किसानों के दरवाजे पर रोजगार पहुंचाता ‘हैप्पी रूट्स’

चंद सालों में उस महिला ने वो कर दिखाया जिसे करने में दूसरों को सालों लग जाते हैं। उस महिला ने कुछ ही वक्त में 15 हजार किसानों को अपने साथ जोड़ा और उनको खेती के साथ रोजगार कैसे किया जाता है ये भी सीखाया। इतना ही नहीं आज वो इन किसानों को ‘हैप्पी रूट्स’ (Happy Roots) के जरिये अतिरिक्त आमदनी का प्लेटफॉर्म दे रही है। जहां पर किसान अपनी जमीन पर खेती करता है और उससे पैदा होने वाली फसल से कई तरह के उत्पाद तैयार कर ‘हैप्पी रूट्स’ (Happy Roots) के जरिये बेचता है। पुणे (Pune) की रहने वाली रीमा साठे (Reema Sathe) ना केवल किसानों को बल्कि किसान परिवार की महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं, ताकि गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को भी रोका जा सके। तो दूसरी ओर शहरों में रहने वाले लोगों को खाने पीने की स्वास्थ्य वर्धक चीजें मिल सकें। यही वजह है कि महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके के अलावा कई दूसरी जगहों के किसानों की हालत आज ‘हैप्पी रूट्स’ (Happy Roots) की बदलौत बदल चुकी है।

महाराष्ट्र के पुणे (Pune) की रहने वाली और पेशे से केमिकल इंजीनियर रीमा साठे (chemical engineer Reema Sathe) ने करीब आठ साल तक कॉरपोरेट में मैन्युफैक्चरिंग और फूड सर्विस जैसे सेक्टर में काम किया। 2014 में जब वो एक यूएस फर्म के लिए मार्केटिंग का काम कर रहीं थीं तो उनको ग्रामीण क्षेत्र (rural area) से जुड़ने का मौका मिला। इस दौरान उनका ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों से गहरा लगाव हो गया। तब उन्होने तय किया कि वो ऐसे लोगों के लिये काम करेंगी और अपने इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिये उन्होने रिसर्च की। तो उनको पता चला कि मुंबई (Mumbai) की संस्था ‘कृषि स्टार’ गुजरात (Gujarat) के आदिवासियों के लिए काम करती थीं। इसके बाद रीमा इस संस्था के साथ वालंटियर के तौर पर जुड़ और कुछ वक्त बाद उन्होने तय किया कि वो खुद अपना सोशल स्टार्टअप (Social Start-up) शुरू करेंगी।

हालांकि वो ये नहीं जानती थी कि ये कैसे होगा, लेकिन उनको पता था कि क्या करना है। वो किसानों से जुड़ा कुछ काम करना चाहती थीं जिसमें महिलाओं की भी बराबर की भागीदारी हो। अप्रैल 2015 में उन्होने महाराष्ट्र (Maharashtra) के सूखाग्रस्त विदर्भ इलाके (drought-affected Vidarbha area) में गई। इस दौरान उन्होने वहां पर काम करने वाली संस्था ‘चेतना फाउंडेशन’ (Chetna Foundation) के साथ काम किया। उन्होने यहां के 400 किसान परिवारों को मुफ्त में मुर्गियां बांटी और उनके साथ सामूहिक रुप से 2 पोल्ट्री फार्म शुरू किये। इस काम के लिये सारे संसाधन किसान ही जुटाते थे, लेकिन मुर्गियों के अंडों को बाजार में बेच कर जो भी पैसा मिलता था वो सीधे किसानों के पास जाता था। इस पोल्ट्री फार्म को शुरू करने का उद्देश्य किसानों को खुद का रोजगार से जोड़ना था। इस तरह जब किसान इस काम को ठीक से सीख गये तो रीमा और ‘चेतना फाउंडेशन’ (Chetna Foundation) ने इन दोनों पोल्ट्री फार्म को किसानों के हवाले कर दिया। आज ये किसान इन पोल्ट्री फार्म को बढ़ी अच्छे तरीके से चला रहे हैं।

रीमा इसके बाद मुंबई (Mumbai) और पुणे (Pune) के बाजारों की खाक छानी ये जानने के लिये कि वहां पर किस तरह कारोबार को चलाया जा सकता है। इस दौरान उन्होने वहां मौजूद ग्राहकों से उनके फीडबैक लिये। जिसके बाद उनको महसूस हुआ कि फूड प्रोसेसिंग के कारोबार करने के दौरान कैसे किसानों की काफी सारी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। तो दूसरी ओर रीमा के साथ उस वक्त तक करीब 7 हजार किसान जुड़ चुके थे। जो उनके अलग-अलग प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। ये किसान कई किस्म के अनाज की पैदावार करते थे। जैसे चावल, गेहूं, बाजरा, जौ, रागी, बाटु आदि।

इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए रीमा ने इसके बाद फूड टेक्नोलॉजिस्ट (food technologist) से बात की और पिछले साल जनवरी ‘हैप्पी रूट्स’ (Happy Roots) नाम से एक कंपनी की शुरूआत की। इसके जरिये वो कई तरह के स्नेक्स जिसमें कुकीज और क्रैकर भी शामिल हैं, तैयार करती हैं। इनके उत्पादों की खासियत ये है कि ये स्थानीय अनाज से बनाये जाते हैं और इनको मशीन की जगह हाथ से तैयार किया जाता है। यही वजह है कि इनका स्वाद बाजार में मिलने वाले दूसरे प्रोडक्ट से अलग होता है। साथ ही इनको बनाने के लिए किसी भी तरह के केमिकल और प्रिजरवेटिव का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। ये पूरी तरह से फर्मेन्टेड होते हैं। शुरूआत में वो केवल क्रेकर और रोल्ड ओट्स कुकीज ही तैयार करती थी लेकिन आज उनकी कंपनी अलग-अलग तरीके के 4 कुकीज तैयार कर रही है। खास बता ये है कि इन कुकीज की सुपर मार्केट में काफी डिमांड है। जबकि तीन और कुकीज और क्रेकर वो अगले तीन महीनों में बाजार में उतारने की कोशिश में हैं। रीमा बताती हैं कि

आज रीमा के साथ इस समय महाराष्ट्र (Maharashtra) के करीब 15हजार किसान जुड़ चुके हैं। इनमें से अहमदनगर और कोल्हापुर में 15सौ किसान, विदर्भ के अकोला, अमरावती और यवतमल जिले के करीब 5 हजार किसानों के अलावा पुणे में 2 हजार किसानो के साथ वो काम कर रही हैं। सतारा में उन्होने हाल ही में काम करना शुरू किया है यहां पर उनके साथ 2 हजार किसान जुड़ चुके हैं। इसके अलावा रीमा अहमदनगर में 2 हजार महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप के साथ भी काम कर रही है। ये महिलाएं कुकीज और क्रेकर बनाने का काम करती हैं लेकिन काम शुरू करने से पहले किसी भी नई महिला को फूड सेफ्टी और क्वालिटी मैंनेजमेंट की एक महीने की ट्रेनिंग दी जाती है। हाल ही में इन्होने इन महिलाओं के लिए कुकीज (cookies) का एक नया कोर्स डिजाइन किया है। जिसमें ये ‘हैप्पी रूट्स’ (Happy Roots) के साथ साथ अपने लिए भी कुकीज बनाती हैं जिन्हें ये गांव के बाजारों में और अपने आसपास खुद बेचती हैं। ताकि आगे चलकर ये खुद इस काम में आत्मनिर्भर बन सकें। वहीं रीमा को भी गांव की मार्केट और उसकी डिमांड के बारे में भी पता चल जाता है। जिसके की वो वहां के हिसाब से अपने उत्पाद और ट्रेनिंग डिजाइन कर सके। इन उत्पादों को हाथ से बनाने की वजह बताते हुए रीमा कहती हैं कि

रीमा की टीम में इस समय 5 सदस्य हैं जिसमें शैफ, फूड टेक्नोलॉजिस्ट (food technologist) भी शामिल है। जो प्रोडक्ट को डिजाइन करने का काम करते हैं। वहीं रीमा इन उत्पादों की मार्केटिंग कर उन्हें पुणे (Pune) और मुंबई (Mumbai) के स्टोरों में बेचने की जिम्मेदारी उठाती हैं। इस समय उनके पास करीब 20 बड़े ग्राहक हैं। इनमें बड़े कॉरपोरेट ऑफिस, सुपर मार्केट और कॉफी चैन और रेस्ट्रोरेंट शामिल हैं। साथ ही वो अपनी वेबसाइट के जरिये भी अपने उत्पादों को बेचती हैं। इसके अलावा वो बटु, जौ जैसे दूसरे मोटे अनाजों के किसानों से खरीद कर उसे बड़ी फूड वेबरेज कंपनियों को बेचती हैं। ‘हैप्पी रूट्स’ (Happy Roots) के उत्पादों को बेचने से जो भी आमदनी होती है उसका एक हिस्सा सीधे इन किसानों तक पहुंचता है। इसलिए उनके उत्पादों के हर पैकेट के पीछे किसानों की स्थिति और किन किसानों से कच्चा माल लेकर इन उत्पादों को बनाया गया है इसकी जानकारी दी जाती हैं। इससे शहरों में रहने वाले वो लोग जो इन किसानों की मदद तो करना चाहते हैं लेकिन वो समय की कमी के कारण ऐसा कर नहीं पाते वो ‘हैप्पी रूट्स’ (Happy Roots) के उत्पादों को खरीद कर इन किसानों की मदद कर सकते हैं।​

About News Trust of India

News Trust of India न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful