टेरर फंडिंग में कश्मीर के व्यापारी के घर पर NIA ने मारा छापा

श्रीनगर । राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने 11 साल से फरार हवाला कारोबारी नासिर शफी मीर के दो भाइयों के ठिकानों पर दबिश दे तलाशी ली। एनअाइए की टीम ने कथित तौर पर कुछ बैंकों के दस्तावेज, एक लैपटाप, दो मोबाइल फोन और बीते कुछ सालों के दौरान उनकी विदेश यात्राओं से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए हैं।

नासिर शफी मीर के पिता मोहम्मद शफी मीर 1990 के दशक की शुरुआत में श्रीनगर में सक्रिय हिज्ब आतंकी गुलाम हसन खान के लिए हवाला के जरिए पैसे का बंदोबस्त करते थे और नासिर सफी मीर न सिर्फ आतंकियों के लिए बल्कि मीरवाईज मौलवी उमर फारुक समेत विभिन्न अलगाववादी नेताओं के लिए पैसा पहुंचाता था। उसके जरिए कई अलगाववादी नेताओं ने दुबई और यूरोप में भारी पूंजी निवेश भी किया हुआ है।

संबंधित अधिकारियों ने बताया कि एनआइए की एक टीम आज सुबह साढ़े सात बजे नासिर के भाई फैयाज अहमद मीर के लालबाजार में कासमिया लेन में स्थित मकान पर राज्य पुलिस के एक दस्ते के साथ पहुंची। पुलिस ने दल ने मकान को चारों तरफ से घेरते हुए आम लोगों की आवाजाही को बंद कर दिया और उसके बाद एनआइए ने मकान की तलाशी ली। एनआइए की टीम ने फैयाज और उसके परिजनों से भी पूछताछ की। इसी दौरान एनआइए के एक अन्य दल ने पुलिस के जवानों के साथ मिलकर श्रीनगर के ईश्वर निशात स्थित मेहराजुदीन मीर के मकान और कार्यालय की तलाशी ली। मेहराजुदीन भी नासिर शफी मीर का भाई है। एनआइए की यह कार्रवाई शाम पांच बजे तक जारी रही।

नासिर सफी मीर संयुक्त राज्य अमरीका की सुरक्षा एजेंसी एफबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए गुलाम नबी फाई के करीबियों में एक है और उसे तीन फरवरी 2006 में दिल्ली पुलिस ने एक विशेष सूचना के आधार पर पकड़ा था। उस समय उसकी कार से पुलिस ने 55 लाख की नकदी के अलावा हथियारों का एक जखीरा भी जब्त किया था। नासिर मीर ने 1983 में अपनी पढ़ाईछोड़ अपने पिता मोहम्मद शफी मीर के साथ उनके कालीन के कारोबार में हाथ बटाना शुरू कर दिया था। वह 1990 में दिल्ली के लाजपत नगर में आकर बस गया और 1990 के दशक के दौरान ही जब उसके उसके पिता को आतंकियों के साथ संबंधों के आरोप में पकड़ा गया तो वह दुबई कारोबार संभालने चला गया।

नासिर शफी मीर ने पकड़े जाने के बाद उस समय पूछताछ में बताया कि उसने पहले कश्मीर मास्टर्स कंप्यूटर नाम से एक फर्मबनाई थी और उसके बाद उसने फैयलाला नामक कंपनी बनाई। लेकिन यह कंपनी 1998 में बंद कर दी गइ्र थी। वर्ष 1999 में उसने आईडीकास नाम से सूचना प्रौद्योगिकी की कंपनी बनाई। वर्ष 2002 में उसने पैसे का लेन देने करने वाली मनी एक्सचेंज की दो कंपनियां रीमस एक्सचेंज और कैश एक्सप्रेस की दुबई में स्थापना की। इनके जरिए ही वह पाकिस्तान, खाड़ी देशों और अमरीका व यूरोप से आने वाले पैसे को जम्मू कश्मीर में आतंकी व अलगाववादी गतिविधियों के लिए पहुंचाता था।

नासिर शफी मीर जब पकड़ा गया था तो उस समय केंद्र में कई बड़े अधिकारियों के अलावा कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के एक वरिष्ठ नेता जो बाद में मंत्री भी रहे हैं, ने उसकी रिहाई के लिए पूरा प्रयास किया था। इसके अलावा मीरवाईज मौलवी उमर फारुक ने वर्ष 2006-07 के दौरान केंद्र के साथ बातचीत की प्रक्रिया बहाल करने के लिए जिन 20 लोगों को रिहा करने की मांग की थी, उनमें नासिर भी एक था। इसके बाद ही केंद्र ने कथित तौर पर नासिर शफी मीर की जमानत याचिका विरोध नहीं किया और वर्ष 2007 में उसके जमानत मिल गई। सितंबर 2008 तक वह श्रीनगर में और दिल्ली में संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा तलब किए जाने तक हाजिरी देता रहा। लेकिन अक्टूबर 2008 में वह गायब हो गया। उसे अंतिम बार मीरवाईज मौलवी उमर फारुक के साथ नई दिल्ली के एक होटल में देखा गया था।

नवंबर 2008 में जब वह पुलिस के समक्ष हाजिर नहीं हुआ तो उसके फरार होने का पता चला था। इस मामले की छानबीन शुरू हुई तो पता चला कि उसने दक्षिण भारत के किसी राज्य से अपने लिए एक नया पासपोर्ट बनवाया था। इसी पासपोर्ट के सहारे वह नेपाल से यूरोप पहुंचा। वह लीबिया में भी कुछ समय रहा और उसके बाद उसे दुबई में भी अक्सर देखा जाता रहा है।नासिर शफी मीर को नवंबर 2009 में भगोड़ा घाेषित किया गया और अप्रैल 2014 में प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर अदालत ने उसकी संपत्ति जब्त करने का निर्देश दिया था।

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