BHU: नियुक्ति में धांधली, हाईकोर्ट ने सभी को जारी किया नोटिस

प्रयागराज। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सहायक व एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति में धांधली का मामला एक बार फिर से हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस बार हाईकोर्ट ने सभी चयनित सहायक व एसोसिएट प्रोफेसरों को नोटिस जारी किया है और उनका जवाब मांगा है। बता दें कि इस मामले में दूसरी बार हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा है। इससे पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच कमेटी का गठन किया गया था, लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़ा करते हुए कई याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल हुई है। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नवनियुक्त सहायक व एसोसिएट प्रोफेसरों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानना चाहा है।

हाईकोर्ट ने भेजा सभी को नोटिस

गौरतलब है कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सहायक व एसोसिएट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की गयी और 26 सहायक और 9 एसोसिएट प्रोफेसरों को नियुक्ति दी गई। इन्हीं प्रोफेसरों की नियुक्ति और चयन पर कई अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए और आरोप लगाया कि नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली की गयी है और भाई-भतीजावाद के तहत चहेतों को फायदा देते हुए चुना गया है। जबकि अधिक योग्य व पात्र अभ्यर्थियों को भर्ती से बाहर कर दिया गया।

हाईकोर्ट के आदेश पर गठित हुई थी टीम

धांधली के आरोप के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में डॉ. व्यंकटेश सिंह व पांच अन्य लोगों ने याचिका दाखिल की है। जिसमें कोर्ट को बताया गया है कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दिये गये आदेश पर जांच कमेटी गठित हुई। लेकिन जांच कमेटी ने सिर्फ खाना पूर्ति की है और रिपोर्ट को भी भ्रामक तरीके से पेश किया है। जिसके कारण सच सामने नहीं आ सका है। गौरतलब है कि इन याचिकाओं पर सुनवाई जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी कर रहे हैं। याचिकाओं पर बहस के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सहायक व एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति में धांधली का जो असल मामला है, उसे तो जांच कमेटी उजागर ही नहीं कर रही है। जांच कमेटी पूरे मामले में लीपापोती कर रही है। जबकि हाईकोर्ट में शिकायत के बाद कोर्ट ने आदेश दिया था कि याचियों के प्रत्यावेदन पर विचार करके पूरे मामले की जांच की जाये और रिपोर्ट दी जाये।

क्या हुआ जांच में

इलाहाबाद हाईकोर्ट को याचियों की ओर से बताया गया कि बीएचयू के कुलपति ने रिटायर्ड जस्टिस कलीम उल्लाह और बीएचयू के प्रोफेसर मल्लिकार्जुन जोशी की दो सदस्यीय कमिटी गठित की थी। इस जांच कमेटी ने 16 जुलाई 2018 के याचियों के प्रत्यावेदन की जांच की और याचियों की आपत्तियां खारिज कर कुलपति को विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट का भी हवाला देते हुये कहा गया कि जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आयी थी कि डॉ. प्रेमप्रकाश सोलंकी, डॉ. आंचल श्रीवास्तव, डॉ. संजय कुमार श्रीवास्तव, डॉ. राघव कुमार मिश्र और डॉ. ज्ञानेश्वर चौबे की नियुक्तियों पर संदेह व्यक्त किया गया और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने की संस्तुति भी की गयी। लेकिन, मामले को लीपापोती कर भ्रमक रिपोर्ट तैयार कर दी गयी। जिससे धांधली का सच बाहर ही नहीं सका। याचिकाओं में आरोप है कि जांच कमेटी ने तो शिकायतकार्ताओं के मुद्दों पर जांच की और न ही सही निष्कर्ष निकाला। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 3 जुलाई तय की गयी है।

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