जनता के पैसे से जनता को सुविधा देना मुफ्तखोरी नहीं

दिल्ली में मतगणना के बीच पिछड़ती पार्टी बीजेपी के नेता प्रवेश वर्मा ने हार का ठीकरा दिल्ली वासियों पर फोड़ दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ‘फ्री’ के प्रलोभन में बह गई. यह अजीब है कि हार की जिम्मेदारी अपने बयानों और मुद्दों को न देते हुए जनता को दी जा रही है.

सबसे अजीब बात यह है कि एक्स सिक्योरिटी में रहने वाले, लग्जरी गाड़ियों में घूमने वाले लोगों को जनता को मिलने वाली थोड़ी सी सुविधा से इतनी समस्या हो रही है. उन्हें लगता है कि पूरी दिल्ली की जनता उन्हीं की तरह स्मार्टफोन में लगे हुए ड्रिंक्स के साथ देश की बड़ी बड़ी बातें करती है जबकि ऐसा नहीं है. अधिकांश जनता गरीब है जो स्मार्टफोन पर सरकारी नौकरी के विज्ञापन खोजती है, नजदीकी स्टोर्स पर सेल्समैन की जॉब खोज रही है, मेट्रो और सिटी बसों में डेढ़-डेढ़ घंटे का सफर करके अपने काम पर पहुंच रही है.

मुफ्तखोरी का ताना देने वाले लोग उन बस्तियों में नहीं जा सकते जहां बदबू, गंदगी और गरीबी का नंगा नाच होता है. कोई आश्चर्य नहीं है कि ये गरीबी का ठीकरा भी गरीबों पर ही फोड़ सकते हैं. ऊंचाई पर बैठा हर शख्स अगर चिराग तले का अंधेरा देख पाए तो अंधेरा कैसे रह जाएगा. अंधेरे का असली कारण असली समस्या को न देख पाना है.

महिलाओं को बस में मुफ्त यात्रा पर बवाल किया गया कि इससे मुफ्तखोरी को बढ़ावा मिलेगा. यह नहीं सोचा गया कि जो सड़कियां हजारों रुपए किराए में फूंकने की वजह से पढ़ाई नहीं कर पातीं, उन्हें इस सुविधा से कितना लाभ होगा. जो महिलाएं थोड़ी-थोड़ी सैलरी पर घर से दूर काम करती हैं उनके अगर 2 हजार रुपए भी महीने में बचेंगे तो उनके लिए कितनी बड़ी राहत होगी. BMW में घूमने वाले स्टार्स के लिए भले ये रकम कुछ न हो लेकिन ज्यादातर दिल्ली वाली महिलाओं को इस सुविधा से जरूर आराम मिलेगा.

200 यूनिट बिजली और 700 लीटर पानी फ्री करने का तर्क यह दिया गया कि इससे बिजली और पानी की बर्बादी होगी. मुफ्तखोरी का ताना देने वाले इस एंगल से नहीं सोचते कि एक एवरेज इनकम वाला मिडिल क्लास आदमी कोशिश करेगा कि वह 200 यूनिट बिजली से कम खर्च करे ताकि उसका बिल जीरो आए. वह 700 लीटर से कम पानी खर्च करने की कोशिश करेगा.

इन्हें यह समझना चाहिए कि सरकार बिजनेस नहीं चला रही है बल्कि वह जनहितकारी कामों के लिए चुनी गई है. अगर वह जनता की सुविधा की बजाय अपना पेट भरने में लग जाएगी तो सरकार कंपनी हो जाएगी. अगर जनता के टैक्स के पैसों से जनता को मुफ्त सुविधाएं दी जा रही हैं तो इन नेताओं और फाइव स्टार लोगों को क्या प्रॉब्लम है, ये समझना समझ से बाहर की बात है.

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