दून अस्पताल में हाकिम मरीज और तीमारदारों से दूर

देहरादून, दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में ‘हाकिम’ मरीज व तीमारदारों से दूर हो गए हैं। उनसे मिलने में लोगों की सांस फूल रही है।

कारण ये कि चिकित्सा अधीक्षक समेत पूरा प्रशासनिक अमला नई ओपीडी बिल्‍डिंग में पांचवें तल पर बैठ रहा है। ऐसे में मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।

लोगों को उन तक पहुंचने के लिए भी कई-कई सीढ़ियां नापनी पड़ रही हैं। इससे पहले अधिकारी-कर्मचारी पुरानी बिल्‍डिंग में स्थित प्रशासनिक भवन में प्रथम तल पर बैठते थे।

बता दें, पांच वर्ष पूर्व दून अस्पताल व दून महिला अस्पताल को एकीकृत कर मेडिकल कॉलेज में तब्दील किया गया था। तब लगा कि मेडिकल कॉलेज बन जाने के बाद यहां सुविधा व संसाधनों में इजाफा होगा।

पर पांच साल बाद में व्यवस्थाएं ढर्रे पर नहीं आ सकी हैं। आश्चर्य की बात यह कि नए ओपीडी ब्लॉक की अधूरी बिल्‍डिंग का 10 माह पहले उद्घाटन कर दिया गया था।

इसके बावजूद बिल्‍डिंग का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जिसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।

शासनिकभवन में मेडिकल, चिकित्सा प्रतिपूर्ति सहित कई अन्य कार्य होते हैं। इसके अलावा किसी तरह की दिक्कत होने पर भी मरीज चिकित्सा अधीक्षक तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं।

अब पांचवें तल पर कक्ष आवंटित किया गया है। इसके अलावा कर्मचारी भी वहीं बैठ रहे हैं। ऐसे में मेडिकल, चिकित्सा प्रतिपूर्ति सहित तमाम प्रशासनिक कार्यों के लिए लोग सीढ़ियां नाप रहे हैं।

दून अस्पताल की नई ओपीडी में लिफ्ट का काम अभी भी अधूरा है। नई ओपीडी बिल्‍डिंग में चार लिफ्ट लगनी हैं, जिनमें अभी भी दो ही लग पाई हैं।

इन दो लिफ्ट की भी क्षमता बहुत कम है। जिनमें एक वक्त पर चार से पांच व्यक्ति ही जा सकते हैं। ऐसे में आखिरी माले तक पहुंचने में मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

नई बिल्‍डिंग में ईएनटी, नेत्र रोग, डेंटल, बाल रोग, चर्म रोग, मनोरोग आदि की ओपीडी संचालित की जा रही है, लेकिन इलाज के लिए मरीजों को सीढ़ियां नापनी पड़ रही हैं।

दून अस्पताल की नई ओपीडी बिल्डिंग में पहुंचने वाले मरीजों को लिफ्ट की जानकारी मिले, इसके लिए उन्होंने सूचना पट्ट और लिफ्ट में गार्ड खड़े रहने की मांग की है।

मरीज व तीमारदारों का कहना है कि लिफ्ट छोटी है, इसके चलते अक्सर बुजुर्ग लोग लिफ्ट में जाने से डरते हैं। इसके लिए वहां पर एक गार्ड होना चाहिए।

नए ओपीडी ब्लॉक की कार्यदायी संस्था यूपी राजकीय निर्माण निगम द्वारा रिवाइच्ड एस्टीमेट पास न होने को काम में देरी का कारण बताया जा रहा है।

  1.  कार्यदायी संस्था का कहना है कि शासन को रिवाइच्ड एस्टीमेट भेजा गया है, लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। धन की कमी के कारण बिल्डिंग का काम रुका हुआ है। रिवाइच्ड एस्टीमेट का बजट मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

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