अटल आयुष्मान में राज्य के बाहर भी इलाज करा सकेंगे मरीज

देहरादून,अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत मरीज अब राज्य के बाहर भी मुफ्त इलाज की सुविधा पा सकेंगे। इस योजना के तहत नेशनल पोर्टेबिलिटी की सुविधा आरंभ होने जा रही है। इस संबंध में हुई बैठक में चेयरमैन डीके कोटिया ने इसकी जानकारी दी।

दरअसल, आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को उत्तराखंड से बाहर भी इलाज की सुविधा है। इसके बावजूद अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत मरीज इलाज के लिए बाहर नहीं जा पा रहे हैं। वह प्रदेश के सरकारी अस्पताल व योजना के तहत संबद्ध निजी अस्पताल में ही इलाज करा सकते हैं। ऐसे में कई गंभीर बीमारियों के इलाज की प्रदेश में बेहतर व्यवस्था न होने के कारण अक्सर ही मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। इससे उन्हें जल्द ही निजात मिलने जा रही है।

नेशनल पोर्टेबिलिटी के तहत मरीजों को राज्य के बाहर भी मुफ्त इलाज की सुविधा देने की तैयारी है। इससे गंभीर बीमारी की सूरत में मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने भी इसे लेकर अपनी सहमति दे दी है।

बता दें, राज्य में न्यूरो सर्जरी, हार्ट सर्जरी, कैंसर और बर्न के इलाज की ज्यादा सुविधा नहीं है। एम्स, हिमालयन अस्पताल, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल आदि में यह सुविधा है तो पर चिकित्सक सीमित हैं। ऐसे में इमरजेंसी की स्थिति में लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसे देखते हुए ही बाहर भी इलाज की सुविधा दिए जाने का फैसला लिया गया है।

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में गोल्डन कार्ड बनाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की चेयरमैन डीके कोटिया ने समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिलाधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल अधिकारियों से वार्ता करते हुए उन्होंने बताया कि यह योजना सरकार का उच्च प्राथमिकता वाला कार्यक्रम है।

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार ही गोल्डन कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कहा कि अब लाभार्थियों के डाटाबेस मे बढ़ोत्तरी कर दी गई है। पात्र लाभार्थियों का नाम सहित पूर्ण विवरण सभी जनसेवा केंद्रों को उपलब्ध करा दिया गया है। ताकि प्रत्येक लाभार्थी का गोल्डन कार्ड इस विशेष अभियान के तहत सरलता से बनाया जा सके।

अभियान के दौरान गोल्डन कार्ड बनाने के लिए 600 जन सेवा केंद्र विशेष तौर पर संचालित किए गए हैं। जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में यह केंद्र सभी जिला कलेक्ट्रट, तहसील एवं विकास खंड मुख्यालय, नगर निगम, नगर पंचायत एवं नगर पालिका परिसर में और जिला अस्पताल, उप जिला अस्पतालों में भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वह इस अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष शिविरों का भी आयोजन करें। ग्राम स्तर पर आशाओं के नेटवर्क एवं आगनबाड़ी के माध्यम से पात्र लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने जाने को गति प्रदान करें। योजना के बारे में जल्द ही नेशनल पोर्टेबिलिटी की सुविधा आरंभ होने की जानकारी भी दी।

उन्होंने बताया कि अभी तक 1.05 लाख मरीजों को निश्शुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त हो गई है। जिसके तहत 10 हजार लाभार्थियों का जीवन बचाने का कार्य हुआ है। इस दौरान निदेशक डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. डीके चक्रपाणी आदि मौजूद रहे।

बता दें, सामाजिक आर्थिक एवं जातीय जनगणना के डाटाबेस में भारत सरकार द्वारा केवल 5.37 लाख लाभार्थी ही चयनित किए गए थे, लेकिन राज्य सरकार ने सभी को सम्मिलित किए जाने के निर्णय के बाद इस श्रेणी के 14.31 लाख लाभार्थियों को भी ले लिया गया है। अब यह संख्या 19.68 लाख हो गई है।

यदि गोल्डन कार्ड बनाए जाने के दौरान किसी लाभार्थी का नाम उक्त डाटाबेस से संबंधित अभिलेख में उपलब्ध नहीं है, लेकिन उसके पास मुख्यमंत्री का अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना से सम्बंधित पत्र या आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में प्रधानमंत्री द्वारा भेजा गया पत्र उपलब्ध है, तो उस पर अंकित आइडी संख्या से भी उसका गोल्डन कार्ड बनाया जाएगा।

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