चारधाम सड़क मार्ग को दुरुस्त करने की है चुनौती

चारधाम यात्रा मार्ग की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। जगह-जगह लगे मलबे के ढेर और सड़कों पर बने गड्ढे यात्रा की चुनौतियां बढ़ा रहे हैं। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने चारधाम यात्रा मार्ग की स्थिति पर अपने हालिया सफर के अनुभव के आधार पर तल्ख टिप्पणी की है। इससे चारधाम यात्रा की सुविधाएं चाक चौबंद किए जाने के शासन के दावों की पोल खुल गई है। प्रदेश में चारधाम यात्रा आरंभ हो चुकी है।

हर वर्ष देश-विदेश से लाखों यात्री चारधाम के दर्शन को इस मार्ग पर यात्रा पर आते हैं। बीते वर्ष तकरीबन 25 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए थे। इस वर्ष यह संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रदेश में यूं तो चारधाम यात्रा की तैयारियां फरवरी से ही शुरू हो जाती हैं लेकिन इस बार आम चुनावों के चलते तैयारियों पर असर पड़ा। बावजूद इसके शासन-प्रशासन लगातार यात्रा से पहले सारी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के दावों पर अडिग रहे लेकिन यात्रा के शुरुआती सप्ताह में ही इन दावों की कलई खुल कर सामने आ गई है।

दरअसल, प्रदेश में इस समय चारधाम ऑल वेदर रोड के निर्माण का काम जारी है। इसके लिए यात्रा मार्ग पर पहाड़ों को काटने के साथ ही नए सिरे से इनके निर्माण का काम चल रहा है। शासन का दावा था कि यात्रा शुरू होने से पहले पहाड़ों में कटान व निर्माण कार्य रोक दिए जाएंगे ओर मार्गों को यात्रा के मद्देनजर दुरुस्त कर दिया जाएगा लेिकन अभी तक ऐसा हो नहीं पाया है। भले ही कार्यदायी संस्थाओं ने पहाड़ों के कटान और निर्माण का कार्य रोक दिया है लेकिन इन मार्गो को अभी तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है। आलम यह है कि यात्रा के शुरुआती बिंदु यानी हरिद्वार से ही यात्रियों का स्वागत सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढों से हो रहा है।

ऋषिकेश पार करने के बाद यात्रा मार्ग पर जगह-जगह मलबा पड़ा हुआ है। इस समय पर्वतीय क्षेत्रों में बरसात और बर्फबारी हो रही है तो ऐसे में मलबे के कारण सड़कों पर कीचड़ जमा हो रहा है जिसमें वाहनों के टायर फिसलने से दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। पर्यटन व्यवसाय पर पड़ेगा असर चारधाम यात्रा के दौरान यात्रा मार्ग पर अच्छा व्यवसाय होता है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही उनकी आर्थिकी मजबूत होती है।

यात्रा मार्ग की बदहाल स्थिति से पर्यटन व्यवसाय के प्रभावित होने की आशंका है। यात्रा की ये अधूरी तैयारियां सरकार के पलायन रोकने की मंशा पर पानी फेरती नजर आ रही है। यात्रा मार्ग पर 175 दुर्घटना संभावित क्षेत्र प्रदेश में इस समय यात्रा मार्ग पर 175 दुर्घटना संभावित क्षेत्र हैं। पुलिस महकमे द्वारा किए गए सर्वे के बाद ये आंकड़े सामने आए हैं। इसमें सबसे अधिक 40 क्षेत्र उत्तरकाशी जिले में हैं। यहां 23 डेंजर प्वाइंट और 17 भूस्खलन संभावित क्षेत्र हैं।

पौड़ी गढ़वाल में 20, टिहरी में 18, चमोली में 22, हरिद्वार में 25, रुद्रप्रयाग में 16 और देहरादून में 48 डेंजर जोन हैं। ये आंकड़े चारधाम यात्रा मार्ग की खतरनाक स्थिति को बयां करते हैं। मुख्य सचिव आज करेंगे जिलाधिकारियों संग वीसी राज्यपाल की चारधाम यात्रा पर की गई तल्ख टिप्पणी से शासन की पेशानी पर बल पड़े हुए हैं। इसे लेकर मुख्य सचिव सोमवार को सभी जिलों के जिलाधिकारियों के संग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। सूत्रों की मानें तो इस बैठक का फोकस चार धाम ऑल वेदर रोड की स्थिति और चारधाम यात्रा रहेगी।

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