करोड़ों के घोटालों का पर्दाफाश करेगी त्रिवेंद्र सरकार

ऊर्जा निगमों के घोटालों से जुड़े मामलों में 10 दिन में कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. दरअसल, जिस विभाग को प्रदेश की आर्थिकी का जरिया बनना था, वही विभाग घपलों-घोटालों में ऐसा लिप्त है कि आज भी तीन दर्जन से ज्यादा मामले केवल जांच के रूप में फाइलों तक सीमित रह गई हैं. लगता है ‘जीरो टॉलरेंस’ की सरकार अब NH-74 घोटाले के बाद ऊर्जा विभाग के करोड़ों के घोटालों का पर्दाफाश करना चाहती है. इसके लिए ऊर्जा सचिव राधिका झा ने ऊर्जा से जुड़े सभी निगमों के आलाधिकारियों को कई साल से लंबित मामलों पर 10 दिनों में कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.

सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जीरो टॉलरेंस की सरकार इन सारे घोटालों में एक पूर्व आईएएस को जेल भेजने की महा योजना है, ये आईएएस इस विभाग में लम्बे समय तक सचिव व प्रमुख सचिव सहित ऊर्जा निगमों के चेयरमैन रहे है था वर्तमान में स्वैच्छिक सेवा निवृति के पश्चात कुछ बड़े परियोजनाओं को संचालित कर रहे है.

इन बड़े मामलों की जांच केवल कागजों तक सीमित है-

1. उत्‍तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल)– जिस निगम को राज्य के हर घर में बिजली पहुंचाना है, क्या हैं उसके बड़े घोटाले-
– ट्रिपरिले मामला आज भी जांच तक सीमित.

– ABC बंच केवल घोटाला.
– गैस बेस्ड एनर्जी खरीद में सैकड़ों करोड़ की पैसा लुटाए जाने का मामला.

– एपीडीआरपी व आईपीडीएस में सरकारी धन की खुले हाथों से लूट का मामला.
– सोलर एनर्जी खरीद में अपनों को रेवड़ियां और PPA साइन कर मनचाहे टैरिफ का मामला.
– ट्रांस केविल कम्पनी मामले में कैबिनेट के फैसले को भी बदलना.
– ट्रांस केविल कम्पनी की जमीन प्रकरण मामला.

2. पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन आफ उत्‍तराखंड लिमिटेड (पीटीसीयूएल, पिटकुल)– इस महकमे का कार्य प्रदेश में ट्रांसमिशन लाइनें और सबस्टेशन बनना है, लेकिन यहां भी कई बड़े घोटाले हैं.
– 530 करोड़ का कोबरा प्रकरण.
– झाझरा 80 MVA -IMP पॉवर ट्रांसफार्मर प्रकरण.
– 43 करोड़ का राजश्यामा कंस्ट्रक्शन से स्ट्रक्चर प्रकरण मामला.
– ईशान कम्पनी का 33 करोड़ का तीन गुनी दरों पर सप्लाई प्रकरण जबकि कम्पनी भी फर्जी थी.
– पदार्थ-पतंजलि ईशान पर ही दस दिनों में FIR के आदेश कहां गायब हो गए.
– एसएस यादव सीडी प्रकरण मामले पर कोई कारवाही नहीं.
– सेलाकुई GIS सबस्टेशन 14 करोड़ के काम में 164 करोड़ खर्च कर धन की बर्बादी का मामला.
– ABT मीटर घोटाला

3. यूजेवीएनएल– इस निगम का कार्य प्रदेश की जलविद्युत परियोजनाओं को बनाना और इनकी देखरेख का कार्य करना है.
– टर्बाइन प्रकरण
– ईआरपी घोटाला
– शक्ति नहर पर सोलर प्लांट मामला
– भर्ती घोटाला

4. उरेडा– प्रदेश को वैकल्पिक ऊर्जा देने वाला उरेडा भी घपलों से अछूता नहीं रहा. यहां भी कई बड़े घोटालों की जांच पूरी नहीं हो पाई है.
– रूफटॉप ग्रिड कनेक्टेड सोलर पॉवर प्लांट्स योजना में 100 करोड़ की सब्सि‍डी में घोटाला मामला.
– एक ही दिन में 11 सोलर पॉवर प्लांट्स का फर्जी ऊर्जीकरण एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा बंदरबांट.
– उत्तराखंड की कीमती 4600 बीघा कृषि जमीन तहस नहस क्यों.
– केदारनाथ में आपदा के दौरान बनी परियोजना पर हुआ घोटाला.
– सेवा नियमावली की धज्जियां प्रकरण

बहरहाल, कहा जाता है कि ‘देर आए दुरुस्त आए,’ लेकिन क्या इस कहावत पर अमल होगा या आदेशों के बाद भी विभाग वही ‘ढाक के तीन पात’ तक ही सीमित रहेगा. जिन मामलों की जांच पर कई साल से अमल नहीं की गई, क्या सही मायनों में इन जांचों पर 10 दिनों में कोई ठोस कदम उठ पाएगा.

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