संपादकीय

प्लास्टिक की जगह कागज़ की बोतल में मिलेगी बियर और सॉफ़्टड्रिंक

कोका-कोला और कार्ल्सबर्ग जैसी कंपनी ने प्लास्टिक को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. पर्यावरण के हित में फ़ैसला लेते हुए दोनों कंपनियों ने प्लास्टिक की बोतल उपयोग न करने का निर्णय लिया है. यानि दोनों ही कंपनियां ड्रिंक्स के लिये प्लास्टिक की बोतल की जगह प्लांट से बनाई गई बोतलों का उपयोग करेंगी. रिपोर्ट के अनुसार, ये योजना Renewable ...

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नहीं थम रहा प्रवासी मज़दूरों का दर्दभरा पलायन

देश में कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन से सबसे ज़्यादा प्रभावित प्रवासी मज़दूर हुए हैं. रोज़ दिहाड़ी कमाने वाले इन मज़दूरों के पास न रोज़गार बचा है और न ही खाने और रहने का कोई इंतज़ाम. ऐसे में घर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं है. शुरुआत में सरकार ने इनके लिए कोई पुख़्ता इंतज़ाम नहीं किए, तो ये ...

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रोजगार पलायन का ‘कारण’ भी है और ‘हल’ भी

कुल मिलाकर रोजगार पलायन का ‘कारण’ भी है और ‘हल’ भी। और, राज्य में रोजगार तभी संभव है जब कृषि, उद्योग और पर्यटन का विकास एवं विस्तार हो। हालिया व्यवहारिक पक्ष यह है कि शहरीकरण ने कृषि क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं खत्म कर दी हैं और उद्योग राज्य के सिर्फ तीन मैदानी जिलों तक सिमट कर रह गए हैं। ...

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कंपनियों को मिली बड़ी राहत, कंपनीज एक्ट के तहत नहीं माने जाएंगे ये अपराध

20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज (Economic Package) के पांचवें और अंतिम चरण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा कि छोटी तकनीकी व प्रक्रियात्मक चूकों को अब अपराधीकरण की सूची से निकाला जा रहा है. कंपाउंडेबल ऑफेंसेज के तहत 18 सेक्शन की सीमा को बढ़ाकर 58 कर दिया गया है. 7 कापाउंडेबल ऑफेंसेज को ...

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विशिष्ट बीटीसी: क्रेडिट का हकदार कौन, निशंक, बलूनी या त्रिवेंद्र?

उत्तराखंड के 16 हजार विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षित शिक्षकों को मान्यता का मसला श्रेय की भूल भुलैया में लटक गया। वास्तव में लम्बे समय से लटके विशिष्ट बीटीसी अध्यापकों का मसला राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने मुकाम तक पहुंचाया या फिर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक या फिर मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने। यह चर्चा अब जोर पकड़ गयी ...

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लॉकडाउन के चलते कंद- मूल और जंगली सब्जियों का अधिक सेवन करने लगे है ग्रामीण

कोरोना वायरस के चलते लोग कंद मूल और जंगली सब्जियों का उपयोग खूब करने लगे हैं। अमीर हो या गरीब सभी लोग आजकल गांवों में प्राकृतिक सब्जियां गुरियाल, साकिना, तिमला, बेडू, लेंगड़ा आदि खा रहे हैं और उसको सोशल मीडिया पर भी साझा कर रहे हैं। लॉकडाउन में लोग अपने पारंपरिक खान-पान की ओर जरूर लौटे हैं। खासकर सब्जियों की बात ...

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उत्तराखंड के घरों से लुप्त होते लकड़ी के बर्तन

पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में लकड़ी के बर्तनों का उपयोग लगभग बंद हो गया है. कभी दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले लकड़ी के इन बर्तनों के नाम तक आज की पीढ़ी नहीं जानती होगी. लकड़ी के बने इन बर्तनों का प्रयोग अधिकांशतः दूध और उससे बनने वाली वस्तुओं को रखने के लिये किया जाता था. जिसका कारण लम्बे समय ...

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संकट की घड़ी में प्रवासियों को सता रही पैतृक घर की यादें

ये उच्ची डांडी कांठी, ये गैरि-गैरि रौंत्यलि घाटी, न जा न जा न जावा छोड़िकी अपड़ि जल्म भूमि माटी, बोल्यूं माना, बोल्यूं माना, बोल्यू माना। लोक गायक नरेन्द्र नेगी जी का यह गढ़वाली गीत के बोल आज उन प्रवासियों पर बैठ रहे है, जिन्होंने अपनी पैतृक मकान और भूमि छोड़कर दूर प्रदेशों में बस चुके है। जो करोना जैसे संकट ...

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कोरोना वायरस से बचने के लिए घर पर ही बनाएं हैंड सैनिटाइजर

दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। भारत में अभी तक 4 हजार से ज्यादा पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं। सरकार इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। लेकिन हमें खुद अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इससे बचने के लिए हाइजीन मेंटेन ...

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प्रवासी पहाड़ी लोग संकट की घड़ी में अपने पहाड़ों की तरफ लौटने को हो रहे है आतुर

कहते हैं सपने अपनों से बड़े होते हैं। ..और हम हैं कि सपनों के लिए अपनों और अपनी जमीन को छोड़ने में पलभर भी नहीं सोचते। अब जब संकट सिर पर खड़ा है तो कौन पनाह दे रहा है? कोरोना संक्रमण के बीच जब काम-धंधा ठप्प है तो लोग क्यों उन पहाड़ों की तरफ लौटने को आतुर हैं, जिन्हें दुर्गम ...

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