डॉक्टर्स पूरी निष्ठा, समर्पण और मजबूती से कर्तव्य पालन में जुटे है – डॉ आशुतोष सयाना

अजीत नेगी से बातचीत में डॉ. आशुतोष सयाना,  प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून ने बताया कि-

चिकित्सा के पेशे में जितनी जिम्मेदारी है वह अन्यत्र दिखाई देना दुर्लभ है, हो भी क्यों न, इंसानों का जीवन बचाने से बड़ी और कौन सी जिम्मेदारी हो सकती है। यह जिम्मेदारी तब और बढ़ जाती है जब देश में युद्ध, आपदा या महामारी के हालात हों।क्योंकि ऐसे में जिम्मेदारी के साथ चुनौतियां भी कई गुना और कई स्तरों पर बढ़ जाती हैं। कोरोना वायरस माहामारी के इस संकटपूर्ण दौर में ऐसा महसूस भी किया जा सकता है। आने वाला हर नया दिन चुनौतियों को साथ लेकर आ रहा है और हम पूरी निष्ठा, समर्पण और मजबूती से अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं।

संकट के समय जिस सामूहिकता के साथ काम करने की आवश्यकता होती वह आप इस दौरान देख सकते हैं। चिकित्सक से लेकर सफाईकर्मी तक हर कोई अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभा रहा है। इस तरह के उदाहरण आए दिन सामने आ रहे हैं जहां खुद के जीवन की परवाह न करते हुए देश और इंसानियत की रक्षा के लिए हमारे साथी जुटे हुए हैं। इसका परिणाम भी देखने को मिल रहा है । पिछले चालीस दिनों में अस्पताल में भर्ती हुए 22 मरीजों में 10 ठीक भी हो चुके हैं। यह संख्या उम्मीद जगाती है कि हम इस संकट से पार पा लेंगे।

कोरोना वायरस के लिए तैयारियों की बात करें तो हम जनवरी के अंतिम सप्ताह में ही इसे लेकर एलर्ट मोड में आ चुके थे और आपदा की स्थिति के लिए तैयारियों को शुरु कर दिया गया था। वॉर्ड आरक्षित करने से लेकर, नोडल अधिकारी और कर्मचारियों की तैयारी शुरू हो गई थी। लेकिन हमारी असली परीक्षा तब हुई जब देहरादून में कोरोना का पहला मामला सामने आया। चूंकि हम पहले तैयारी कर चुके थे इसलिए हमारे डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी कर्मचारियों ने साथ मिलकर एक टीम की तरह कार्य किया, जिसके सकारात्मक परिणाम भी मिले। इसके बाद बीच मरीजों की संख्या बढ़ती रही और साथ ही चुनौतियां भी।

इस दौरान राज्य सरकार ने अस्पताल को कोविड हॉस्पिटल घोषित कर दिया जिसके तहत 400 बेड आरक्षित रखने के निर्देश हमें मिले। शुरुआत में हमने 23 इसके लिए रखे, जिनमें आठ बेड संदिग्ध व 15 संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित थे। इसके बाद लगातार क्षमता बढ़ाई गई और वर्तमान में हमारे पास 125 आइसोलेशन बेड व 41 बेड पॉजिटिव मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। लेकिन यह हमारी सीमा नहीं है, जैसे-जैसे जरूरत होगी, हम अपनी क्षमता बढ़ाते जाएंगे। टारगेट 400 बेड का है, पर हमने 30 बेड का अतिरिक्त इंतजाम भी रखा है।

इसी तरह वेंटिलेटर भी बढ़ाए जा रहे हैं। अभी तक दस वेंटिलेटर कोरोना के लिए थे, पर अब पांच वेंटिलेटर हमें और मिल गए हैं। अगले कुछ वक्त में और वेंटिलेटर की मिलने जा रहे हैं। इस तरह कुल 50 वेंटिलेटर का लक्ष्य हमने रखा है।

चूंकि संकट असाधारण है इसलिए हमें इससे पार पाने के लिए उपकरणों के साथ पेशेवर समर्पण और संवेदनशीलता के साथ टीम वर्क की भी जरुरत है। हमें खुशी है कि एक तरफ जहां हम व्यवस्थाओं को विस्तार दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ हमारे चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, और तकनीशियन सभी पूरी निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। एक तरह से अस्पताल ही इन दिनों उनका घर है ऐसे में उनके रहने-खाने की व्यवस्था भी अस्पताल के समीप ही की गई है। ये लड़ाई इंसान और इंसानियत को बचाने की है इसलिए हमारे ये सभी कोरोना योद्धा न केवल परिवार, बल्कि खुद को भुलाकर भी पूरी निष्ठा के साथ इस लड़ाई में जुटे हैं।

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