जनादेश 2019: 51 फीसदी वोट का जादुई आंकड़ा बीजेपी ने कैसे छुआ?

लोकसभा चुनाव 2019 को कई चीजों के लिए याद किया जाएगा. चाहे बात बयानबाजी की हो या एक दूसरे पर हमले के लिए नारेबाजी का प्रयोग करना. इस दौरान कुछ चीजें ऐसी भी थीं जो कैमरे की निगाहों से दूर रहीं, लेकिन नतीजों पर उसका सबसे ज्यादा असर हुआ. आइए एक बार उन सभी मुद्दों पर नजर दौड़ाते हैं.

‘मोदी है तो मुमकिन है’ यह नारा यूं ही सफल नहीं हुआ बल्कि इसके पीछे की मेहनत और रणनीति कुछ ऐसी रही जिसने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को अभेद्य बना दिया.

कार्यकर्ताओं के साथ ही प्रयोग कैसे साबित हुआ गेम चेंजर!

बीजेपी ने चुपचाप अपने कार्यकर्ताओं को एक काम दिया था और वो काम था मतदान के दिन सुबह 10 बजे के पहले पूरे परिवार का वोट डलवा देना. यह बीजेपी के अपने उस ‘ए’ ग्रेड के बूथ प्रबंधन का जिम्मा था जहां बीजेपी हमेशा जीतती रही है. इसके तहत बीजेपी ने अपने बूथों पर भारी मतदान की रणनीति बनाई थी और वह उसमें सफल रही.

कैसे कार्यकर्ताओं ने जलपान के पहले परिवार के मतदान को बनाया मूल मंत्र

प्रदेश के 1 लाख 37 हजार बूथ, जहां बीजेपी का संगठन है उसमें साठ हजार बूथ बीजेपी के ए ग्रेड के बूथ हैं. जहां बीजेपी ने ‘जलपान से पहले कार्यकर्ता परिवार का मतदान’ का अभियान सफल बनाया.

बीजेपी का दूसरा बड़ा कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के योजनाओं से लाभान्वित परिवारों तक पहुंचने का था. प्रत्येक बीजेपी के कार्यकर्ता को 5 लाभार्थियों तक पहुंचने का टारगेट दिया गया था, जिसे बढ़ाकर बीजेपी ने 20 किया और अपने चुनाव प्रचार के पहले बीजेपी ने यह टारगेट पूरा कर लिया यानी बीजेपी का हर कार्यकर्ता किसी न किसी लाभार्थी के घर पहुंचा और मोदी की योजनाओं के नाम पर सीधे वोट मांगे.

बीजेपी के संगठन महामंत्री सुनील बंसल जिन्हें उत्तर प्रदेश में बीजेपी संगठन का चाणक्य कहा जाता है उन्होंने बीजेपी के एक करोड़ से ज्यादा कार्यकर्ताओं से संवाद किया और फीडबैक लिया और यही रणनीति बीजेपी को यूपी में 50 फीसदी से ज्यादा वोट दिलाने सफल रही.

जब उत्तर प्रदेश में महागठबंधन बन रहा था तभी अमित शाह ने 51 फीसदी वोट का टारगेट तय किया था जिसे पूरा करना आसान नहीं था क्योंकि बीजेपी को 2014 में  43 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे. इस बार 7 फीसदी वोट बढ़ाना किसी सपने के सच होने जैसा है.

कैसे धराशाई हुआ महागठबंधन?

यूपी बीजेपी के संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने आज तक को बताया कि 53 सीटों पर बीजेपी का जीतना तय था 27 सीटों पर कड़ा मुकाबला था और ऐसी सीटों पर ही हमारे प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह ने बहुत मदद पहुंचाई. प्रधानमंत्री की योजनाएं और अमित शाह के प्रबंधन कुशलता जमीन पर उतरी और जमीन पर बने माहौल ने हमारे चुनाव प्रचार को धार दिया जिसकी वजह से महागठबंधन ऊपर तो भारी दिखता रहा लेकिन नीचे से उसकी जमीन खिसकती रही.

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