अध्यादेश त्रिवेंद्र सरकार की राजनीतिक वोटबैंक का आदेश

देहरादून। अतिक्रमण हटाओ अभियान से भयभीत 582 मलिन बस्तियों में रह रहे तकरीबन 15 लाख लोगों को त्रिवेंद्र सरकार ने राहत देकर एक तीर से कई निशाने साधने कोशिश की है। हाईकोर्ट की ओर से अतिक्रमण को लेकर ये मामला सरकार के गले की वो फांस बन चुका था, कि ना तो ये निगलते बन रहा था और ना ही उगलते।

लिहाजा जब अपने ही सड़कों पर उतर धरनों के जरिए सरकार को आंखे दिखाने लगे, और विपक्ष भारी भरकम वोटबैंक पर नजर गड़ाने लगा, तो सरकार ने भी कैबिनेट में अध्यादेश-2018 को मंजूरी देते हुए अपनों की नाराजगी तो दूर की है, साथ ही बस्तीवासियों में बढ़ते गुस्से के उबाल को शांत भी किया।

हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाओ अभियान में मलिन बस्तियों पर की जा रही कार्रवाई से त्रिवेंद्र सरकार की आंखों की नींद उड़ी हुई थी। सूबे की सियासी चौखट पर नगर निकाय और लोकसभा चुनाव की आहट को सुन मंत्रिमंडल ने मलिन बस्तियों को राहत देने के लिए जो तोड़ निकाला, उससे एक बात तो सियासी आइने की तरह बिल्कुल साफ और सपाट हो गई कि सरकार 3 साल तक खुलकर बल्लेबाजी कर सकती है।

अकेले दून की बात करें तो श्रेणी-तीन में से 125 मलिन बस्तियों में लगभग 40 हजार परिवार हैं। इनकी जनसंख्या लगभग दो लाख के आसपास है। यानी एक भारी वोट बैंक की नाराजगी ना तो वो विधायक मोल ले सकते थे जो सीधे इन विधानसभओं से आते हैं, और ना ही सरकार इस नाराजगी का बोझ अपने कंधों पर उठा सकती, वो भी तब जब सरकार पहले ही ज्वलंत मुद्दों की तपिश में तप रही हो।

बीजेपी के घर पर अतिक्रमण के जो काले और घने बादल छाए हुए थे और विरोध की बिजलियां जो बार-बार कड़क रही थी, इस फैसले के बाद सियासी आसमान से ये घटा कुछ वक्त के लिए छट चुकी है। आसमान साफ हो चुका है और जो मुद्दा सरकार के हलक में अटका हुआ था वो निकल चुका है।

 

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