यहां मां चामुंडा ने चैतन्य महाप्रभु के शिष्य को दिए दर्शन, जानिए मंदिर का रहस्य

नवरात्रों का पर्व शुरू हो गया है, साथ ही नवरात्रों में माता की पूजा अर्चना बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ की जाती है. वहीं, सभी कन्या और महिलाएं माता की पूजा के लिए 9 दिन तक व्रत भी रहती हैं. इसके अलावा विशेष पूजा-अर्चना करती हैं. क्योंकि नवदुर्गा का महत्व 9 दिनों तक होता है, जिसमें माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है. वहीं, उत्तर प्रदेश में श्री कृष्ण की नगरी मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित है मां चामुंडा का मंदिर है. जो कि सैकड़ों साल पुराना मंदिर है.साथ ही इसका रहस्य इतना प्राचीन है कि लोग इस मंदिर को देखने के लिए देश विदेशों से आते हैं.

वहीं, वृंदावन में राधा कृष्ण के मंदिर काफी देखने को मिलेंगे और राधा कृष्ण का नाम जाप भी काफी ज्यादा होता है .लेकिन जब नवदुर्गा का पर्व आता है तो कृष्ण की नगरी में जय माता दी के जयकारे लगना प्रारंभ हो जाते हैं. बता दें कि, वृंदावन के राजपुर गांव के पास परिक्रमा मार्ग स्थित मां चामुंडा देवी का प्राचीन अत्यंत पुराना मंदिर स्थित है, जिसमें कहा जाता है कि वृंदावन की खोज प्रमाण मां चामुंडा मंदिर से ही मिलता है. क्योंकि मां चामुंडा ने सनातन गोस्वामी को दर्शन देकर वृंदावन के बारे में बताया था. तभी से वृंदावन के बारे में सनातन गोस्वामी को ज्ञात हुआ था और वृंदावन की खोज हुई थी.

जानिए क्या है मंदिर की पौराणिक कथा?

दरअसल, वृंदावन में स्थित मां चामुंडा शक्ति पीठ के बारे में मान्यता और इतिहास काफी पुराना है. जो कि सैकड़ों या हजारों साल के आसपास का है. बता दें कि, आज से लगभग सैकड़ों हजारों साल पहले इतिहास और मान्यता के अनुसार चैतन्य महाप्रभु वृंदावन आए थे. उन्होंने यहां आकर श्री कृष्ण के लीला स्थल का अनुभव होने लगा था. लेकिन वृंदावन के मुख्य स्थल का संशय होने लगा था क्योंकि उनको लगता था कि भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन नंदगांव बरसाना से इतनी दूर गाय चराने कैसे आ सकते है, जिसको लेकर उन्होंने वृंदावन की खोज के लिए वृंदावन आए. चैतन्य महाप्रभु खुद लौट गए और उन्होंने अपने शिष्य सनातन गोस्वामी को वृंदावन की खोज के लिए और भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं के बारे में जानने के लिए भेजा था.

वहीं, चैतन्य महाप्रभु का आदेश पाकर सनातन गोस्वामी वृंदावन की खोज के लिए निकल पड़े थे. जहां पर वे कई सालों तक खोज करते रहे.जहां आज चामुंडा देवी मंदिर स्थित है. वहीं, यमुना नदी के किनारे पर उसी जगह पर पहुंचे वृंदावन की खोज करते-करते सनातन गोस्वामी काफी थक गए और उसी स्थान पर यमुना किनारे बैठ गए. ऐसे में सनातन गोस्वामी ने निराश होकर यमुना मां से प्रार्थना की हे मां मुझे वृंदावन की खोज करते करते काफी समय बीत गया है, लेकिन वृंदावन की खोज नहीं कर पाया हूं.

आदिकाल से विराजमान हैं चामुंडा पीठ

मैं गुरु के आदेश का पालन नहीं कर सका और अब किस मुख से अपने गुरु के सामने जाऊं. आप मुझे स्वीकार करें. तभी एक छोटी कन्या का रूप धारण कर मां ने दर्शन दिए और कहा कि आपको गोस्वामी ने भेजा है. आप जिस काम के लिए आए हैं यह वही स्थान है. जहां आप खड़े हैं और यही वृंदावन है. तभी गोस्वामी ने मां का परिचय जाना तो मां ने कहा कि मैं आदिकाल से यहीं पर विराजमान हूं और सती के खंड से पैदा हुई हूं. इसके साथ ही मैं यहां पर चामुंडा पीठ के नाम से जानी जाती हूं.

 

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