साउथ ब्लॉक का गलियारा बना काजल की कोठरी

अपने जमाने के दिग्गज पत्रकार रहे एमजे अकबर इस वक्त विदेश राज्यमंत्री रहते यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में फंस गए हैं। एक नहीं कई महिलाओं ने आरोप लगाए हैं। इसमें सभी पत्रकार हैं। इन महिलाओं ने मी टू मुहिम के तहत सोशल मीडिया पर खुलासा कर सनसनी फैला दी कि संपादक रहते एमजे अकबर ने पद का दुरुपयोग करते हुए उनका यौन उत्पीड़न किया. अब जब कि एमजे अकबर के दामन पर भी दाग लग चुका है, इसी के साथ साउथ ब्लॉक के गलियारे के उस रहस्य पर भी चर्चा शुरू हो गई है, जिसकी वजह से अतीत में कई मंत्री विवादों में फंसते रहे हैं। कुछ को तो इस्तीफा भी देना पड़ा। यूपीए वन सरकार में विदेश मंत्री रहे नटवर सिंह से लेकर मौजूदा समय एमजे अकबर तक कई मंत्री गहरे विवादों में फंस चुके हैं। कहा जाने लगा है कि साउथ ब्लॉक के इस गलियारे में जरूर शनि का प्रभाव है, जिसके चलते मंत्रियों की कुर्सी अक्सर हिलने लगती है।

नटवर सिंह

बात नटवर सिंह से शुरू करते हैं। 15 वर्ष पहले ईराक़ में अनाज के बदले तेल घोटाले का खुलासा हुआ था। उस वक्त मनमोहन सिंह की सरकार में नटवर सिंह विदेश मंत्री थे। इराकी अखबारों ने खुलासा किया कि अनाज के बदले तेल बेचने का धंधा कर नटवर के बेटे ने खूब पैसा कमाया। नटवर सिंह का भी नाम सामने आया था. कथित तौर पर ठेके में लाभ देने केका  नटवर और उनके बेटे पर आरोप लगे.दरअसल सद्दाम हुसैन के कार्यकाल में इराक में तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में पॉल वोल्कर ने अपनी जांच रिपोर्ट में कांग्रेस नेता नटवर सिंह और उनके बेटे जगत सिंह पर फायदा उठाने की बात कही थी। इस मुद्दे पर न्यायमूर्ति आरएस पाठक की अध्यक्षता वाली समिति ने भी जांच में नटवर और उनके बेटे की भूमिका पाई थी, जिसके बाद  दिसंबर 2005 में विदेश मंत्री का पद छोड़ना पड़ा।

शशि थरूर

शशि थरूर को भी विदेश राज्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था। 2009 में तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के टिकट पर 53 साल की उम्र में थरूर लोकसभा चुनाव जीतने में सफल रहे. पहली ही दफा मंत्री बने. 28 मई 2009 को मनमोहन सरकार में उन्होंने विदेश राज्यमंत्री की शपथ ली. मगर साउथ ब्लॉक का गलियारा शशि थरूर के लिए लकी साबित नहीं हुआ. उस वक्त आईपीएल अपने शबाब पर था, हर तरफ आईपीएल की धूम थी, देश के बड़े रसूखदारों में टीम खरीदने की होड़ मची थी. इस बीच आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी ने आरोप लगाया कि शशि थरूर ने कोच्चि टीम के लिए उन पर दबाव डाला. इस टीम से शशि थरूर की मरहूम पत्नी सुनंदा पुष्कर भी जुड़ीं थीं. आईपीएल फ्रेंचाइजी विवाद के चलते 19 अप्रैल 2010 को उन्हें विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि दो साल बाद ही उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में वापसी की. इससे पहले सितंबर 2009 में थरूर सरकारी घर में रहने की जगह फाइव स्टार होटल में रहने को लेकर विवादों में फंसे. उन्होंने कहा था कि हर दिन 40 हजार रुपये का किराया वह अपनी जेब से भर रहे हैं. विवाद के बाद उन्हें होटल छोड़ना पड़ा था. शशि थरूर को मनमोहन और सोनिया दोनों का करीबी माना जाता है. बानगी के तौर पर जब 2012 में संसद की स्थापना के 60 साल पूरे होने पर विशेष परिचर्चा का आयोजन हुआ था तो सोनिया गांधी, तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी के अलावा  शशि थरूर को ही लोकसभा संबोधित करने का मौका मिला था।

सलमान खुर्शीद

सलमान खुर्शीद यूपीए-2 सरकार में जब कानून मंत्री थे, उस वक्त आज तक चैनल के ऑपरेशन धृतराष्ट्र में फंस गए थे। स्टिंग में उनकी पत्नी की ओर से चलाया जा रहा एनजीओ दिव्यांग उपकरण घोटाले में फंसा। विवादों के बाद 28 अक्टूबर 2012 को सलमान खुर्शीद की कानून एवं न्याय मंत्रालय से विदाई हुई और उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया।  इससे पहले  मनमोहन सरकार में 29 मई 2009 को कारपोरेट अफेयर मिनिस्टर रहे, वहीं 12 जुलाई 2011 को कैबिनेट में फेरबदल होने पर कानून और न्याय मंत्री बने थे। वहीं वर्ष 2009 में सलमान इस्लामिक कल्चरल सेंटर के चुनाव के वक्त भी विवादों में फंसे थे।

‘ललित गेट’ मामले में सुषमा स्वराज को छोड़ना पड़ा था पद

सुषमा स्वराज ललितगेट प्रकरण से नकारात्मक वजह से सुर्खियों में रहीं। जून 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भगोड़े ललित मोदी की मदद के मामले में फंसीं। इस चर्चित मामले को उस वक्त ‘ललितगेट’ नाम मिला। आईपीएल में गबन और धोखाधड़ी के मामले में जांच के जद में आए ललित मोदी लंदन में फरार हो गए। जिसके बाद मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि सुषमा स्वराज ने नियमों के विपरीत ब्रिटिश यात्रा दस्तावेज प्रदान करने के लिए ब्रिटेन के आव्रजन अफसरों पर दबाव डाला था। जिस पर बाद में सुषमा ने सफाई दी कि उन्होंने मानवीय आधार पर यह फैसला किया था। कहा गया था कि ललित मोदी की पत्नी उस वक्त बीमार थीं। सुषमा स्वराज हाल में लखनऊ की एक आवेदक के पासपोर्ट विवाद में फंसीं। जिस पर उन्हें पार्टी समर्थकों की ओर से ही ट्रोल किया गया था।

यौन उत्पीड़न मामले में फंसे एमजे अकबर

सेनाध्यक्ष के पद से रिटायर हुए जनरल वीके सिंह का किस्सा भी अलग नहीं है। साउथ ब्लॉक स्थित विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।ये भी विवादों में फंसते रहे हैं। कभी अपने बयानों को लेकर कभी अन्य तरह के आरोपों को लेकर. मई 2014 में विदेश राज्यमंत्री बने। एमजे अकबर के दामन पर यौन उत्पीड़न के लगे दाग का मामला तो अब ताजा चल ही रहा है.अपने जमाने के दिग्गज पत्रकार और संपादक रहे एमजे अकबर कभी कांग्रेस के करीब थे और राजीव गांधी से मित्रता थी। शाहबानो पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटवाने में भी एमजे अकबर का नाम आता है। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद एमजे अकबर बीजेपी से जुड़े और पांच जुलाई 2016 को कैबिनेट में शामिल हुए। संयोग देखिए कि एमजे अकबर भी विदेश मंत्रालय में गए और विवादों में फँस गए। इस वक्त कई महिला पत्रकारों ने #MeToo मुहिम के तहत उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। जिस पर विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है. कहा जाता है कि विदेश मंत्रालय में मिडिल-ईस्ट ही नहीं बल्कि यूरोप के मामले भी अकबर ही देखते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पर कितना भरोसा करते हैं। विदेश मंत्रालय में यूरोप की डेस्क काफी अहम मानी जाती है। चूंकि मध्य-पूर्व के देशों से सर्वाधिक तेल की खरीद  होती है, ऐसे मे मिडिल-ईस्ट देखने की भी जिम्मेदारी से एमजे अकबर की सरकार में अहमियत का पता चलता है।

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