के 5000 शिक्षा प्रेरकों के लिए जगी नई उम्मीदें

देहरादून : प्रदेश में साक्षर भारत कार्यक्रम बंद होने से बेरोजगार हुए शिक्षा प्रेरकों के लिए नई उम्मीद जगी है। देश में शत-प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को साधने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय जल्द नया कार्यक्रम लांच करेगा। उधर, केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च तक बढ़ाए गए साक्षर भारत कार्यक्रम का लाभ राज्य के शिक्षा प्रेरकों को नहीं मिल पाएगा। बीते जनवरी माह में राज्य में उक्त कार्यक्रम को बंद किए जाने के बाद शासन ने उक्त केंद्र सरकार के उक्त प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

राज्य में गांव-गांव, दूरदराज के क्षेत्रों में साक्षरता की अलख जगा रहे शिक्षा प्रेरकों को उस वक्त मन मसोस के रह जाना पड़ा, जब सरकार ने बीती एक जनवरी से साक्षर भारत कार्यक्रम पर अचानक रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए। इस वजह से राज्य के 5155 शिक्षा प्रेरकों के रोजगार पर कैंची चल गई।

शिक्षा प्रेरकों के 19 माह के बकाया मानदेय की 17.52 करोड़ राशि का केंद्र सरकार की ओर से भुगतान नहीं किए जाने की वजह से राज्य सरकार ने उक्त कदम उठाया। शिक्षा प्रेरकों को बतौर मानदेय तीन हजार रुपये स्वीकृत थे। इनमें दो हजार रुपये केंद्र सरकार और एक हजार रुपये राज्य सरकार दे रही थी। छह जिलों बागेश्वर, चंपावत, हरिद्वार, टिहरी, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी में केंद्रपोषित साक्षर भारत कार्यक्रम को केंद्र सरकार ने पहले 31 दिसंबर, 2017 तक बढ़ाया था। योजना अवधि बढ़ाने के बावजूद केंद्र ने शिक्षा प्रेरकों के मानदेय का लंबे अरसे से भुगतान नहीं किया है।

केंद्र सरकार पर जून, 2016 से सितंबर, 2017 यानी कुल 16 माह की अवधि तक शिक्षा प्रेरकों के मानदेय की 16.49 करोड़ की राशि बकाया है। बीते दिसंबर तक कुल तीन माह की विस्तारित अवधि की मानदेय राशि का तकरीबन 1.03 करोड़ राशि और केंद्र से राज्य को मिलनी है। राज्य सरकार भारी-भरकम बोझ को उठाने में खुद को सक्षम नहीं पा रही है। रोजगार छिनने से खफा शिक्षा प्रेरक आंदोलनरत हैं। बीती नौ फरवरी को नई दिल्ली में एमएचआरडी में हुई बैठक में शिक्षा प्रेरकों के लिए दोबारा रोजगार की आस बंधी है। केंद्र सरकार ने साक्षर भारत कार्यक्रम की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च, 2018 कर दी है।

हालांकि, बढ़ाई गई इस अवधि का लाभ राज्य के शिक्षा प्रेरकों को मिलने की उम्मीद कम है। कार्यक्रम बंद किए जाने की वजह से शासन का रुख उक्त मामले में ठंडा है। केंद्र से बकाया धनराशि मिलने पर चुप्पी के चलते शासन सकते में है। अलबत्ता एमएचआरडी ने देश में शत-प्रतिशत साक्षरता के लिए नया कार्यक्रम लांच करने का भरोसा दिया है। उक्त बैठक का कार्यवृत्त राज्य सरकार को मिल चुका है। साक्षर भारत कार्यक्रम के स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर पदमेंद्र सकलानी ने कार्यवृत्त मिलने की पुष्टि की। उधर, इस संबंध में संपर्क करने पर विद्यालयी शिक्षा सचिव डॉ भूपिंदर कौर औलख ने कोई भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।

 

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