बच्चों की जिज्ञासा को पंख लगाता है ‘अविष्कार’

कहते हैं कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। शिक्षा के क्षेत्र में कुछ ऐसी ही आवश्यकता हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में रहने वाले एक दंपत्ति ने भी देखी थी। इसलिए वो अमेरिका (USA) में पढ़ाई पूरी कर वापस लौट आए और अपने संगठन ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) के जरिए सैकड़ों बच्चों को खास तरीके से शिक्षित करने का काम कर रहे हैं। आज उनकी कोशिशों की वजह से पढ़ाई के दौरान बच्चों को किसी भी चीज को याद रखने के लिए रटना नहीं पड़ता। वो उसको पहले समझते हैं और फिर उनको वो विषय आसानी से याद हो जाता है। खास बात ये है कि ये प्रक्रिया केवल गणित (Maths) और विज्ञान (Science) जैसे विषयों में ही नहीं अपनाई जाती, बल्कि भाषा सीखने में भी ये तरकीब काफी कामयाब है। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर (Palampur, Himachal Pradesh) में रहने वाले सरित शर्मा (Sarit Sharma) और संध्या गुप्ता (Sandhya Gupta) अपने संगठन ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) की मदद से सैकड़ों बच्चों को शिक्षित कर उनको उचित मुकाम दिला चुके हैं।

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अमेरिका से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी (PhD in Electrical Engineering from USA) कर संध्या और सरित ने कुछ साल वहां काम किया और रिसर्च कंपनी में काम किया, लेकिन वो अपने देश के लिए कुछ करना चाहते थे। इसलिए 2009 में वो भारत आकर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के पालमपुर जिले (Palampur district) में रहने लगे। यहां उन्होने अपनी बेटी का एडमिशन कंडबाड़ी गांव के सरकारी स्कूल में किया। इस दौरान संध्या भी अपनी बेटी के साथ स्कूल में जाकर दूसरे बच्चों को पढ़ाने का काम करने लगी। उनके इस काम को देखते हुए सरित भी बच्चों को पढ़ाने के काम में जुड़ गये। इस दौरान उन्होने देखा कि गणित (Maths) जैसे विषयों को पढ़ने लिखने में बच्चों को काफी दिक्कत आती थी। इसलिए सरित और संध्या ने तय किया कि वो बच्चों की इस कमजोरी को दूर करेंगे और ऐसा कुछ करेंगे जिससे बच्चों को ना केवल कोई विषय जल्दी याद हो बल्कि वो मजेदार भी हो।

aavishkaar, palampur science activity

करीब 4 साल काम करने के बाद 2013 सरित और संध्या ने अपने संगठन ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) की नींव रखी। ये दोनों अपने को केवल पालमपुर (Palampur) के एक स्कूल तक ही सीमित नहीं रहना चाहते थे। वो चाहते थे कि आस पास के दूसरे स्कूलों के बच्चों को भी वो पढ़ा सकें। संध्या गुप्ता (Sandhya Gupta) ने ‘बताया कि

हमने साइंस (Science) और गणित (Maths) की पढ़ाई की थी, इसलिए हमने तय किया कि बच्चों को ये दो विषय पढ़ाने चाहिए और ये दोनों विषय रटने की बजाय समझने और अपनी नजर से दुनिया को देखने के विषय हैं।

इसलिए कई महीनों की रिसर्च और मेहनत के बाद इन दोनों ने साइंस और गणित के डिब्बे तैयार किये। इन डिब्बों की थीम पहली क्लास से लेकर बारवीं क्लास के अधार पर तय की। इस थीम के जरिए बच्चे समझ सकते थे कि साइंस में लाइट, गैस, साउंड और गणित में इंटीजियर्स, रेसनल नंबर की पहेली की कैसे सुलझाया जा सकता है। बच्चों की जानकारी बढ़ाने के लिए डिब्बों में मॉडल, प्रयोग (experiment) और दृश्य (visualization) की मदद ली जाती है। बच्चे खुद इनको छूकर और देखकर तय कर सकते हैं कि ये सब होता कैसे है? क्यों होता है? बच्चों की जिज्ञासा (curiosity) को शांत करने के लिए ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) की टीम स्कूलों में जाकर ‘साइंस मेला’ नाम से सेशन करती है। इस दौरान पहले एक टॉपिक चुना जाता है। इसके बाद उस पर प्रयोग की मदद से उसे बच्चों को समझाया और पढ़ाया जाता है। इसके अलावा बच्चों को लिए ‘हमारी बाइसाइकिल’ नाम से कैंप भी लगाये जाते हैं। जहां पर कई तरह के प्रयोग की मदद से बच्चों को पढ़ाया जाता है। ‘NTI को बताते हुए संध्या कहती हैं

हम बच्चों को साइंस और गणित एक्टिव लर्निंग से पढ़ाते हैं जिसमें उनका शरीर, आंखें, दिमाग सब कुछ उसी में केंद्रित हो जाये। इस कारण बच्चे कहते हैं कि ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) ने हमें तार्किक (logical) होना सिखाया।

‘अविष्कार’ (Aavishkaar) की टीम स्कूली बच्चों को अलावा बीटेक और दूसरी डिग्री हासिल कर चुके छात्रों के लिए भी ‘हमारी शिक्षा’ नाम से वर्कशॉप चलाती है। इसका फायदा उन छात्रों को होता है जो बीटेक या मेडिकल की डिग्री तो ले लेते हैं लेकिन वो शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। इसमें हिमाचल और दूसरे राज्यों से आए लोग भी वर्कशाप में हिस्सा लेते हैं। इस दौरान लोगों को बताया जाता है कि छोटे बच्चों की शिक्षा का स्तर कहां तक पहुंचा है और इसको ज्यादा बेहतर कैसे किया जा सकता है।

इसके अलावा ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) विभिन्न स्कूलों के टीचरों को भी बच्चों को पारम्परिक तरीके की जगह आधुनिक तरीके से कैसे पढ़ाया जाता है इसके लिए भी वर्कशॉप आयोजित करते हैं। इस मुहिम का नाम दिया गया है ‘हमारी कक्षा’। ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) का मुख्य उद्देश्य बच्चे की जिज्ञासा पर काम करते हुए उसकी रूचि को जगाकर उसे उस विषय का गहराई के ज्ञान देना है। जैसे बच्चों को बताया जाता है कि लाइट (Light) को देखा नहीं जा सकता, बल्कि लाइट के कारण चीजें दिखाई देती हैं। प्रयोग द्वारा बच्चों को समझाया जाता है कि लाइट कैसे दूरी तय करती है। अविष्कार इस समय हिमाचल के 25 स्कूलों में काम कर रहा है। इसमें से ज्यादातर पालमपुर (Palampur, Himachal Pradesh) के आसपास के हैं। ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) अपने खास तरीके की मदद से पिछले 4 सालों में करीब 10 हजार बच्चों को शिक्षित कर चुका है।

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