300 मेगावाट की लखवाड़ परियोजना का क्लीयरेंस में फंसा पेच

देहरादून। उत्तराखंड समेत छह राज्यों को लाभ पहुंचाने वाली लखवाड़ जल विद्युत परियोजना (300 मेगावाट) अब क्लीयरेंस के पेच में फंसती नजर आ रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से परियोजना को दोबारा क्लीयरेंस लेने के आदेश के बाद से निर्माण कार्य अटक गया है। क्लीयरेंस को लेकर केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की टीम सर्वे कर चुकी है, लेकिन अभी यूजेवीएनएल को तमाम सुधार और औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। अगर एनजीटी, यूजेवीएनएल की कार्रवाई से संतुष्ट हो जाता है तो क्लीयरेंस मिल जाएगी। मगर, इस प्रक्रिया में एक साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

दरअसल, लखवाड़ परियोजना को पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिले दशकों हो चुके हैं, जिस कारण एनजीटी ने वर्तमान स्थिति में पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना के लिए दोबारा क्लीयरेंस लेने की जरूरत बताई। इसके बाद से परियोजना का निर्माण कार्य रोका जा चुका है। इस कड़ी में अप्रैल माह में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की टीम परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर चुकी है।

टीम की ओर से यूजेवीएनएल को प्रारंभिक दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिस पर निगम ने काम शुरू कर दिया है। अब अगले माह तक केंद्रीय टीम रिपोर्ट का अध्ययन कर यूजेवीएनएल को आवश्यक सुधार के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी। इन सभी बिंदुओं पर यूजेवीएनएल द्वारा सुधार किया जाएगा, जिसके बाद केंद्रीय टीम अपनी रिपोर्ट एनजीटी में सौंपेगी।

परियोजना पर एक नजर 

वर्ष 1977 में उत्तर प्रदेश सरकार में लखवाड़ परियोजना का शिलान्यास किया गया। 1987 में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने भी परियोजना को क्लीयरेंस दी। 1992 में धन के अभाव में परियोजना लटक गई। राज्य गठन के बाद वर्ष 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने लखवाड़ परियोजना का दोबारा शिलान्यास कर इसकी जिम्मेदारी एनएचपीसी को सौंपी। 2007 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने परियोजना एनएचपीसी से छीनकर यूजेवीएनएल को सौंप दी। वर्तमान में परियोजना का 30 फीसद निर्माण हो चुका है। अब एनजीटी ने परियोजना की क्लीयरेंस निरस्त कर दोबारा मंजूरी लेने के आदेश दिए।

बहुद्देशीय परियोजना है लखवाड़ 

लखवाड़ परियोजना से उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, यूपी, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान को लाभ मिलेगा। इस परियोजना के जल से विद्युत उत्पादन होगा। साथ ही इसका जल ड्रिंकिंग वाटर और सिंचाई में भी उपयोग किया जा सकेगा। हर राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से इसका उपयोग कर सकता है। परियोजना 204 मीटर ऊंची है, जिसकी क्षमता 300 मेगावाट है, इसमें सालाना 575 मिलियन यूनिट उत्पादन होगा।

लखवाड़ परियोजना के अधिशासी निदेशक राजीव अग्रवाल ने बताया कि एनजीटी ने लखवाड़ परियोजना के लिए दोबारा क्लीयरेंस लेने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की टीम सर्वे कर चुकी है। केंद्रीय टीम अगले माह तक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है, जिसके बाद यूजेवीएनएल इसका पालन करेगा। क्लीयरेंस मिलने में एक साल का समय लग सकता है।

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