उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से CJI रंजन गोगोई की बैठक खत्म

लखनऊ, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले देश की शीर्ष अदालत भी उत्तर प्रदेश में हर प्रकार की तैयारियों को परखना चाह रही है। इसी क्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई उत्तर प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों से भेंट की। भारत के मुख्य न्यायाधीश अपने चेम्बर में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी तथा डीजी पुलिस ओपी सिंह के साथ अयोध्या मामले का फैसला आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम को लेकर बैठक कर रहे थे। जहां अब यह बैठक खत्म हो चुकी है और मुख्य सचिव, DGP समेत सभी अधिकारी सुप्रीम कोर्ट से निकल गए हैं।

पूरे देश में यह चर्चा तेज है कि अयोध्य को लेकर फैसला कभी भी आ सकता है। इसे लेकर ना सिर्फ उत्तर प्रदेश और बल्कि पूरे देश की पुलिस को सतर्क कर दिया गया। इस बीच शुक्रवार सुबह सूचना मिली कि भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने आज उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी तथा पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह से अपने चेम्बर में मुलाकात करेंगे। जहां तुरंत मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी तथा पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह के साथ अन्य वरिष्ठ पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी नई दिल्ली पहुंच गए।

बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश इन अधिकारियों से भेंट करने के साथ ही अयोध्या के फैसले से पहले की तैयारियों पर चर्चा करेंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के विवाद के मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। इस फैसले के शीघ्र आने की संभावना के बीच में उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के साथ ही प्रदेश के हर जिले में सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करने में लगी है।

सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले ही फैसला आना है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर लगातार 40 दिन सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। अब सभी को इसके फैसले का इंतजार है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनके रिटायरमेंट से पहले ही फैसला आना है।

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर फैसले की घड़ी करीब आ रही है और इसको लेकर पहले से ही हर तरह की तैयारी की जा रही है। अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतजार हैं। अयोध्या से सटे जिलों में भी पुलिस मुस्तैद है और किसी भी तरह की घटना से निपटने के लिए खास तैयारी है। केंद्र के साथ राज्य की पुलिस तैयार है।

पुलिस मुख्यालय ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील 34 जिलों के पुलिस प्रमुखों को भी निर्देश जारी कर दिए हैं। इनमें मेरठ, आगरा, अलीगढ़, रामपुर, बरेली, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आजमगढ़ है।

अफवाहों और गलत जानकारियों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि अगर किसी ने कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की तो उस पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एसएसए) लग सकता है।

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