बिहार की सत्ता का सेमीफाइनल

पटना : दिल्ली विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही बिहार के राजनीतिक दलों की जमात भी अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जदयू अपने दम पर पहले से सक्रिय है। कांग्र्रेस के सहारे राजद अब सक्रिय होने वाला है। बिहार में विपरीत धारा की राजनीति करने वाले दोनों राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्र्रेस की अदावत पटना से दिल्ली तक तो पहले से ही है।

असली राजनीतिक कड़वाहट और बयानों की तल्खी राजद और जदयू के बीच देखी जाएगी। बिहार में दोनों दलों के बीच पोस्टरों एवं नारों के जरिए पिछले दो हफ्ते से जारी लड़ाई की गूंज अब दिल्ली के चौक-चौराहों पर भी सुनाई देगी।

बिहार से बाहर झारखंड के बाद अब दिल्ली में भी किस्मत आजमाने के लिए दोनों दल तैयार हैं। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं महासचिव केसी त्यागी के मुताबिक दिल्ली में उनके दल की तैयारी करीब 30 से 35 सीटों पर लडऩे की है। किसी से गठबंधन नहीं होगा। माहौल छह महीने पहले से बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने प्रमुख सहयोगी एवं जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा को दिल्ली का प्रभारी बना रखा है।

जदयू की तैयारी को संजय झा खुद देख रहे हैं। दो महीने पहले बदरपुर में मुख्यमंत्री की एक बड़ी सभा भी हुई थी, जिसमें अच्छी तादाद में जदयू के समर्थकों एवं बिहारियों की भीड़ जुटी थी। संजय झा को पूर्वांचल के वोटरों पर भरोसा है। वह कहते हैं कि बिहार में नीतीश कुमार के काम की भी दिल्ली में सराहना होती है। इसका भी असर पड़ेगा।

बकौल संजय झा, दिल्ली में जदयू का चुनाव लडऩा तय है। किंतु सीटों की संख्या पर फैसला नौ जनवरी के बाद होगा। जदयू ने झारखंड चुनाव के दौरान ही तय कर लिया था कि वह दिल्ली में भी अकेले चुनाव लड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि जदयू के इस कदम को भाजपा के साथ टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली में बिहारियों की तादाद का अंदाजा भाजपा को भी है। यही कारण है कि वह पहले से ही मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बना रखा है।

कांग्रेस के भरोसे राजद 

झारखंड में बेहतर तालमेल के जरिए भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के बाद उत्साहित राजद को दिल्ली से भी उम्मीद है। वहां उसे कांग्र्रेस का सहारा चाहिए। हालांकि कांग्र्रेस की ओर से अभी साफ नहीं किया जा सका है कि वह राजद को कितनी सीटें देगी और खुद कितनी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। किंतु राजद को उम्मीद है कि कम से कम उसे 10-12 सीटें मिल जाएंगी।

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार झा के मुताबिक दोनों दलों के बीच 11 जनवरी को बैठक होगी, उसके बाद ही राजद अपने पत्ते खोलेगी। झारखंड में राजद को गठबंधन में सात सीटें मिली थीं, जिनमें उसे एक पर जीत मिली थी।

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