प्रवासियों के मामले पर हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

नैनीताल: उत्तराखंड वापस लौट रहे प्रवासियों के मामले पर नैनीताल हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को उत्तराखंड लौट रहे प्रवासियों को प्रदेश की सीमा पर ही संस्थागत क्वॉरेंटाइन करने के निर्देश दिये हैं. हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि लौट रहे प्रवासियों का राज्य की सीमा पर ही स्वास्थ्य परीक्षण करवाया जाए. हाईकोर्ट ने अपने आदेश देते हुए कहा है कि जब तक सीमा पर रखे गये प्रवासियों की जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक उन्हें सीमा पर ही संस्थागत क्वॉरेंटाइन किया जाए.

बता दें कि हरिद्वार के रहने वाले सच्चिदानंद डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कोरोना को वैश्विक महामारी घोषित किया गया है. इससे निपटने के लिए प्रवासी लोगों की मदद दैवीय आपदा राहत कार्य व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत की जानी चाहिए. याचिका में कहा है कि लॉकडाउन से प्रभावित मजदूरों, गरीबों व अन्य लोगों की मदद कुछ राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं व अन्य लोगों के द्वारा ही की जा रही है. इनके पास वायरस से बचने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. जिससे जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री पहुंचना मुश्किल हो रहा है.

याचिकाकर्ता का कहना है कि खाद्य सामग्री बांटने का काम उप जिलाधिकारी,तहसीलदार,स्थानीय निकाय, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत आदि द्वारा किया जाना चाहिए था. जिससे जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री आसानी से पहुंच सके. जिसमें सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायाधीश रविंद्र मैठाणी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्रवासियों के संबंध में आदेश जारी किये. जिसमें उन्होंने उत्तराखंड आ रहे प्रवासियों को प्रदेश की सीमा पर ही क्वॉरेंटाइन करने का आदेश दिया.

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