राम भरोसे शिक्षा व्यवस्था: बिना ‘द्रोण’ के कैसे बनेंगे ‘अर्जुन’

पिथौरागढ़: शासन-प्रशासन के लाख दावों के बावजूद सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ में शिक्षण व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है. शिक्षकों के टोटे के कारण जनपद में हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है. यहां अधिकतर स्कूल राम भरोसे ही चल रहे हैं. आलम ये है कि जिले में प्रवक्ताओं के 60 फीसदी पद रिक्त हैं. ऐसा ही कुछ हाल प्रधानाचार्य और सहायक अध्यापकों के पदों का भी है. पेश है ये एक खास रिपोर्ट.

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य स्तर पर जारी कवायद कागजी साबित हो रही हैं. शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद भी विद्यालयों में आवश्यकता के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती नहीं हो रही है. अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्त होने के बाद सीमांत क्षेत्र के कई हाई स्कूल और इंटरमीडिएट पूरी तरह शिक्षक विहीन हो गए हैं. शिक्षा विभाग की कुव्यवस्थाओं की मार नौनिहालों के भविष्य पर पड़ रही हैं.

शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन का बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. जिले में प्रवक्ताओं के 1169 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 673 पद खाली पड़े हैं. वहीं, सहायक अध्यापकों के 1494 पद सृजित हैं, जिसमें से 316 पद रिक्त पड़े हैं. वहीं, जिले में प्रधानाचार्य के 128 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 95 पद रिक्त चल रहे हैं जबकि प्रधानाध्यापकों के 87 स्वीकृत पदों में से 72 पद खाली हैं.

शिक्षकों की भारी कमी के चलते शिक्षा विभाग के खिलाफ हर बार छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ता है. पढ़ाई में ध्यान देने की जगह छात्रों को शिक्षकों की मांग में धरना-प्रदर्शन करना पड़ रहा है. शिक्षण व्यवस्था की खस्ताहाली से ऐसे छात्र ज्याद परेशान हैं, जो आर्थिक तंगी के चलते प्राइवेट स्कूलों का रुख नहीं कर पा रहे हैं. सीमांत जिले में शिक्षा व्यवस्था की खस्ताहालत से शासन-प्रशासन अंजान नहीं है, लेकिन इसे सुधारने के लिए किसी तरह के प्रयास नहीं किये जा रहे हैं.

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