233 करोड़ की अवैध निकासी पर गरमाई बिहार की राजनीति

सृजन घोटाले के बाद बिहार में एक और घोटाला सामने आया है. इस बार मुज्जफरपुर और दरभंगा के नजारत कार्यालय से मिलीभगत के कारण वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है. इसमें दो अरब 33 करोड़ 23 लाख की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है. सीएजी की रिपोर्ट से साफ है कि जान बूझकर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं और सरकार का रुख भी लचर है. जाहिर है इस मामले में बिहार सरकार के रुख को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

इसी को लेकर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कहा कि नीतीश राज्य की तमाम ट्रेजरी को लुटवा रहे हैं. मांझी ने राज्य के राजस्व को बचाने के लिए बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है.

वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने वेब पोर्टल का लिंक शेयर किया है. उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘’बिहार में 233 करोड़ का एक और घोटाला, सभी जिलों का ऑडिट आने पर हो सकता है अबतक का सबसे बड़ा घोटाला. सृजन घोटाले जैसे 35 अन्य घोटालों की तरह “घोटाला बाबू” इसमें भी सम्मिलित है.

हालांकि जेडीयू ने इसपर पलटवार करते हुए कहा कि घोटाला करने वालों को बोलने का हक नहीं है. जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा, ‘’एक घोटाला की गोद से जन्मे तो दूसरे हमारे रहम पर मुख्यमंत्री बने, इन दोनों को बोलने का कोई हक नहीं. उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले पर संज्ञान लिया है जल्द दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.

अजय आलोक ने इस मामले को उज़ागर करने के लिए धन्यवाद भी कहा. वहीं आरजेडी के विधायक एज्जया यादव ने भी मामले को उजागर करने का लिए न्यूज़ 18 की तारीफ की. खुलासा किया था कि सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर में साल 2011 से 2016 तक 102 करोड़ और दरभंगा में 131 करोड़ की वत्तीय अनियमितताएं हुई हैं.

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