आपदा के पांच साल बाद भी नहीं हुए सुरक्षित इंतजाम

उत्तरकाशी। आपदा के पांच साल बाद भी सरकार न तो चामकोट गांव तक आवाजाही का रास्ता दुरुस्त करा पायी और न ही यहां गंगा भागीरथी नदी को पार करने के लिए पुल का निर्माण करा पायी। ग्रामीण गंगा भागीरथी पर जर्जर हुई ट्राली से जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं, जबकि गांव के कई परिवार मातली गांव में किराए पर मकान लेकर रहने को मजबूर हैं।

जिला मुख्यालय से महज आठ किमी दूर स्थित दिलसौड़, चामकोट गांव तक आपदा से पहले सड़क का कटान हो चुका था। ग्रामीण इसी सड़क से आवाजाही करते थे, लेकिन वर्ष 2012-13 की आपदा में दिलसौड़ और चामकोट के बीच भारी भूस्खलन होने से सड़क तबाह हो गई और यहां पैदल आवाजाही लायक रास्ता भी नहीं बचा। तब प्रशासन ने चामकोट से मातली के बीच गंगा भागीरथी पर 102 मीटर लंबी ट्राली बांध कर ग्रामीणों की आवाजाही की व्यवस्था की। इस स्थान पर वर्ष 2010 में पुल निर्माण को स्वीकृति तो मिली, लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
अब हाल यह है कि पांच साल में ट्राली जर्जर हो चुकी है। तार ढीले होने के कारण गंगा भागीरथी में उफान आने पर नदी का पानी ट्राली को छूने लगता है। लंबे समय से ग्रीसिंग नहीं होने से रस्सों से ट्राली को खींचने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है। इस हाल में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।

चामकोट निवासी लाखीराम चमोली, जयकृष्ण चमोली, अनीता, सुनीता आदि का कहना है कि बार-बार मांग करने पर भी सरकार सुध लेने को राजी नहीं। ऐसे में ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं। जर्जर हुई ट्राली से आवाजाही से यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

चामकोट गांव के लिए गंगा भागीरथी पर पुल निर्माण की प्रथम चरण की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए 12.05 करोड़ का आगणन भेजा गया था, लेकिन शासन से स्वीकृति नहीं मिली। अब पुल का निर्माण विश्व बैंक की मदद से कराया जाना है। जिसकी प्रक्रिया गतिमान है। 
वीरेंद्र पुंडीर, अधिशासी अभियंता, लोनिवि प्रांतीय खंड।

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