सुप्रीम कोर्ट ने ‘खाप’ को बताया गैर कानूनी

कोर्ट ने कहा कि पंचायतों को ऐसी शादियों को रोकने से अपने को दूर रखना चाहिए। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने ऐसी शादियों को रोकने के खिलाफ कानून बनने तक निरोधात्मक दिशानिर्देश जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 7 मार्च को इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि आपसी सहमति से अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक शादी करने वाले वयस्कों को राज्य सरकारों द्वारा सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए। केंद्र की ओर से एएसजी पिंकी आनंद ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा था कि जिन जोड़ों को किसी किस्म का भय महसूस हो रहा हो उन्हें अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराते वक्त मैरिज अफसर को इसकी सूचना देनी चाहिए ताकि मैरिज अफसर पुलिस को उन्हें सुरक्षा देने के लिए सूचित कर सकें।

शादी का विरोध करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई
केंद्र सरकार ने कहा था कि आपसी सहमति से शादी करने वाले दो वयस्कों के मसले को कानून-व्यवस्था के रुप में देखना चाहिए जो कि राज्य सरकार के अधीन आता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब आपसी सहमति से दो वयस्क शादी करें तो किसी भी भीड़ या रिश्तेदार को उसे हिंसा या भय के जरिये रोकने का अधिकार नहीं है।
इस मामले के एमिकस क्युरी राजू रामचंद्रन ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपकर कहा था कि किसी भी शादी का विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। शादी का विरोध करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

ऑनर किलिंग की आलोचना
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनर किलिंग की आलोचना करते हुए कहा था कि किसी को भी ये अधिकार नहीं है कि वे दो वयस्कों दर्शाया की गई शादी के खिलाफ कोई कार्रवाई करें। अगर उनकी शादी प्रतिबंधित दायरे में आती है तो उस पर फैसला करने का एकमात्र हक कानून का है और किसी का नहीं। उस शादी के खिलाफ खाप या पंचायत या मां बाप किसी को भी हिंसा करने की छूट नहीं है।

सुनवाई के दौरान खापों की ओर से पेश वकील ने कहा था कि खापों ने हमारे सदियों पुरानी परंपरा को बचा कर रखा है और वे हमारी चेतना जगाने वाले हैं। खाप केवल सपिंड और सगोत्र विवाह के विरोधी हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों से कहा था कि जब देश में कानून और कोर्ट मौजूद हैं तो आप स्वघोषित चेतना जागृत करने वाले मत बनिए।

लड़की-लड़के को अपनी पसंद के अनुसार शादी करने का हक
कोर्ट ने कहा था कि किसी भी लड़की या लड़के को अपनी पसंद के अनुसार शादी करने का हक है उस पर कोई पंचायत, खाप, सोसायटी या मां बाप सवाल नहीं उठा सकते हैं। कोई भी खाप या पंचायत अपनी मर्जी से शादी करने पर किसी लड़के या लड़की को तलब नहीं कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता शक्ति वाहिनी ने खाप पंचायतों द्वारा फैसला लेने के अधिकार को चुनौती दी थी। इसके पहले सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि मानवाधिकार सुरक्षा कानून 1993 को प्रभावी बनाने के लिए दिशानिर्देश देने की जरूरत है। केंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा था कि आनर किलिंग कानून संसद के समक्ष लंबित है।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने 2010 में कई महिला संगठनों से विचार विमर्श कर प्रिवेंशन ऑफ क्राइम्स इन द नेम आफ आनर किलिंग एंड ट्रेडिशन बिल का ड्राफ्ट तैयार किया था।

About News Trust of India

News Trust of India न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful