उत्तराखंड: गायब बांड वाले डॉक्टरों के गारंटरों से होगी वसूली

सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले बांडधारी डॉक्टरों के पहाड़ न चढ़ने पर अब उनके गारंटरों से वसूली होगी। सरकार ने इसकी तैयारी शुरू करते हुए बांड वाले डॉक्टरों के गारंटरों को नोटिस भेजने का निर्णय लिया है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने बांड की व्यवस्था लागू की।

इसके तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को मामूली फीस पर कोर्स की सुविधा दी गई। बदले में डॉक्टरों को पांच साल तक पहाड़ में नौकरी करनी थी। लेकिन बांड के बावजूद अधिकांश डॉक्टर अस्पतालों से गायब हो गए। बांड का उल्लंघन करने वालों को कई बार नोटिस भेजे गए पर असर नहीं हो पाया। चिकित्सा शिक्षा सचिव नितेश झा ने कहा कि बांड वाले डॉक्टरों पर दबाव को अब उनके गारंटरों को वसूली नोटिस भेजेंगे।

तीन लाख से तीस लाख रुपये तक की वसूली

सरकार ने डॉक्टरों से बांड भराते समय गारंटर की शर्त रखी थी। अधिकांश छात्रों ने अपने सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों को गारंटर बनाया। अब इन्ही गारंटरों को नोटिस भेजकर वसूली की तैयारी है। सूत्रों ने बताया कि अलग-अलग समय पर डॉक्टरों से अलग-अलग बांड भराए गए। उसमें तीन लाख से तीस लाख तक की वसूली का नियम है। हालांकि नए बांड एक से ढ़ाई करोड़ के भी हैं लेकिन इन छात्रों का कोर्स अभी पूरा नहीं हुआ है।

1400 डॉक्टर हो चुके पास आउट

राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से अभी तक 14 सौ के करीब डॉक्टर पास आउट हो चुके हैं। इसमें से अधिकांश बांडधारी हैं। इन डॉक्टरों में से छह सौ के करीब अस्पतालों से गायब चल रहे हैं। इन डॉक्टरों को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने तीन बार नोटिस दे दिए हैं। लेकिन इन पर कोई असर नहीं हो रहा है। .

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