चीन को झटका, भारत में उतरेगी जर्मन फुटवियर कंपनी

आगराः जर्मन कंपनी ने विश्वभर के फुटवियर कारोबार के लिए जिले की आईट्रिक इंडस्ट्रीज के साथ करार किया है. जर्मन कंपनी के भारत में आकर कारोबार करने से आगरा में 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. वहीं करोड़ों डॉलर का निर्यात होगा. इससे यह उम्मीद लगाई जा सकती है कि कोरोना काल में शूज कारोबार को जर्मनी की कंपनी ने बूस्ट अप किया है. आईट्रिक इंडस्ट्रीज के डॉयरेक्टर आशीष जैन ने बताया कि

आगरा जूतों का विदेशों में कारोबार
आगरा शूज कारोबार का हब है. यहां से करोड़ों डॉलर का कारोबार विदेशों में होता है. जिले में बने शूज की दुनियां भर में डिमांड है. विश्वव्यापी महामारी कोरोना में जर्मन कंपनी करोड़ों डॉलर का जूता निर्यात चीन से समेट कर भारत आना बड़ी बात है. आईट्रिक इंडस्ट्रीज के डॉयरेक्टर आशीष जैन ने बताया कि कासा एवर्ज जीएमबीएच के ब्रांड वॉन वैल्स 5 जोन है, जो हैल्दी फुटवियर बनाने का काम करती है. कंपनी के साथ दो साल पहले काम शुरू किया था. हमारी आईट्रिक इंडस्ट्रीज इनकी इंडिया के लिए लाइसेंसी है. हम दो साल से इंडिया और श्रीलंका के लिए वान वैल्स शूज बना रहे हैं.

80 देशों के लिए आगरा से होगा एक्सपोर्ट
आईट्रिक इंडस्ट्रीज के डॉयरेक्टर आशीष जैन ने बताया कि अभी तक हम इंडिया और श्रीलंका के साथ अन्य देशों के लिए कंपनी शूज बनाकर एक्सपोर्ट कर रही थी. अब नया करार होने से कंपनी के इंटरनेशनल मार्केट यानी 80 से ज्यादा देशों में कंपनी का फुटवियर एक्सपोर्ट का रास्ता साफ होगा. आशीष जैन ने बताया कि 100 मिलियन लोग इस कंपनी का शूज पहनते हैं. अब आगरा से यूरोपियन, एशियन, अफ्रीकन और अन्य देशों के लिए शूज एक्सपोर्ट किया जाएगा.

रिफ्लेक्सोलॉजी पर बेस्ड टेक्नोलॉजी
आशीष जैन ने बताया कि वॉन वैल्स शूज अत्याधुनिक तकनीकी पर बनाए जाते हैं. जर्मन ओर्थोपेडिक्स डॉ. मॉक की बनाई हुई तकनीक है, जिसकी रिसर्च 30 साल पहले हुई थी. यह पेटेंटिड टेक्नोलॉजी है. इसे कोई चोरी और कॉपी नहीं कर सकता है. यह टेक्नोलॉजी रिफ्लेक्सोलॉजी पर बेस्ड है. इस तकनीकी से बनाए गए शूज नी पेन, हील पेन, मसल्स पेन सहित अन्य तमाम बीमारियों से दूर रखते हैं.

अब बनाने होंगे हर साल 25 से 30 लाख पेयर्स
आशीष जैन कहते हैं कि हम अभी तक दो लाख पेयर्स का प्रोडक्शन कर रहे थे, लेकिन नया करार होने से इंटरनेशनल मार्केट में शूज उपलब्ध कराना है. अब हमारा करीब 25 से 30 लाख पेयर्स हर साल बनाने का टारगेट रहेगा. नया करार होने से अब इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ाना पड़ेगा. इसके लिए हम एक नई यूनिट लगाएंगे. इस करार में प्रदेश सरकार का सहयोग सराहनीय रहा है. नई यूनिट के लिए प्रदेश सरकार से बात की जा रही है, क्योंकि हर विदेशी कंपनी को बेहतर रिजल्ट देकर आकर्षित किया जा सकता है. इसको लेकर काम किया जा रहा है. जल्द से जल्द हम अपना काम स्टार्ट कर सकें.

स हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
आईट्रिक इंडस्ट्रीज के डॉयरेक्टर आशीष जैन ने बताया कि जर्मनी कंपनी के साथ किए गए नए करार से प्रोडक्शन बढ़ाना होगा. यूनिट भी लगेगी. इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आगरा में करीब दस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा, क्योंकि, शूज इंडस्ट्रीज एक लेबर इंटेशिव इंडस्ट्रीज है.

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