सड़क कटान वाले मलबे को जंगलों में फेंक रहे है ठेकेदार

चारधाम राजमार्ग परियोजना में सड़क कटान से निकलने वाले मलबे को आसपास के जंगलों में उड़ेला जा रहा है. यहां पर साथ ही बिना एनवायरमेंट एसेसमेंट के हजारों पेड़ों को काटा जा रहा है. सिटीजन फार ग्रीन दून की याचिका के इन्हीं दो बिंदुओं पर एनजीटी ने चारधाम राजमार्ग परियोजना में पेड़ों के कटान पर 19 अप्रैल तक रोक लगाई है. एनजीटी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से डंपिग जोन का भी प्लान विद डिजायन प्रस्तुत करने को कहा है.

गंगोत्री, यमनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ को जोड़ने वाली चारधाम परियोजना में हाईवे गंगा, यमुना, भागीरथी, अलकनंदा और मंदाकिनी के समानांतर चलता है. ऐसे में चारधाम परियोजना के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण का मलबा जीवनदायी नदियों में न डाला जाए, इस पर एनजीटी गंभीर है. डंपिग जोन में तब्दील कर दिए गए गाड, गदेरों पर हालांकि एनजीटी के आदेश पर औपचारिकता के लिए अब कहीं-कहीं सुरक्षा दीवार बनानी शुरू कर दी गई हैं, लेकिन हजारों घन मीटर मलबे का दबाव यह सामान्य दीवारें कैसे झेल पाएंगी, यह एक बड़ा सवाल है.

न्यूज 18 की टीम ने ऋषिकेश से लेकर देवप्रयाग तक हाईवे का निरीक्षण किया और पाया कि कई जगह डंपिग जोन तो दूर मलबा सीधे गंगा नदी में उडे़ल दिया गया है. जो डंपिग जोन बनाए भी गए हैं, उनका न प्लान है और न डिजायन. ऐसे में तय है कि मलबा देर सवेर गंगा में ही पहुंचेगा और यह एक खतरनाक स्थिति होगी.

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