बाबा रामदेव की वजह से ये लोग नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर

बाबा रामदेव का फूड प्लांट स्थानीय लोगों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। इससे निकलता दूषित पानी आस-पास के क्षेत्र में पेयजल को जहरीला बना रहा है। इससे लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। कई मवेशी कालकवलित हो चुके हैं। इतना ही नहीं रामदेव का प्लांट गंगा को भी प्रदूषित कर रहा है।

स्वदेशी अपनाओ- देश बचाओ जैसे नारों से देशवासियों को आकर्षित करने वाले स्वामी रामदेव की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। योगगुरु से बिजनेस गुरु बने रामदेव ने फूड प्लांट लगाकर देशभर के बाजारों पर आयुर्वेद और स्वदेशी के नाम से कब्जा करने का जो प्रयास किया वह धीरे-धीरे सफल होता नजर आ रहा है। आज उनके प्रोडक्ट देश भर में तेजी से फैल रहे हैं। बड़ी एवं पुरानी कंपनियों को इनके प्रोडक्ट जबरदस्त टक्कर दे रहे हैं। मगर रामदेव की इस सफलता का भयंकर दुष्परिणाम किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खासकर उस क्षेत्र के ग्रामीणों को जहां इनके प्लांट लगे हुए हैं। हरिद्वार जिले में भी इनके एक प्लांट से दर्जनों गांवों के निवासी परेशान हैं। प्रदूषण फैलाते इनके प्लांट की कई बार ग्रामीणों ने शिकायत भी की मगर उसका कोई परिणाम नहीं निकला।

दरअसल हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र के अंतर्गत पदार्था में स्थापित पतंजलि फूड प्लांट इन दिनों पूरे क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने का काम कर रहा है। इस प्लांट से लगभग ४० गांवों के किसानों और ग्रामीणों का जीना बेहाल हो गया है। इनमें गोविंदगढ़, फूलगढ़, चाणचक, नसीरपुर कला, नसीरपुर खुर्द, गुज्जर बस्ती कुन्हारी, जैतपुर, मुंडाखेड़ा सुल्तानपुर आदि गांव पीड़ित हैं। बाबा रामदेव के इस प्लांट से निकलने वाला दूषित जल इस पूरे क्षेत्र के लिए अभिशाप बन गया है। बहादराबाद के पूर्व ब्लॉक प्रमुख आदित्य कुमार ने बताया कि पदार्था से होता हुआ एक प्राकृतिक जल स्रोत बहता है जिसे स्थानीय भाषा में बेगम नाला कहा जाता है। क्षेत्र के किसान अपने खेतों की सिंचाई से लेकर पेयजल के लिए काफी हद तक इसी पर निर्भर थे। इसी स्रोत की वजह से पूरे क्षेत्र के भूमिगत जल का स्तर भी बहुत ऊंचा है। जब से बाबा रामदेव के पतंजलि फूड प्लांट से निकलने वाला दूषित जल इस साफ जल के स्रोत में छोड़ा जाने लगा है तब से स्थिति एकदम विपरीत और भयावह हो गई है। दूषित जल पीने से ग्रामीणों के पशु मरने लगे हैं। पूरा इलाका दुर्गंध क्षेत्र में परिवर्तित हो गया है।

बाबा रामदेव खुद को संत और संन्यासी कहते हैं। वह गंगा की सफाई और संरक्षण के भी पक्षधर हैं। इसके बावजूद अपने प्लांट का गंदा और रासायनिक पानी बेगम नाले से होते हुए गंगा में डाल रहे हैं। जब वह स्वयं गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं तो फिर सफाई की बात करना बेमानी ही है। यही नहीं रामदेव भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी भी बताए जाते हैं। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के पहले ही गंगा को मां कहकर उसकी सफाई का जिम्मा अपने कंधों पर लिया। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने गंगा मंत्रालय अलग से बनाया। इसके बावजूद रामदेव गंगा को मैली कर रहे हैं।

गोविंदगढ़ के एक ग्रामीण कमल चौहान बताते हैं कि गंगा तो दूर है। बेगम नाले में पानी का प्राकूतिक स्रोत है। पहले हम सब लोग यहां आते थे। हमारे पशु भी यहीं पानी पिया करते थे। त्योहारों पर तो पूरा गांव यहां स्नान करता था पर अब यह जगह पूरी तरह बदबूदार नाले में बदल गई है। इससे हम पर क्या बीतती है] यह केवल हम जानते हैं। यदि किसान इस स्रोत से अपने खेतों की सिंचाई करते हैं तो उनके खेत बदबू के भंडार बन जाते हैं। स्थिति बेहद विकट उस समय हो गई जब गांवों के हैंडपंप भी दूषित जल देने लगे। इस बात को खुद पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रभारी पीके जोशी कबूलते हैं। उन्होंने आस&पास के इलाकों का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि इस क्षेत्र के हैंडपंपों से दूषित जल निकल रहा है। कोई और विकल्प न होने की वजह से लोगों को यही दूषित जल पीने को विवश होना पड़ रहा है। इस जल के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कई तरह की बीमारियों ने पूरे क्षेत्र में पैर पसार लिए हैं।

गोविंदगढ़ के किसान राजबीर चौहान ने बताया पिछले कुछ समय से हमारे उन पशुओं की मौतें होने लगी हैं जो इस बेगम नाले का पानी पीते हैं। इससे इलाके के किसानों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। इसके लिए पूरी तरह से बाबा रामदेव का यह फूड प्लांट दोषी है। इसके दूषित जल ने हमारा जीवन नरक बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित जल को अंडर ग्राउंड पाइप लाइनों के माध्यम से बड़ी चतुराई के साथ प्लांट से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बेगम नाले में छोड़ दिया गया है। जिससे करीब ४० गांवों के लोगों का जीवन दूभर हो गया है। इसकी शिकायत हम मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए शिकायती पत्र के बाद उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देहरादून ने क्षेत्रीय प्रभारी पीके जोशी को इसकी जांच करने का आदेश दिया। उधर उत्तराखण्ड शासन के अनुसचिव आलोक कुमार ने भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग को अलग से आदेश दिया कि ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान किया जाए। उसके बाद पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी पीके जोशी ने मौके पर जाकर जांच की। जांच के बाद अपने उच्च अधिकारी को दी गई रिपोर्ट में पीके जोशी ने शिकायत को सही माना। उन्होंने कहा कि पदार्था स्थित हर्बल एवं फूड पार्क,पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड यूनिट ३ पूरे क्षेत्र में प्रदूषण फैला रही है। बाबा रामदेव का यह प्लांट बेगम नाले को प्रदूषित कर रहा है।

पदार्था पंचायत के ग्राम प्रधान मोहम्मद नजाकत अंसारी कहते हैं कि प्लांट के गंदे पानी की वजह से डेंगू-मलेरिया और चर्म रोग जैसे भयंकर रोग पूरे गांव में फैल गए हैं। गांव के प्रत्येक व्यक्ति को इस समय चर्मरोग है। पिछले साल गांव से कोई ना कोई डेंगू से पीड़ित था। कुल मिलाकर लगभग १५०० लोग डेंगू से पीड़ित थे जिसका कारण बाबा रामदेव के प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी है। शिकायत के बाद अधिकारियों ने जांच भी की मगर कार्यवाही कुछ नहीं हुई। क्षेत्र के लोग नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अधिकारी और रामदेव मस्त हैं।

About न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

News Trust of India न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful