दूध पीते हैं रोज तो पहले सोच लें दस बार

आगरा, आगरा में दूध का कारोबार करने वाले विक्रेता ताकतवर होते जा रहे और खरीदार कमजोर होते जा रहे हैं। भोगीपुरा और जलेसर रोड के दो मामले ही दूध कारोबारियों की पूरी हकीकत बयां करने के लिए काफी हैं। जिले में दूध की आपूर्ति करने वाले दूधिए व बड़े कारोबारी उसमें कई तरह के केमिकल मिला रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आंकड़े इस बात का सबूत बन रहे हैं। आगरा में लगभग 80 डेरी संचालित हैं और सैकड़ों दूध विक्रेता गलियों में घूमते हैं। इनके पास एफएसडीए विभाग से पंजीकरण व लाइसेंस नहीं हैं। पिछले डेढ़ साल में विभाग ने 150 से अधिक सैंपल लिए थे। इनमें से दर्जनों सैंपल फेल हो गए। सैंपल रिपोर्ट में डिटजेर्ंट, कास्टिक सोडा, ग्लूकोज, सफेद पेंट और रिफाइंड तेल पाया जा रहा है, जो शरीर के लिए हानिकारक हैं।

ऐसे करते हैं मिलावट की पहचान

– दूध को सूंघने पर साबुन जैसी गंध आती है, तो इसका मतलब दूध सिंथेटिक है।

– असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद डिटजेर्ंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा होता है।

– असली दूध स्टोर करने पर अपना रंग नहीं बदलता, मिलावटी दूध कुछ वक्त में पीला होने लगता है। पानी की मिलावट की पहचान के लिए दूध को एक काली सतह पर छोड़ दें। असली दूध सफेद लकीर छोड़ देता है।

– असली दूध उबालने पर रंग नहीं बदलता है। मिलावटी दूध पीला हो जाता है।

– दूध किसी चिकनी लकड़ी या पत्थर की सतह पर एक या दो बूंद टपकाकर देखें। दूध बहता हुआ नीचे की तरफ गिरे और सफेद धार सा निशान बन जाए तो दूध शुद्ध है।

– असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती। नकली दूध को अगर आप अपने हाथों के बीच रगड़ेंगे तो डिटजेर्ंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी।

आगरा में दूध कारोबार

– चार लाख दस हजार दुधारू गाय हैं।

– छह लाख 90 हजार दुधारू भैंस हैं।

– लगभग 80 डेरी संचालित हैं।

– करीब तीस लाख लीटर दूध की सप्लाई होती है।

केस-1

भोगीपुरा की केदारनाथ मार्केट में 30 जुलाई को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने छापा मारा था। नंदलाल डेरी संचालक बिना लाइसेंस के दूध बेचता मिला। टीम ने सैंपल लेकर लखनऊ भेजे थे। सैंपल की रिपोर्ट में डिटर्जेट और ग्लूकोज पाया गया है। खाद्य अधिकारी ने मुकदमे की स्वीकृति के लिए पत्र लिखा है।

जलेसर रोड स्थित मुड़ी में 12 सितंबर को कार्रवाई की गई थी। एफएसडीए की टीम ने एक गाड़ी में करीब 350 लीटर दूध पकड़ा। जांच के लिए उसके सैंपल भेज दिए। सैंपल की जांच रिपोर्ट में ग्लूकोज, मिल्क पाउडर, रिफाइंड पाया गया। इसमें भी मुकदम की स्वीकृति के लिए पत्र लिखा गया है।

दूध विक्रेताओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। सैंपल फेल होने पर मुकदमा कायम किया जा रहा है। मिलावट के कारोबार को कम करने का पूर्ण प्रयास किया जा रहा है।

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