रक्षा भागीदारी के लिए ब्रिटेन ने दिया संप्रभु गारंटी का प्रस्ताव

नई दिल्ली,सैन्य आधुनिकीकरण की गति को रफ्तार दे रहे भारत के साथ रक्षा साझेदारी ब्रिटेन की अहम रणनीतिक नीति का हिस्सा बन गई है। इस रणनीति के तहत ब्रिटिश रक्षा उत्पादकों के साथ साझेदारी व सहयोग के लिए ब्रिटेन भारत को संप्रभु गारंटी देने को तैयार है।

रक्षा साझेदारी को पारदर्शिता और विश्वसनीयता देने के लिए संप्रभुता की गारंटी के इस प्रस्ताव पर भारत विचार कर रहा है। सैन्य और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बड़ी संभावनाओं को देखते हुए ही फरवरी में लखनऊ में होने वाले डिफेंस एक्सपो में शामिल होने के लिए ब्रिटिश रक्षा खरीद मंत्री की अगुआई में एक हाईप्रोफाइल दल भी आ रहा है।

भारत-ब्रिटेन के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करने के लिए वैसे भी फरवरी में दोनों देशों की सेना ‘अजय योद्धा’ के तहत संयुक्त अभ्यास करेंगी। इसमें आतंकवाद से मुकाबले की सैन्य रणनीति पर फोकस होगा। इसमें रायल ब्रिटिश एयरफोर्स के रक्षा बल और भारतीय वायुसेना के गरुड़ कमांडो दस्ते साझा अभ्यास करेंगे। वहीं ब्रिटिश नौसेना इस साल भारत में ‘मिलन’ अभ्यास में भारतीय नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास करेगी।

भारत की तीनों सेनाओं और सरकार के साथ सैन्य व रक्षा क्षेत्र में बढ़ रहे इन सहयोगों की चर्चा करते हुए ब्रिटेन के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर गेविन थामसन ने बातचीत में रक्षा सहयोग के लिए भारत को संप्रभु गारंटी की पेशकश किए जाने की पुष्टि की। उनके मुताबिक रक्षा मंत्रालय इस पेशकश पर विचार कर रहा है। रक्षा सौदों और साझेदारी को बिचौलिए के विवादों से बचाने के लिए भारत ने निजी विदेशी कंपनियों से खरीद को दोनों राष्ट्रों के बीच समझौते के कवच में लाने का सिलसिला शुरू किया है। भारत-फ्रांस के बीच दासौ कंपनी से राफेल जेट खरीद के समझौते से इसकी शुरुआत हो चुकी है।

थामसन ने कहा कि भारत के साथ सैन्य सहयोग केवल रक्षा खरीद-बिक्री का नहीं बल्कि बराबर की मजबूत साझेदारी से जुड़ा है। ब्रिटेन रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को साकार करने के लिए भागीदार बनने को तैयार है। इसके मद्देनजर ही लखनऊ डिफेंस एक्सपो में ब्रिटेन की रक्षा क्षेत्र की तमाम बड़ी कंपनियां जैसे एयर बस, थेल्स, बेएई सिस्टम, राल्स रॉयस शामिल हो रही हैं।

थॉमसन ने कहा कि ब्रिटिश नौसेना के 65 हजार टन क्षमता वाले दो नए एयरक्राफ्ट कैरियर क्वीन एलिजाबेथ और प्रिंस विलियम्स में भारतीय नौसेना ने शुरुआती रुचि दिखाई है। भारतीय नौसेना भी इस क्षमता के एयरक्राप्ट कैरियर को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी में है। इस लिहाज से दोनों देशों के बीच इसमें सहयोग की काफी गुंजाइश है। थॉमसन ने कहा कि ये दोनों ब्रिटिश एयरक्राप्ट कैरियर अमेरिकी एयरक्राप्ट कैरियर से कीमत में 30 फीसद कम हैं, तो इनका परिचालन खर्च भी कम है। साथ ही संचालन के लिए मानव संसाधन की संख्या भी कम चाहिए।

भारत में ब्रिटेन के रक्षा और सुरक्षा संगठन के प्रमुख डामिनिक बेल्स ने कहा कि भारत के साथ हमारा रिश्ता निर्यात से बड़ा है। इसीलिए सहयोग-साझेदारी के तहत हम भारत की रक्षा जरूरतों का निर्माण यहीं करने को प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश उद्योग जगत भी अब मान रहा है कि भारत में कारोबार की राह आसान हुई और ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग बढ़ी है।

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