कश्मीर भारत का अभिन्न अंग: जमीयत उलेमा-ए-हिंद

मुसलमानों की शीर्ष संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जेयूएच) ने बृहस्पतिवार को कहा कि कश्मीर देश का ‘‘अभिन्न हिस्सा’’ है और घाटी के लोगों का कल्याण भारत के साथ एकीकरण में ही है। साथ ही संगठन ने सरकार से अनुरोध किया कि सभी संवैधानिक उपायों का इस्तेमाल करके क्षेत्र में सामान्य हालात बहाल किए जाएं। जमीयत ने अपनी सालाना आम बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर अपने इस दृढ़ रुख को दोहराया कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और सभी कश्मीरी हमारे देशवासी हैं।

इसमें कहा गया है कि जमीयत हमेशा देश की एकता और अखंडता के लिए दृढ़ता से खड़ा रहा है और इसे सर्वोपरि महत्व दिया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि संगठन कभी भी किसी अलगाववादी आंदोलन का समर्थन नहीं कर सकता है और उसका मानना है कि इस तरह के आंदोलन न केवल भारत बल्कि कश्मीर के लोगों के लिए भी हानिकारक हैं।मुस्लिम संगठन ने कहा कि वह कश्मीरी लोगों की इच्छा, उनके स्वाभिमान और उनकी सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण की मांग से बेखबर नहीं है।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘इनके लोकतांत्रिक और मानव अधिकारों की रक्षा, हमारा राष्ट्रीय और मानवीय कर्तव्य हैं। हमारी दृष्टि में कश्मीरी जनता की तरक्की हिंदुस्तान के साथ जुड़ी हुई है।’’ प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘पड़ोसी देश और विरोधी ताकतें कश्मीर को नष्ट करने पर तुली हैं। कश्मीर के परेशान और पीड़ित लोग विरोधी ताकतों के बीच फंस गए हैं।’’ इस प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 को हटाने या जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने का कोई जिक्र नहीं है।

पाकिस्तान का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि वह कश्मीरियों को ‘‘ढाल’’ के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। जमीयत ने कहा, ‘‘ दुश्मन ने कश्मीरियों का ढाल की तरह इस्तेमाल करके कश्मीर को एक जंग का मैदान बना दिया है, जो लोगों को गतिरोध से बचाने में सबसे बड़ी बाधा बनाता है। कश्मीरी जनता की भलाई इसी में है कि इस वर्तमान स्थिति को परिवर्तित किया जाए। मुस्लिम संगठन ने कहा कि मौजूदा स्थिति से सिर्फ कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति व्यवस्था खतरे में है।

इसने कहा, ‘‘कश्मीर की मौजूदा स्थिति मांग करती है कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए शांतिपूर्ण पहल शुरू की जाए, खासकर परमाणु शक्तियों के टकराव से होने वाले नतीजों के मद्देनजर। मुस्लिम संगठन ने भारत सरकार से मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए कश्मीर के लोगों और उनकी संपत्ति की रक्षा करने की भी अपील की। प्रस्ताव में कहा गया है कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने और कश्मीर के लोगों के दिलों को जीतने के लिए हरसंभव संवैधानिक उपाय किए जाने चाहिए।

बाद में जमीयत के महासचिव महमूद मदनी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ हमने आज एक प्रस्ताव पारित किया है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। देश की सुरक्षा और अखंडता से कोई समझौता नहीं होगा। भारत हमारा देश है और हम इसके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह पेश करने की कोशिश कर रहा है कि भारतीय मुसलमान भारत के खिलाफ हैं। हम पाकिस्तान की इस हरकत की निंदा करते हैं।

इसके अलावा, जमीयत के प्रबंध परिषद ने यूएपीए अधिनियम 2019 पर चिंता जताई और कहा कि आशंका है कि कानून का इस्तेमाल राजनीतिक और धार्मिक दुर्भावना को निपटाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।धार्मिक कट्टरता के अपने प्रस्ताव में मुस्लिम संगठन ने भीड़ हत्याओं की निंदा की और मांग की कि ऐसी घटनाओं को तत्काल रोका जाए और इस बाबत उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जाए।

प्रस्ताव के मुताबिक, पिछले कुछ सालों से देश में बहुसंख्यकों के कुछ तत्वों की तरफ से फैलाई जाने वाली धार्मिक कट्टरवाद और एक विशेष संस्कृति को जबरदस्ती थोपने की कोशिशों की वजह से समाज के एक वर्ग में अविश्वास का रुझान बढ़ रहा है और देश की शांति और मेलजोल बाधित हो रहा है। इसमें कहा गया है कि देश के विभिन्न हिस्सों से भीड़ हत्या के कई मामले आए हैं जो देश पर धब्बा हैं।

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