संपादकीय

उत्तराखंड में निवेश की बोलियों को धरातल पर उतारने की चुनौती

प्रदेश सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन कर बड़े पैमाने पर निवेश की संभावनाएं जगाई हैं। जिस तरह से अभी निवेश के प्रस्तावों पर एमओयू साइन किए जा रहे हैं, उससे प्रदेश के विकास का मार्ग प्रशस्त होता दिख रहा है। हालांकि, इन उम्मीदों को धरातल पर उतारने के लिए सरकार के सामने कई चुनौतियां भी खड़ी हैं। इनसे पार ...

Read More »

कॉंग्रेसी अहंकार और माया के सम्मान से टूटा महागठबंधन

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अजीत जोगी के साथ साझा प्रेस कॉंफ्रेंस में यह साफ कर दिया कि वह कॉंग्रेस पार्टी के साथ नहीं जाएंगी। आपको बता दें कि बीएसपी-कॉंग्रेस गठबंधन नहीं होने का सबसे ज़्यादा फायदा भाजपा को होगा, इस बात को जानते हुए भी कॉंग्रेस बीएसपी के साथ गठबंधन नहीं कर पाई। हम इसके पीछे के कारणों ...

Read More »

नेता आखिर कब तक जनमुद्दों की अनदेखी करेंगे?

कुछ वर्ष पहले दीवारों पर कई राजनीतिक स्लोगन के बोल दिखाई पड़ते थे जिन्हें पढ़कर उस दौर के लोग जोश से लबरेज़ हो जाते थे। जैसे,  “जो मज़दूरों और किसानों के हक की बात करेगा, वहीं सत्ता पर राज करेगा”, “शिक्षा पर सभी का समान अधिकार हो”, “बेरोज़गारी मुक्त भारत का सपना सच कर दिखना है” वगैरह-वगैरह। खासतौर पर आज़ादी ...

Read More »

एनकाउंटर केस: पुलिसिया रौबदारी के खात्मे की शुरुवात

खून का बदला मुआवज़े से, ये क्या बात हुई। मैं अपने गुस्से में, अपने रौब में जाकर किसी को भी गोली मार दूं और फिर बाद में सहानुभूति और प्रायश्चित के नाम पर पैसे दे दूं, तो क्या उसको अच्छा लगेगा जिसने किसी अपने को खोया है? मुझे नहीं लगता जो अपने को प्यार करता होगा, उससे लगाव रखता होगा ...

Read More »

उग्र भीड़ व गुंडागर्दी क्या संविधान की अवहेलना नहीं करती?

भारत के संविधान की प्रस्तावना कहती है कि- “हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिर्पेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता ...

Read More »