दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष तय नहीं कर पा रही कांग्रेस

दिल्ली में विधानसभा चुनाव (Assembly elections) सर पर है, लेकिन पार्टी में असमंजस और प्रदेश कांग्रेस में अंतरकलह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे. शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) के निधन के बाद से ही दिल्ली कांग्रेस (Delhi congress) एक तरह से नेतृत्वविहीन है. कहने को तीन कार्यकारी अध्यक्ष हैं, लेकिन किसी का भी किसी से तालमेल नही है. सब अपनी चलाने की कोशिश कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस मसले पर कांग्रेस आलाकमान (Congress Leadership) जल्द ही बैठक करने जा रहा है.

आप-बीजेपी तैयारी में जुटे
वैसे तो राजधानी में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव संभावित है. कयास यह भी लग रहे हैं कि इस साल के अंत में भी यह चुनाव हो सकते हैं. चुनाव को लेकर प्रदेश बीजेपी व आम आदमी पार्टी में खासी गहमागहमी है और वार्ड लेवल तक चुनावों को लेकर तैयारियां चल रही है. वहीं प्रदेश कांग्रेस में बेचैनी भरी चुप्पी छाई हुई है. उसका कारण यह है कि अभी तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा ही नहीं हो पा रही है. तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित की 20 जुलाई को मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद पार्टी में सदमे जैसे हालात बन गए थे.

किसको मिलेगी दिल्ली की कमान

वैसे अध्यक्ष पद के लिए कई नाम उभरकर आए हैं, जिनमें पंजाब के नेता नवजोत सिंह सिद्धू, शत्रुघ्न सिन्हा के नाम शामिल हैं. माना जा रहा है कि इनको अध्यक्ष बनाए जाने से पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा नहीं मिलेगा. अब समस्या ये है कि ये दोनों नेता बाहरी हैं और राजधानी की राजनैतिक नब्ज़ पर इनकी पकड़ नहीं है, इसलिए इन्हें प्रदेश नेताओं पर ही आश्रित होना होगा.

दूसरी ओर अध्यक्ष बनने के लिए दिल्ली के नेताओं की भी चर्चा चल रही है, जिनमें जयप्रकाश अग्रवाल, योगानंद शास्त्री, महाबल मिश्रा, अरविंदर सिंह लवली, राजेश लिलोठिया शामिल है. इनको लेकर सर्वसम्मति का संकट खड़ा हो सकता है.

‘अध्यक्षों’ में आपसी तालमेल का अभाव
वैसे तो प्रदेश कांग्रेस में तीन कार्यकारी अध्यक्ष बने हुए हैं, जिनमें हारून युसूफ, देवेंद्र यादव व राजेश लिलोठिया शामिल हैं. बताते हैं कि इनमें आपसी समन्वय का अभाव है. हारून व देवेंद्र अलग काम कर रहे हैं तो लिलोठिया कांग्रेस कार्यालय में अलग से बैठकें कर रहे हैं. इसके चलते प्रदेश कांग्रेस का कामकाज सुचारू नहीं चल पा रहा है और विधानसभा चुनाव को लेकर न तो प्रचार नीति बन पा रही है और न ही कोई निर्णय हो पा रहा है. प्रदेश कार्यालय में नेता और कार्यकर्ता आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं.

बैठक बुला सकती हैं सोनिया गांधी
प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी जल्द ही बैठक बुलाने वाली हैं, लेकिन देखना यह होगा कि वह ऐसे कौन से नेता को अध्यक्ष पद के लिए चुनती हैं जो दिल्ली में बीजेपी और आप को तो टक्कर दे ही सके साथ ही पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं में जोश भी भर सके.

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