खुलासा! 160 एकड़ वन भूमि हड़पने की साजिश

हल्द्वानी। ऊधमसिंह नगर के सितारगंज में एसडीएम का फर्जी आदेश बनाकर 160 एकड़ वन भूमि को हड़पने की साजिश की गई। इतना ही नहीं, इस फर्जी आदेश को आधार बनाकर हाईकोर्ट में विशेष अपील भी दायर की गई। जब हाईकोर्ट ने डीएम ऊधमसिंह नगर को तीन महीने में प्रकरण के निस्तारण के आदेश दिए और सितारगंज एसडीएम ने वन विभाग से मामले में राय मांगी तो मामले का खुलासा हुआ। ऊधमसिंह नगर जिला प्रशासन ने मुख्य आरोपी समेत कई लोगों खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

आरोप है कि ध्यानपुर नानकमत्ता (सितारगंज) निवासी कुलदीप सिंह समेत कई लोगों ने एआरओ/एसडीएम का फर्जी आदेश बनवाया। इस आदेश में 2009 में वाद संख्या 138/168/2009 दर्शाया गया। इसमें दर्शाया गया कि कुलदीप समेत कई अन्य पिछले 60-70 वर्ष से जंगलात की 64.521 हेक्टेयर वन भूमि पर काबिज हैं। इस फर्जी आदेश में पटवारी और तहसीलदार की जांच आख्या भी लगाई थी। आदेश में यह भी कहा गया था कि वन विभाग ने नोटिस के बाद भी पक्ष नहीं रखा। इस पर उक्त भूमि को कुलदीप सिंह समेत अन्य के नाम चढ़ाने के आदेश दिए गए।

इधर, साजिशन इस आदेश के नौ साल बाद कुलदीप सिंह ने मई 2018 में हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका 1352/2018 दायर की। इसमें कुलदीप सिंह ने उक्त वन भूमि को खतौनी में उनके नाम चढ़ाने की मांग की। हाईकोर्ट ने राजस्व का मामला बताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इस पर कुलदीप सिंह ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में विशेष याचिका 446/2018 दायर की। खंडपीठ ने याचिका निस्तारित करते हुए डीएम ऊधमसिंह नगर को तीन महीने में प्रकरण को निस्तारित करने के आदेश दिए।

एसडीएम का फर्जी आदेश बना खतौनी में नाम चढ़ाने को हाईकोर्ट में दायर की गई थी अपील सितारगंज एसडीएम के वन विभाग से मामले में राय मांगने पर हुआ साजिश का खुलासा मुख्य आरोपी समेत कई के खिलाफ जिला प्रशासन ने दर्ज कराया मुकदमा

ऐसे खुला मामला
17 सितंबर को सितारगंज प्रशासन ने इस प्रकरण में तराई पूर्वी वन प्रभाग से जवाब मांगा तो वनाधिकारियों के होश उड़ गए। डीएफओ तराई पूर्वी ने तुरंत अधिवक्ता को एसडीएम कार्यालय से 2009 में दिए आदेश की कापी लेने के लिए भेजा। जब अधिवक्ता ने आदेश मांगा तो पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए। तब पता चला कि एसडीएम सितारगंज की कोर्ट में कभी इस तरह का कोई वाद ही दर्ज नहीं हुआ था। यह आदेश भी पूरी तरह फर्जी है। तहसीलदार और पटवारी की रिपोर्ट भी फर्जी हैं। डीएफओ तराई पूर्वी नीतिश मणि त्रिपाठी की शिकायत पर डीएम नीरज खैरवाल ने सितारगंज प्रशासनिक अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

प्रथम दृष्टया एसडीएम का आदेश फर्जी प्रतीत हो रहा है। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

– डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी, ऊधमसिंह नगर

फर्जी अभिलेखों के जरिये वन भूमि हड़पने की जानकारी मिलने के बाद तत्काल जमीन से जुड़े अभिलेख, सेटेलाइट मैप आदि को राजस्व विभाग को उपलब्ध कराया गया है। इस जमीन पर जंगल है, जिसकी सुरक्षा की जा रही है।

-नीतिश मणि त्रिपाठी, डीएफओ तराई पूर्वी वन प्रभाग

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