ऐतिहासिक चुनाव में प्रवीण तोगड़िया की हार

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) में 52 सालों में अध्यक्ष पद के लिए पहली बार हुए चुनाव में प्रवीण तोगड़िया को तगड़ा झटका लगा है। गुरुग्राम में संपन्न हुए चुनाव में विष्णु सदाशिव कोकजे को वीएचपी का नया अध्यक्ष चुना गया है। सदाशिव कोकजे ने प्रवीण तोगड़िया गुट के नेता राघव रेड्डी को हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया है। गौरतलब है कि विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष पद के लिए दो नाम सामने आए थे, विष्णु सदाशिव कोकजे और राघव रेड्डी। इसके बाद विहिप के तमाम सदस्य भुवनेश्वर में इकट्ठा हुए, लेकिन अध्यक्ष के पद पर सहमति नहीं बन पाई, जिस वजह से 52 सालों में पहली बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ।

तोगड़िया चुनाव में अपने गुट की हार के बाद प्रवीण तोगड़िया ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की। तोगड़िया ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘लाखों कार्यकर्ताओं का आक्रोश मुझ तक पहुंच रहा है। सत्ता के सत्रापों के दमन तले सत्य और धर्म को दबाया गया। 100 करोड़ हिंदू हैं, शांति बनाएं रखें। जो कहना हो, लोकतांत्रिक रीति से ही कहिए। जल्द बड़ी घोषणा करूंगा।’ आपको बता दें कि पिछले काफी समय से प्रवीण तोगड़िया और मोदी सरकार के बीच तनातनी चल रही थी।

अध्यक्ष पद पर चुने गए विष्णु सदाशिव कोकजे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं। चुनाव में प्रवीण तोगड़िया ने सदाशिव कोकजे का विरोध करते हुए राघव रेड्डी को समर्थन देने का ऐलान किया था। दरअसल कोकजे को आरएसएस के खेमे का माना जाता है, जबकि राघव रेड्डी प्रवीण तोगड़िया गुट के हैं। पिछले साल आरएसएस ने दिसंबर महीने में जब कोकजे के नाम को आगे बढ़ाया तो तोगड़िया ने इसके खिलाफ अपना मत रखा था।

प्रवीण तोगड़िया ने सदाशिव कोकजे का विरोध करते हुए कहा था, ‘यह आश्चर्य की बात है कि कैसे अचानक कोकजे हिंदूवादी हो गए। मैं रेड्डी का समर्थन करूंगा, वह युवा हैं, हिंदुत्व के लिए समर्पित हैं और उन्हें अशोक सिंघल जी ने चुना था। अगर कोकजे चुने जाते हैं तो यह तय है कि मैं कैबिनेट में नहीं रहूंगा। जो व्यक्ति संवैधानिक पद पर रह चुका है, वह कैसे धार्मिक-सामाजिक संगठन में पद के लिए सामने आ सकता है। कोकजे 20 साल पहले संवैधानिक पद से रिटायर हुए हैं, उन्होंने हिंदुत्व के लिए कुछ नहीं किया है, बावजूद इसके वह इस पद के लिए खड़े हो रहे हैं।’
राजनीतिक दबाव के कारण हुए चुनाव’ गौरतलब है कि अब तोगड़िया को लेकर विहिप में एकमत नहीं रह गया है। विहिप ने इस बात पर भी मंथन किया था कि क्या अब तोगड़िया हिंदुत्व के एजेंडा को आगे ले जाने में सक्षम हैं। इन चुनावों को संगठन में प्रवीण तोगड़िया के भविष्य के तौर पर भी देखा जा रहा था। प्रवीण तोगड़िया ने हाल ही में जिस तरह से गुजरात सरकार और पुलिस पर सनसनीखेज आरोप लगाए थे, उसके बाद उनका भविष्य भी दांव पर लगा था। अध्यक्ष पद पर चुनाव को लेकर तोगड़िया ने कहा था कि राजनीतिक दबाव के कारण वीएचपी में चुनाव हो रहे हैं।

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