संपादकीय

एक्सिडेंट करा कर क्यों मारे जा रहे पत्रकार

(आकाश नागर) मोदी सरकार में माफियाओ के हौसले बुलंद है. हालात यहाँ तक ख़राब हो चुके है कि चौथे स्तंभ के प्रतीक पत्रकारों को सच लिखने पर जान से मार दिया जा रहा है। मोदी सरकार के पिछले चार साल के दौरान 30 पत्रकार बेमौत मारे जा चुके है। अब माफिया पत्रकारों को एक्सिडेंट में हत्या करा रहे है। मध्यप्रदेश ...

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उत्तराखंड में शराब सिंडिकेट का मुख्या बना “बूंदी सेठ “

(चेतन गुरुंग, वरिष्ठ पत्रकार ) लो यारों..शराब की दुकानों को और एक-दो महीने पुरानी लॉटरी पर ही चलते रहने देने की साजिश कामयाबी के करीब..एक दुकान से पांच लाख रूपये तक मिलने हैं.मालिकों से डील पक्की.आप क्या सोच रहे..यूँ ही नई आबकारी नीति का शासनादेश लटका हुआ है?अरे इतने गए-बीते और नाकारा भी नहीं..अपने विधायी वाले.फिर भी नीति वहां लटक ...

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क्या फर्क है दूसरे नाकाम रहे मुख्यमंत्रियों और त्रिवेंद्र में ?

(लेखक : योगेश भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार, देहरादून ) राजधानी अटी हुई है त्रिवेंद्र के “गुणगान” से, “केंद्र में नरेंद्र, उत्तराखंड में त्रिवेंद्र” और “भ्रष्टाचार पर प्रहार, पारदर्शी सरकार” जैसे नारे हर मोड़ और चौराहे पर हैं । समाचार पत्रों के पन्ने एडवर्टोरियल से रंगे हैं तो पार्टी से लेकर सरकार का पूरा तंत्र प्रचार में जुटा है, करोड़ों रुपया प्रचार ...

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समाज में महिलाओं के लिए प्रेम सामाजिक बोझ है?

किशोरावस्था और युवावस्था में प्रेम सार्वभौमिक किंतु समाज द्वारा अनपेक्षित और अस्वीकृत रिश्ता है। समर्पण और निष्ठा जैसे मूल्यों पर आधारित होने के कारण ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि यहां स्त्री और पुरूष के बीच गैर-बराबरी का स्तर कम होगा। अक्सर प्रेम के इस रिश्ते का निर्माण आपसी समझ और भावनात्मक सहयोग जैसे विशेषणों के आधार पर किया ...

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बाल यौन हिंसा पर चुप्पी, क्योंकि इज्ज़त का सवाल है

हमारी संस्कृति एवं धर्म के रुढ़िवादी विचारों के कारण बच्चों के मानवीय अधिकारों का उल्लंघन होता है। इसका पता तक समाज को नहीं चलता है। हमने जो धारणाये बना रखी है कि घर के सदस्यों के साथ बच्चे सुरक्षित हैं, परन्तु अधिकतर बाल यौन हिंसा परिचित व्यक्ति के द्वारा ही की जाती है। रुढ़िवादी समाज में बच्चों के बाल यौन ...

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बैंकों में फ्रॉड के बाद फ्रॉड की लम्बी लाइन

इन दिनों कुछ ही समय के अंतराल के दौरान एक के बाद एक सामने आने वाले अरबों रुपयों के बैंक घोटालों से देश के अर्थ जगत में भूचाल सा आया हुआ है जिससे बैंकों की विश्वसनीयता पर प्रश्रचिन्ह लग गया है। सबसे पहले पंजाब नैशनल बैंक का 11,400 करोड़ रुपए का ऋण घोटाला सामने आया जो कुछ बैंकरों तथा सरकारी ...

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भारी मुनाफे का धंधा हुआ जैविक मछली पालन

सामान्य ढंग से मछली पालन की तुलना में जैविक मछली का उत्पादन शुरू में कम होता है लेकिन लम्बी अवधि के लिए यह बहुत ही उपयुक्त है। इसमें कम जोखिम है। भारत चीन के बाद सी फूड का सबसे बड़ा निर्यातक है।  मत्स्य पालन पूरी दुनिया में एक वृहत्तर उद्योग का रूप ले चुका है। मछली उत्‍पादन के क्षेत्र में ...

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नीरव मोदी के पतन की वजह नीलम ?

कल तक नीरव मोदी और मेहुल चोक्सी हीरे का पर्याय हुआ करते थे, आज उन्ही हीरों ने उन्हें और उनकी आसमान सी इज़्ज़त को कोयला बना दिया। ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रतीक रत्न हीरा एक पारदर्शी रत्न है। रासायनिक रूप से समझें तो नाज़ुक दिल को लूटने वाला हीरा, सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है, जो कार्बन का शुद्धतम रूप है। ...

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घाटे की खेती या खेती में घटा !

आज भारत खाद्यान्न, फल, सब्जियां और दुग्ध उत्पादन में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में है फिर भी अन्नदाता संकट में क्यों है? आखिर क्या कारण है कि यहां खेती-बाड़ी की दशा साल-दर-साल बिगड़ती जा रही है। दरअसल, आज कृषि और किसान पर जो संकट आ पड़ा है उसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, किसान को लागत के हिसाब से ...

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अमरीका में बढ़ रहा है संयुक्त परिवारों का रुझान

कुछ सप्ताह पूर्व एक रविवार की शाम शोभना राम अपनी रसोई में जूठे बर्तन डिशवाशर में डाल रही थी। तभी अचानक उसका 85 वर्षीय ससुर डिनर टेबल से उठा और एक हाथ में छड़ी और दूसरे में खाली प्लेट लेकर उसकी ओर चल पड़ा। अचानक आंख के कोने में से उसे महसूस हुआ कि वह लडख़ड़ा गया है और संतुलन ...

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