सुप्रीम कोर्ट ने चारधाम विकास योजना को दी स्वीकृति

उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड के चार पवित्र शहरों को सभी मौसम में जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण के लिये चारधाम विकास योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं को शुक्रवार को अपनी मंजूरी दे दी. न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति विनीत शरण की पीठ ने केन्द्र सरकार से कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश पर रोक लगाने की याचिका में अपना हलफनामा दाखिल करें. अधिकरण ने अपने आदेश में इन परियोजनाओं को मंजूरी देने के साथ ही इनकी निगरानी के लिये एक समिति भी गठित की थी.

चारधान परियोजना का मकसद उत्तराखंड के चार पर्वतीय शहरों-यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को सभी मौसम के अनुकूल सड़कों से जोड़ना है. बता दें कि चारधाम प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड में 900 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जाएगा. इसपर 12,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है. इन रास्तों पर 132 पुल, 13 बाई पास और 2 खास टनल बनाए जाएंगे. साथ ही इसके तहत बनने वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्ग दो लेन के होंगे और इनकी न्यूनतम चौड़ाई 10 मीटर होगी.

पहला हाइवेः पहला हाइवे ऋषिकेश से शुरू होगा जो रूद्रप्रयाग तक जाएगा. रूद्रप्रयाग से आगे एक रास्ता बद्रीनाथ तक जाएगा और दूसरा गौरीकुंड होते हुए केदारनाथ तक पहुंचेगा. इस हाइवे को बनाने में 4784 करोड़ का खर्च आएगा.

दूसरा हाइवेः दूसरा हाइवे ऋषिकेश से शुरू होगा और धारासू तक पहुंचेगा. फिर धारासू से आगे बढ़ता हुआ एक रास्ता गंगा की उद्गम स्थली गंगोत्री तक पहुंचेगा और दूसरा यमुना के उद्गम स्थान यमुनोत्री तक पहुंचेगा. इस हाइवे को बनाने में 5626.5 करोड़ का खर्च आएगा.

तीसरा हाइवेः तीसरा हाइवे टनकपुर से पिथौरागढ़ तक पहुंचेगा. ये नेशनल हाइवे नंबर 125 होगा. जिसे बनाने में 1557 करोड़ का खर्च आएगा.

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