हलाला विवाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

तीन तलाक पर शीर्ष अदालत के आए सकरात्मक फैसले के बाद अब मुस्लिम महिलाओं ने निकाह हलाला और बहु विवाह के खिलाफ भी अपनी आवाज बुलंद की है। इसी कड़ी में तीन तलाक के जरिये दो बार छोड़ी गई तीन बच्चों की मां समीना ने इन प्रथाओं को असंवैधानिक घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

इससे पूर्व बीजेपी नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय ऐसी ही एक याचिका दायर कर चुके हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि निकाह हलाला और बहुविवाह मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।  समीना की पहली शादी 1999 में हुई, जिससे उसे दो बच्चे हुए। लगातार बुरे व्यवहार और एक पुलिस शिकायत के बाद शौहर ने उसे तीन तलाक दे दिया। इसके बाद उसे पति से दोबारा विवाह करने लिए दबाव डाला गया और उसे पहले से शादीशुदा उम्र दराज व्यक्ति के साथ शादी करनी पड़ी। जब वह गर्भवती हो गई, तो मामूली सी बहस करने पर फोन पर तीन तलाक दे दिया गया।

समीना अब अपने तीन बच्चों के साथ अकेली रहती हैं।  उन्होंने कहा कि यह याचिका सिर्फ अपने लिए ही नहीं डाली है। बल्कि अपने जैसी उन तमाम औरतों के लिए दायर की है, जो इन प्रथा से पीड़ित हैं।

 मुस्लिम कानून को दी चुनौती 

समीना ने कोर्ट से अग्रह किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 की धारा 2 को मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के खिलाफ ठहराया जाए, क्योंकि यह बहु विवाह और निकाह हलाला को मान्यता देता है।

सभी पर लागू हो आईपीसी की धाराएं 

समीना ने याचिका में कहा कि आईपीसी, 1860 के सभी प्रावधान देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हों। तीन तलाक को आईपीसी की धारा 498 ए के तहत प्रताड़ना माना जाए, निकाह हलाला को धारा 375 के तहत दुष्कर्म तथा बहुविवाह को धारा 494 के अधीन अपराध माना जाए।

कुरान का दिया हवाला 

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कुरान का हवाला दिया है। उन्होंने कहा, बहुविवाह की प्रथा पुराने समय में युद्ध के दौरान विधवाओं के कल्याण और बच्चों की देखभाल को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई थी। इसे कुरान की आयतों में जगह दी गई। लेकिन यह सामान्य व्यवस्था किसी भी तरह से नहीं थी न ही यह मौजूदा समय में लोगो के लिए बहुविवाह करने की इजाजत। बल्कि उन पर यह जिम्मेदारी थी कि अतिरिक्त पत्नी को सबके समान बराबर व्यवहार करे, जो निश्चित रूप से एक दुरूह कार्य है।

मुस्लिम देशों का उदाहरण  

याचिका में मुस्लिम देशों के कानूनों का हवाला दिया गया है, जिसमें बहुविवाह और निकाह हलाला को अवैध बताया गया है। ट्यूनीशिया और तुर्की में बहुविवाह गैरकानूनी है। वहीं इराक, सीरिया, सोमालिया बांग्लादेश और पाकिस्तान में इसकी अनुमति तभी है जब उचित प्राधिकार अनुमति दे।

निजी कानून से बड़ा समानता का अधिकार  

समीना ने कहा,बराबरी सभी पर्सनल (निजी) कानूनों का अधार होना चाहिए, क्योंकि संविधान महिलाओ के लिए बराबारी न्याय और सम्मान की बात करता है। उन्होंने कहा, पहली शादी के रहते महिला दूसरा विवाह नहीं कर सकती। लेकिन पुरुष के लिए कोई बंदिश नहीं है।

शाह,सायरा के बाद समीना 

वर्ष 1980 के दशक में शाह बानो ने पहली बार तलाक के बाद पति से गुजारे भत्ते की कानूनी लड़ाई लड़ी और जीतीं। सायरा बानो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में एक बार में तीन तलाक को गैर संवैधानिक करार दिया। मुस्लिम समाज में सुधारों की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब समीना ने बहुविवाह और निकाह हलाला के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंची है।

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